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पूर्णिमा के साथ शुरू होगा पितृ पक्ष, जानिए शुभ मुहूर्त, राहुकाल और दिशाशूल

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नई दिल्ली। हिंदू धर्म में पंचांग का विशेष महत्व माना जाता है। किसी भी शुभ कार्य, पूजा-पाठ, यात्रा, निवेश अथवा धार्मिक अनुष्ठान से पहले पंचांग देखकर तिथि, नक्षत्र, योग और शुभ-अशुभ समय का विचार किया जाता है। पंचांग सूर्य, चंद्रमा और अन्य ग्रहों की स्थिति के आधार पर दिन की धार्मिक और ज्योतिषीय गणना प्रस्तुत करता है।

26 सितंबर 2026 को भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि रात 10 बजकर 18 मिनट तक रहेगी। इसके बाद प्रतिपदा तिथि शुरू हो जाएगी। इसी दिन से पितृ पक्ष की शुरुआत भी मानी जा रही है और पूर्णिमा श्राद्ध किया जाएगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पूर्णिमा के दिन भगवान सत्यनारायण के रूप में भगवान विष्णु, माता लक्ष्मी और चंद्र देव की पूजा करना शुभ माना जाता है।

सूर्योदय, सूर्यास्त और चंद्रोदय का समय

26 सितंबर शनिवार को सूर्योदय सुबह 6 बजकर 20 मिनट पर होगा, जबकि सूर्यास्त शाम 5 बजकर 15 मिनट पर होगा। चंद्रोदय शाम 6 बजे और चंद्रास्त अगले दिन सुबह 6 बजे के आसपास होगा। पूर्णिमा होने के कारण इस दिन चंद्रमा की पूजा और अर्घ्य का भी विशेष महत्व रहेगा।

उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र में रहेगा सूर्य

पंचांग के अनुसार 26 सितंबर को सूर्य उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र में स्थित रहेंगे। उत्तराफाल्गुनी आकाश मंडल का 12वां नक्षत्र माना जाता है। इसका विस्तार सिंह राशि के 26 डिग्री 40 मिनट से कन्या राशि के 10 डिग्री तक माना जाता है। इस नक्षत्र के स्वामी सूर्य देव हैं, जबकि इसके देवता अर्यमा माने जाते हैं, जिन्हें देवताओं और पितरों के प्रमुख के रूप में वर्णित किया गया है।

ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र में जन्म लेने वाले जातकों में तेजस्विता, महत्वाकांक्षा, परोपकार और नेतृत्व क्षमता जैसे गुण देखे जाते हैं।

दोपहर तक रहेगा गंड योग

शनिवार को दोपहर 1 बजकर 17 मिनट तक गंड योग रहेगा। ज्योतिष शास्त्र में गंड को 27 नित्य योगों में दसवां योग माना गया है। इसे सामान्यतः कठिनाइयों और बाधाओं से जुड़ा योग माना जाता है। ज्योतिषीय गणना के अनुसार जब सूर्य और चंद्रमा की गतियों का कुल योग 120 डिग्री से 133 डिग्री 20 मिनट के बीच होता है, तब गंड योग बनता है।

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हालांकि ज्योतिषीय मान्यताओं में इस योग को चुनौतीपूर्ण माना गया है, वहीं इस योग में जन्म लेने वाले लोगों के बारे में निडर, दृढ़ निश्चयी और शूरवीर होने की मान्यता भी प्रचलित है।

अभिजीत मुहूर्त में किए जा सकते हैं शुभ कार्य

26 सितंबर को अभिजीत मुहूर्त सुबह 11 बजकर 54 मिनट से दोपहर 12 बजकर 42 मिनट तक रहेगा। अभिजीत मुहूर्त को दिन के प्रमुख शुभ समयों में माना जाता है। इसकी अवधि सामान्यतः करीब 48 मिनट होती है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इस समय किए गए शुभ कार्यों में सकारात्मक परिणाम मिलने की संभावना मानी जाती है।

अभिजीत मुहूर्त की गणना दिनमान के आधार पर की जाती है और इसे दिन के मध्य का विशेष मुहूर्त माना जाता है। मान्यता है कि इस अवधि में सूर्य की विशेष स्थिति के कारण यह समय शुभ कार्यों के लिए अनुकूल रहता है।

अमृतकाल में शुभ कार्य करना माना जाता है फलदायी

शनिवार को अमृतकाल तड़के 3 बजकर 32 मिनट से सुबह 5 बजकर 7 मिनट तक रहेगा। पंचांग और ज्योतिषीय मान्यताओं में अमृतकाल को अत्यंत शुभ समय माना गया है। इस अवधि को सकारात्मक ऊर्जा और मंगलकारी प्रभाव से जुड़ा हुआ माना जाता है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार अमृतकाल में पूजा पाठ, नए व्यापार से जुड़े कार्य, निवेश अथवा महत्वपूर्ण कार्य करना शुभ माना जाता है।

सुबह रहेगा राहुकाल

26 सितंबर को राहुकाल सुबह 9 बजकर 19 मिनट से 10 बजकर 48 मिनट तक रहेगा। हिंदू ज्योतिष में राहुकाल को नए शुभ कार्य की शुरुआत के लिए अनुकूल नहीं माना जाता। राहुकाल की गणना सूर्योदय और सूर्यास्त के बीच के समय को आठ बराबर भागों में विभाजित करके की जाती है।

