Home » विविध इंडिया » पीएम मोदी के जनसेवा के 25 साल: बोले- देश ने मुझे बहुत कुछ दिया, इसलिए देश के लिए मेरा दायित्व सबसे अधिक

पीएम मोदी के जनसेवा के 25 साल: बोले- देश ने मुझे बहुत कुछ दिया, इसलिए देश के लिए मेरा दायित्व सबसे अधिक

Facebook
Twitter
WhatsApp

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को नई दिल्ली में आयोजित ‘विकसित भारत संकल्प सभा’ को संबोधित करते हुए अपनी 25 वर्षों की जनसेवा यात्रा को याद किया। उन्होंने देशवासियों के प्रति आभार जताते हुए कहा कि देश ने उन्हें बहुत कुछ दिया है, इसलिए देश के प्रति उनका दायित्व भी सबसे अधिक है। प्रधानमंत्री ने कहा कि 25 वर्षों का जनविश्वास और अनुभव उनकी सबसे बड़ी पूंजी है, लेकिन यह पूंजी केवल उनकी नहीं, बल्कि पूरे देश की है।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, “देश ने मुझे बहुत कुछ दिया है। इसलिए देश के लिए मेरा दायित्व भी सबसे अधिक है और मैं हृदय से यह मानता हूं कि देश के हर नागरिक का मुझ पर सबसे बड़ा हक है। ये 25 वर्ष का जन विश्वास, ये 25 वर्षों का अनुभव बहुत बड़ी पूंजी है। और ये पूंजी सिर्फ मोदी की नहीं है, ये पूंजी देश की है। मां भारती की हर संतान इस पूंजी की अधिकारी है।”

उन्होंने कहा कि 7 अक्टूबर 2001 को जब उन्होंने गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली थी, तब उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि जनसेवा का यह सफर 25 वर्षों तक निरंतर जारी रहेगा। प्रधानमंत्री ने कहा कि आज सरकार के प्रमुख के तौर पर लगातार सेवा करते हुए 25 वर्ष पूरे होना जनता के निरंतर आशीर्वाद का परिणाम है।

प्रधानमंत्री ने इस अवसर पर देशवासियों के साथ-साथ भारतीय जनता पार्टी, एनडीए और लोकतंत्र में आस्था रखने वाले सभी राजनीतिक साथियों का आभार जताया। उन्होंने कहा कि वह देश की जनता के चरणों में शीश झुकाकर नमन करते हैं। प्रधानमंत्री ने भारतीय लोकतंत्र और संविधान के प्रति भी सम्मान व्यक्त किया।

ALSO READ THIS :  महाराष्ट्र के नासिक में फिर महसूस हुए भूकंप के झटके, रिक्टर स्केल पर 3.4 रही तीव्रता

उन्होंने कहा कि इन 25 वर्षों के दौरान विधानसभा से लेकर लोकसभा तक अनेक चुनाव हुए और जनता ने उन्हें बार-बार सेवा का अवसर दिया। उन्होंने कहा कि वह भारत के लोकतंत्र और संविधान का वंदन करते हैं तथा ‘सेवा ज्योति यात्रा’ में भाग लेने वाले सभी नागरिकों का अभिनंदन करते हैं।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि आज वह जिस स्थान पर हैं और जिस दायित्व का निर्वहन कर रहे हैं, उसमें सबसे बड़ा योगदान जनता-जनार्दन का है। उन्होंने कहा कि उनके लिए जनता ईश्वर का ही रूप है। करोड़ों देशवासियों का विश्वास और लाखों कार्यकर्ताओं का परिश्रम उनकी सबसे बड़ी शक्ति रहा है।

प्रधानमंत्री ने बताया कि बुधवार सुबह उन्होंने श्री विनायक मंदिर में दर्शन किए। उन्होंने कहा कि मंदिर में उन्होंने देश और 140 करोड़ भारतवासियों के लिए प्रार्थना की। साथ ही उन्होंने परमात्मा से अपने लिए भी इतनी शक्ति और सामर्थ्य मांगी कि वह देश के लिए और अधिक ऊर्जा के साथ काम कर सकें और दिन-रात देशवासियों की सेवा करते रहें।

अपने 25 वर्षों के राजनीतिक और प्रशासनिक सफर को याद करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि पीछे मुड़कर देखने पर उन्हें केवल शुक्रगुजारी का भाव महसूस होता है। उन्होंने कहा कि जीवन में मिले हर व्यक्ति और हर अनुभव ने उन्हें कुछ न कुछ सिखाया।

प्रधानमंत्री ने कहा कि जिन लोगों ने उन्हें सिखाया, उन्होंने विनम्रता सिखाई। जिन्होंने उन्हें गिराया, उन्होंने दोबारा उठना सिखाया। समर्थकों ने उनका हौसला बढ़ाया, जबकि आलोचकों ने उन्हें अपने भीतर झांकने का अवसर दिया। उनके साथ खड़े रहने वाले लोगों ने उन्हें भरोसे की ताकत का अनुभव कराया।

ALSO READ THIS :  जम्मू-कश्मीर के डोडा में बादल फटने से तबाही: कई सड़कें टूटीं, गांवों का संपर्क कटा, चिनाब नदी खतरे के निशान से ऊपर!

उन्होंने कहा कि 25 वर्षों की यह यात्रा केवल उनकी व्यक्तिगत यात्रा नहीं है, बल्कि करोड़ों देशवासियों के विश्वास, कार्यकर्ताओं की मेहनत और लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनता की आस्था से बनी यात्रा है। प्रधानमंत्री ने कहा कि वह आने वाले समय में भी देश की सेवा को इसी भावना और समर्पण के साथ आगे बढ़ाते रहेंगे।

[wonderplugin_slider id=1]

टॉप स्टोरी

ज़रूर पढ़ें