नई दिल्ली। हिंदू धर्म में पंचांग का विशेष महत्व माना जाता है। शुभ कार्य, पूजा-पाठ, यात्रा, निवेश या किसी नए काम की शुरुआत से पहले पंचांग देखकर शुभ और अशुभ समय का निर्धारण किया जाता है। पंचांग सूर्य, चंद्रमा और अन्य ग्रहों की स्थिति के आधार पर तैयार की जाने वाली हिंदू काल-गणना पद्धति है। सात अक्टूबर 2026 को आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की द्वादशी तिथि रात 11:16 बजे तक रहेगी। इसके बाद त्रयोदशी तिथि प्रारंभ हो जाएगी।
बुधवार को सूर्योदय सुबह 6:24 बजे और सूर्यास्त शाम 6:05 बजे होगा। चंद्रोदय रात 2:59 बजे तथा चंद्रास्त शाम 4:02 बजे होगा। इस दिन कई महत्वपूर्ण शुभ मुहूर्त रहेंगे, जबकि राहुकाल, गुलिक काल और यमगंड के दौरान नए शुभ कार्यों की शुरुआत से बचने की मान्यता है।
सुबह 11:45 से 12:32 बजे तक अभिजीत मुहूर्त
सात अक्टूबर को अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:45 बजे से दोपहर 12:32 बजे तक रहेगा। ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार अभिजीत मुहूर्त दिन के सबसे शुभ और फलदायी समय में से एक माना जाता है। इसकी अवधि सामान्य तौर पर करीब 48 मिनट होती है और इसकी गणना दिनमान के आधार पर की जाती है।
मान्यता है कि इस समय किए गए शुभ कार्यों पर नकारात्मक प्रभाव कम होता है। नए कार्य की शुरुआत, महत्वपूर्ण निर्णय और मांगलिक गतिविधियों के लिए अभिजीत मुहूर्त को विशेष महत्व दिया जाता है।
रात 7:18 से 8:52 बजे तक रहेगा अमृतकाल
बुधवार को रात 7:18 बजे से 8:52 बजे तक अमृतकाल रहेगा। पंचांग और ज्योतिष में अमृतकाल को अत्यंत शुभ और सकारात्मक समय माना जाता है। मान्यता के अनुसार इस दौरान किए गए कार्यों में सफलता की संभावना बढ़ती है।
नए व्यापार की शुरुआत, निवेश, पूजा-पाठ और महत्वपूर्ण यात्रा जैसे कार्यों के लिए अमृतकाल को अनुकूल माना जाता है।
रात 2:51 बजे तक रहेगा शुभ योग
इस दिन शुभ योग रात 2:51 बजे तक रहेगा। ज्योतिषीय पंचांग में 27 नित्य योग बताए गए हैं, जिनमें शुभ योग को 23वां योग माना जाता है। इसे मांगलिक और सकारात्मक कार्यों के लिए अनुकूल माना गया है।
मुहूर्त शास्त्र की मान्यताओं के अनुसार शुभ योग में विवाह, सगाई, गृह प्रवेश, नए वाहन की खरीद, व्यापार का शुभारंभ और यात्रा जैसे कार्य किए जा सकते हैं।
दोपहर 12:14 से 1:42 बजे तक राहुकाल
सात अक्टूबर को राहुकाल दोपहर 12:14 बजे से 1:42 बजे तक रहेगा। ज्योतिष शास्त्र में राहुकाल को नए शुभ कार्यों की शुरुआत के लिए अनुकूल नहीं माना जाता। इस अवधि में किसी नए काम की शुरुआत करने से बचने की सलाह दी जाती है।
हालांकि, मान्यता के अनुसार जो कार्य पहले से चल रहे हों, उन्हें राहुकाल के दौरान जारी रखा जा सकता है। राहुकाल का समय स्थान के अनुसार बदलता रहता है।
गुलिक काल सुबह 10:47 से दोपहर 12:14 बजे तक