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राहुकाल का समय स्थान के अनुसार बदल सकता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इस अवधि में नया काम शुरू करने से बचना चाहिए, जबकि पहले से चल रहे कार्य जारी रखे जा सकते हैं।

गुलिक काल सुबह 6 बजकर 20 मिनट से

शनिवार को गुलिक काल सुबह 6 बजकर 20 मिनट से 7 बजकर 50 मिनट तक रहेगा। ज्योतिषीय मान्यताओं में गुलिक काल को सामान्यतः अशुभ समय माना जाता है और इस अवधि में नए कार्य की शुरुआत से बचने की सलाह दी जाती है। हालांकि पहले से चल रहे कार्यों को जारी रखने में कोई बाधा नहीं मानी जाती।

कुछ ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार नियमित रूप से किए जाने वाले कार्य, दान अथवा धन से संबंधित कुछ गतिविधियां इस समय की जा सकती हैं।

दोपहर बाद रहेगा यमगंड काल

शनिवार को यमगंड काल दोपहर 1 बजकर 47 मिनट से 3 बजकर 17 मिनट तक रहेगा। यमगंड काल को यमराज से संबंधित समय माना जाता है और इस दौरान नए शुभ कार्यों की शुरुआत से बचने की धार्मिक मान्यता है।

इस अवधि में नई यात्रा शुरू करने, नया व्यापार आरंभ करने अथवा महत्वपूर्ण नए कार्य करने से बचने की सलाह दी जाती है। हालांकि इन मान्यताओं का संबंध धार्मिक और ज्योतिषीय परंपराओं से है।

कन्या राशि में सूर्य और मीन राशि में चंद्रमा

26 सितंबर को सूर्य कन्या राशि में स्थित रहेंगे। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार कन्या राशि में सूर्य की स्थिति के दौरान व्यवहारिकता, योजना बनाकर कार्य करने और कामकाज में व्यवस्थित दृष्टिकोण को महत्व दिया जाता है।

वहीं, चंद्रमा मीन राशि में रहेगा। ज्योतिष में चंद्रमा को मन और भावनाओं का कारक माना गया है। मीन राशि को जल तत्व से संबंधित राशि माना जाता है। इसलिए ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार इस स्थिति में व्यक्ति अधिक संवेदनशील और भावुक हो सकता है।

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पूर्व और ईशान दिशा में रहेगा दिशाशूल

शनिवार को दिशाशूल पूर्व दिशा और उत्तर पूर्व यानी ईशान कोण में रहेगा। ज्योतिष और वास्तु परंपरा में दिशाशूल का संबंध किसी विशेष दिन यात्रा के लिए अशुभ मानी जाने वाली दिशा से है। धार्मिक मान्यताओं का पालन करने वाले लोग इस दौरान यात्रा की दिशा निर्धारित करते समय दिशाशूल का विचार करते हैं।

पितृ पक्ष की शुरुआत से दिन का बढ़ेगा धार्मिक महत्व

26 सितंबर को पूर्णिमा तिथि होने के साथ पितृ पक्ष की शुरुआत भी हो रही है। इस कारण दिन का धार्मिक महत्व और बढ़ जाता है। पितरों के निमित्त श्राद्ध, तर्पण और अन्य धार्मिक अनुष्ठान किए जाते हैं। पूर्णिमा श्राद्ध के साथ शुरू होने वाले इस पक्ष में लोग अपने पूर्वजों के प्रति श्रद्धा व्यक्त करते हैं और उनकी आत्मिक शांति के लिए धार्मिक कर्मकांड करते हैं।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन भगवान सत्यनारायण, माता लक्ष्मी और चंद्र देव की पूजा के साथ पितरों का स्मरण करना भी विशेष फलदायी माना जाता है।

मुख्य पंचांग जानकारी

तिथि भाद्रपद शुक्ल पूर्णिमा रात 10 बजकर 18 मिनट तक

सूर्योदय सुबह 6 बजकर 20 मिनट

सूर्यास्त शाम 5 बजकर 15 मिनट

चंद्रोदय शाम 6 बजे

चंद्रास्त सुबह 6 बजे

नक्षत्र उत्तराफाल्गुनी

योग गंड दोपहर 1 बजकर 17 मिनट तक

अभिजीत मुहूर्त सुबह 11 बजकर 54 मिनट से दोपहर 12 बजकर 42 मिनट तक

अमृतकाल तड़के 3 बजकर 32 मिनट से सुबह 5 बजकर 7 मिनट तक

राहुकाल सुबह 9 बजकर 19 मिनट से 10 बजकर 48 मिनट तक

गुलिक काल सुबह 6 बजकर 20 मिनट से 7 बजकर 50 मिनट तक

यमगंड काल दोपहर 1 बजकर 47 मिनट से 3 बजकर 17 मिनट तक

सूर्य राशि कन्या

चंद्र राशि मीन

दिशाशूल पूर्व और ईशान दिशा

पितृ पक्ष पूर्णिमा श्राद्ध के साथ शुरुआत

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