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सोमवार को रखा जाएगा अजा एकादशी का व्रत, भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की पूजा से सुख-शांति की मान्यता

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नई दिल्ली। हिंदू धर्म में पंचांग का विशेष महत्व माना जाता है। किसी शुभ कार्य की शुरुआत, यात्रा, पूजा-पाठ, निवेश या अन्य महत्वपूर्ण कार्य से पहले पंचांग देखकर शुभ और अशुभ समय की जानकारी ली जाती है। हिंदू काल-गणना की इस पद्धति में सूर्य, चंद्रमा और अन्य ग्रहों की स्थिति के आधार पर तिथि, नक्षत्र, योग और विभिन्न मुहूर्तों की गणना की जाती है।

सात सितंबर 2026, सोमवार को भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि शाम 5:04 बजे तक रहेगी। इसके बाद द्वादशी तिथि शुरू हो जाएगी। इस दिन भाद्रपद कृष्ण पक्ष की अजा एकादशी का व्रत रखा जाएगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार अजा एकादशी पर भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की पूजा करने से पुण्य फल की प्राप्ति होती है। मान्यता है कि इस व्रत से व्यक्ति को पापों से मुक्ति मिलती है और जीवन में सुख, शांति एवं समृद्धि बनी रहती है।

सुबह से शाम तक जानिए सूर्योदय और सूर्यास्त का समय

पंचांग के अनुसार सोमवार को सूर्योदय सुबह 6:14 बजे होगा, जबकि सूर्यास्त शाम 6:35 बजे होगा। चंद्रमा से संबंधित समय की बात करें तो चंद्रोदय रात 1:55 बजे और चंद्रास्त दोपहर 3:59 बजे होगा।

दिन की शुरुआत धार्मिक गतिविधियों और पूजा-पाठ के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है। अजा एकादशी के अवसर पर श्रद्धालु भगवान विष्णु की आराधना और व्रत के माध्यम से धार्मिक लाभ प्राप्त करने की कामना करेंगे।

पूर्व फाल्गुनी में सूर्य, पुनर्वसु नक्षत्र में रहेगा चंद्रमा

पंचांग के मुताबिक सात सितंबर को सूर्य पूर्व फाल्गुनी नक्षत्र में स्थित रहेगा। वहीं चंद्रमा शाम 6:14 बजे तक पुनर्वसु नक्षत्र में रहेगा। ग्रहों और नक्षत्रों की स्थिति के आधार पर दिन के अलग-अलग समय का धार्मिक और ज्योतिषीय महत्व बताया गया है।

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सोमवार को सूर्य सिंह राशि में रहेगा, जबकि चंद्रमा मिथुन राशि में स्थित होगा। ज्योतिषीय गणना के अनुसार इन ग्रह स्थितियों का दिन के विभिन्न कार्यों और मुहूर्तों पर प्रभाव माना जाता है।

सुबह व्यतीपात योग, इसके बाद शुरू होगा वरीयान् योग

सोमवार को सुबह 6:41 बजे तक व्यतीपात योग रहेगा। इसके बाद वरीयान् योग शुरू हो जाएगा। पंचांग में योग को भी महत्वपूर्ण अंग माना जाता है और विभिन्न शुभ कार्यों के लिए मुहूर्त निर्धारित करते समय इसकी गणना की जाती है।

दिन में अभिजित मुहूर्त दोपहर 12:00 बजे से 12:49 बजे तक रहेगा। धार्मिक और ज्योतिषीय मान्यताओं में अभिजित मुहूर्त को दिन के अत्यंत शुभ समयों में गिना जाता है। वहीं अमृत काल दोपहर 3:59 बजे से शाम 5:29 बजे तक रहेगा।

राहुकाल में नए काम शुरू करने से बचने की मान्यता

सोमवार को राहुकाल सुबह 7:47 बजे से 9:19 बजे तक रहेगा। इसके अलावा गुलिक काल दोपहर 1:57 बजे से 3:30 बजे तक और यमगंड काल सुबह 10:52 बजे से दोपहर 12:24 बजे तक रहेगा।

पारंपरिक ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार राहुकाल, गुलिक काल और यमगंड के दौरान नए एवं महत्वपूर्ण कार्य शुरू करने से बचने की सलाह दी जाती है। हालांकि दैनिक जीवन में इन समयों का पालन व्यक्ति अपनी धार्मिक आस्था और परंपराओं के अनुसार करता है।

पूर्व दिशा में रहेगा दिशाशूल

पंचांग के अनुसार सोमवार को पूर्व दिशा में दिशाशूल रहेगा। ज्योतिष और पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार दिशाशूल वाले दिशा में यात्रा करने से बचने की सलाह दी जाती है।

यदि किसी आवश्यक कारण से इस दिशा में यात्रा करनी पड़े तो मान्यताओं के अनुसार कुछ विशेष ज्योतिषीय उपायों के बाद यात्रा शुरू करने की परंपरा है। ऐसे उपायों का पालन व्यक्ति अपनी आस्था और पारिवारिक परंपराओं के अनुसार कर सकता है।

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अजा एकादशी पर विष्णु-लक्ष्मी पूजन का विशेष महत्व

अजा एकादशी को भगवान विष्णु को समर्पित महत्वपूर्ण एकादशी व्रतों में माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इस दिन श्रद्धापूर्वक व्रत रखने और भगवान विष्णु की पूजा करने से आध्यात्मिक लाभ मिलता है। मां लक्ष्मी की पूजा को भी इस दिन शुभ माना गया है।

श्रद्धालु दिनभर व्रत रखकर भगवान विष्णु की पूजा, मंत्र जाप और धार्मिक पाठ कर सकते हैं। एकादशी व्रत को लेकर अलग-अलग क्षेत्रों और परिवारों में परंपराएं भी अलग हो सकती हैं।

 

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