बुधवार को गुलिक काल सुबह 10:47 बजे से दोपहर 12:14 बजे तक रहेगा। ज्योतिषीय मान्यताओं में गुलिक काल को सामान्य रूप से नए कार्यों की शुरुआत के लिए अशुभ माना जाता है। हालांकि पहले से चल रहे कार्यों को जारी रखने में इसे बाधक नहीं माना जाता।
कुछ ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार बार-बार किए जाने वाले कार्य, दान और धन जमा करने जैसे कार्य इस अवधि में किए जा सकते हैं।
सुबह 7:52 से 9:19 बजे तक यमगंड
यमगंड काल सुबह 7:52 बजे से 9:19 बजे तक रहेगा। इसे यमराज से संबंधित समय माना जाता है और नए कार्यों की शुरुआत के लिए अशुभ माना जाता है।
ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार इस अवधि में नया व्यापार शुरू करने, महत्वपूर्ण यात्रा पर निकलने या बड़े आर्थिक लेनदेन से बचना चाहिए।
हस्त नक्षत्र में रहेंगे सूर्य
पंचांग के अनुसार सात अक्टूबर को सूर्य हस्त नक्षत्र में स्थित रहेंगे। वैदिक ज्योतिष में हस्त को 13वां नक्षत्र माना गया है और इसका अर्थ हाथ से संबंधित माना जाता है। हस्त नक्षत्र के स्वामी चंद्रमा हैं, जबकि इसकी राशि कन्या है।
ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार हस्त नक्षत्र में सूर्य की स्थिति का प्रभाव सभी 12 राशियों पर अलग-अलग रूप में पड़ सकता है। चंद्रमा और सूर्य के बीच मित्रता का संबंध माना जाता है, इसलिए इस स्थिति को ज्योतिष की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है।
कन्या राशि में सूर्य और सिंह राशि में चंद्रमा
बुधवार को सूर्य कन्या राशि में स्थित रहेंगे। ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार कन्या राशि में सूर्य की स्थिति व्यक्ति को व्यावहारिक और योजनाबद्ध तरीके से कार्य करने के लिए प्रेरित कर सकती है। कामकाज और बौद्धिक क्षमता से जुड़े मामलों पर भी इसका प्रभाव माना जाता है।
वहीं, चंद्रमा सिंह राशि में स्थित रहेगा। सिंह राशि के स्वामी सूर्य हैं और इसे ऊर्जा, आत्मविश्वास तथा नेतृत्व का प्रतीक माना जाता है। ज्योतिष के अनुसार सिंह राशि में चंद्रमा की स्थिति व्यक्ति के स्वभाव, भावनाओं, आत्मविश्वास और नेतृत्व क्षमता को प्रभावित कर सकती है।
उत्तर दिशा में रहेगा दिशाशूल
सात अक्टूबर को दिशाशूल उत्तर दिशा में रहेगा। ज्योतिष और वास्तु की मान्यताओं के अनुसार दिशाशूल उस दिशा को कहा जाता है, जिसमें किसी विशेष दिन यात्रा करना शुभ नहीं माना जाता।
बुधवार को उत्तर दिशा में यात्रा करने से बचने की सलाह दी जाती है। हालांकि दिशाशूल से जुड़ी मान्यताएं स्थान, परंपरा और व्यक्तिगत ज्योतिषीय गणना के अनुसार अलग-अलग हो सकती हैं।
सात अक्टूबर के प्रमुख समय
सूर्योदय सुबह 6:24 बजे होगा और सूर्यास्त शाम 6:05 बजे होगा। द्वादशी तिथि रात 11:16 बजे तक रहेगी, जिसके बाद त्रयोदशी शुरू होगी। अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:45 से दोपहर 12:32 बजे तक रहेगा, जबकि अमृतकाल रात 7:18 से 8:52 बजे तक रहेगा। राहुकाल दोपहर 12:14 से 1:42 बजे तक, गुलिक काल सुबह 10:47 से 12:14 बजे तक और यमगंड सुबह 7:52 से 9:19 बजे तक रहेगा।

