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सावन का अंतिम सोमवार: 24 अगस्त का पंचांग, जानें शुभ मुहूर्त, पूजा का समय और राहुकाल

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नई दिल्ली। हिंदू धर्म में पंचांग का विशेष महत्व माना गया है। किसी भी शुभ कार्य, पूजा पाठ, यात्रा, निवेश या धार्मिक अनुष्ठान की शुरुआत से पहले पंचांग देखकर शुभ और अशुभ समय का निर्धारण किया जाता है। पंचांग हिंदू काल गणना की महत्वपूर्ण व्यवस्था है, जिसमें सूर्य, चंद्रमा और अन्य ग्रहों की स्थिति के आधार पर तिथि, नक्षत्र, योग और विभिन्न मुहूर्तों की जानकारी मिलती है।

24 अगस्त को रहेगी श्रावण शुक्ल द्वादशी

24 अगस्त 2026 को श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि तड़के 4 बजकर 19 मिनट से शुरू होकर अगले दिन सुबह 6 बजकर 21 मिनट तक रहेगी। इसके बाद त्रयोदशी तिथि का आरंभ होगा। धार्मिक दृष्टि से यह दिन बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि इस दिन सावन महीने का आखिरी और चौथा सोमवार पड़ रहा है।

सावन के आखिरी सोमवार पर करें भगवान शिव की आराधना

सावन का सोमवार भगवान शिव को समर्पित माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा और विधि विधान से भगवान भोलेनाथ की पूजा करने से भक्तों को विशेष फल प्राप्त होता है। जो श्रद्धालु सावन के पहले तीन सोमवार का व्रत नहीं रख पाए हैं, वे सावन के आखिरी सोमवार को व्रत रखकर भगवान शिव और माता पार्वती की आराधना कर सकते हैं।

शिवलिंग पर जल, दूध, बेलपत्र और अन्य पूजन सामग्री अर्पित कर भगवान शिव का अभिषेक किया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सावन में भगवान शिव की उपासना करने से मनोकामनाओं की पूर्ति और जीवन में सुख समृद्धि की प्राप्ति होती है।

सूर्योदय और सूर्यास्त का समय

24 अगस्त को सोमवार के दिन सूर्योदय सुबह 6 बजकर 10 मिनट पर होगा, जबकि सूर्यास्त शाम 6 बजकर 48 मिनट पर होगा। चंद्रमा का उदय दोपहर बाद 4 बजकर 27 मिनट पर होगा और अगले दिन तड़के 3 बजकर 16 मिनट पर चंद्रास्त होगा।

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पूर्वाषाढ़ा के बाद उत्तराषाढ़ा नक्षत्र में प्रवेश करेगा चंद्रमा

पंचांग के अनुसार 24 अगस्त को सूर्य मघा नक्षत्र में स्थित रहेगा। वहीं चंद्रमा रात करीब 8 बजकर 28 मिनट तक पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र में रहेगा। इसके बाद चंद्रमा उत्तराषाढ़ा नक्षत्र में प्रवेश करेगा। इस दिन चंद्रमा धनु राशि में स्थित रहेगा, जबकि सूर्य सिंह राशि में रहेगा।

प्रीति योग के बाद बनेगा आयुष्मान योग

सोमवार को सुबह करीब 7 बजकर 3 मिनट तक प्रीति योग रहेगा। इसके बाद आयुष्मान योग प्रभावी हो जाएगा। ज्योतिषीय दृष्टि से शुभ योगों का विशेष महत्व माना जाता है और इन दौरान किए गए धार्मिक कार्यों को शुभ फलदायी माना जाता है।

अभिजित मुहूर्त में कर सकते हैं शुभ कार्य

24 अगस्त को अभिजित मुहूर्त दोपहर 12 बजकर 4 मिनट से 12 बजकर 54 मिनट तक रहेगा। अभिजित मुहूर्त को दिन के प्रमुख शुभ समयों में माना जाता है। इस दौरान शुभ कार्य, पूजा पाठ और धार्मिक अनुष्ठान किए जा सकते हैं।

इसके अलावा अमृत काल दोपहर 3 बजकर 6 मिनट से शाम 4 बजकर 53 मिनट तक रहेगा। धार्मिक और ज्योतिषीय मान्यताओं में अमृत काल को भी शुभ समय माना जाता है।

राहुकाल में नए काम की शुरुआत से बचें

सोमवार को राहुकाल सुबह 7 बजकर 45 मिनट से 9 बजकर 19 मिनट तक रहेगा। इसके अलावा गुलिक काल दोपहर 2 बजकर 4 मिनट से शाम 3 बजकर 38 मिनट तक रहेगा। यमगंड काल सुबह 10 बजकर 54 मिनट से दोपहर 12 बजकर 29 मिनट तक रहेगा।

पारंपरिक ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार राहुकाल, गुलिक काल और यमगंड काल में नए शुभ कार्य की शुरुआत करने से बचना चाहिए। हालांकि नियमित पूजा पाठ और आवश्यक धार्मिक कार्य अपनी परंपरा के अनुसार किए जा सकते हैं।

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पूर्व दिशा में रहेगा दिशाशूल

24 अगस्त को पूर्व दिशा में दिशाशूल रहेगा। ज्योतिष और वास्तु की मान्यताओं के अनुसार इस दिन पूर्व दिशा की यात्रा करने से बचने की सलाह दी जाती है। यदि किसी कारण से इस दिशा में यात्रा करना आवश्यक हो तो परंपरागत ज्योतिषीय उपायों के बाद यात्रा शुरू करने की मान्यता है।

सावन के आखिरी सोमवार का खास धार्मिक महत्व

सावन का आखिरी सोमवार शिव भक्तों के लिए विशेष आस्था का दिन माना जाता है। पूरे सावन भगवान शिव की आराधना करने वाले श्रद्धालुओं के लिए यह सोमवार विशेष पूजा, व्रत और अभिषेक के साथ सावन साधना के समापन का अवसर भी होता है। भक्त सुबह स्नान कर भगवान शिव का जलाभिषेक करें, बेलपत्र अर्पित करें और शिव मंत्रों का जाप करें।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान शिव और माता पार्वती की श्रद्धापूर्वक पूजा करने से जीवन में सुख, शांति और समृद्धि आती है। हालांकि पूजा और व्रत से जुड़ी परंपराएं अलग अलग क्षेत्रों और परिवारों में भिन्न हो सकती हैं।

24 अगस्त 2026 के प्रमुख समय

सूर्योदय सुबह 6 बजकर 10 मिनट

सूर्यास्त शाम 6 बजकर 48 मिनट

चंद्रोदय दोपहर 4 बजकर 27 मिनट

चंद्रास्त अगले दिन तड़के 3 बजकर 16 मिनट

अभिजित मुहूर्त दोपहर 12 बजकर 4 मिनट से 12 बजकर 54 मिनट तक

अमृत काल दोपहर 3 बजकर 6 मिनट से शाम 4 बजकर 53 मिनट तक

राहुकाल सुबह 7 बजकर 45 मिनट से 9 बजकर 19 मिनट तक

गुलिक काल दोपहर 2 बजकर 4 मिनट से शाम 3 बजकर 38 मिनट तक

यमगंड काल सुबह 10 बजकर 54 मिनट से दोपहर 12 बजकर 29 मिनट तक

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प्रीति योग सुबह करीब 7 बजकर 3 मिनट तक

दिशाशूल पूर्व दिशा में

 

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