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भगवान विष्णु और चंद्र देव की पूजा का विशेष संयोग, जानिए शुभ मुहूर्त और राहुकाल

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नई दिल्ली। हिंदू धर्म में पंचांग का विशेष महत्व माना जाता है। किसी शुभ कार्य की शुरुआत, यात्रा, निवेश, धार्मिक अनुष्ठान या पूजा पाठ से पहले पंचांग देखकर शुभ और अशुभ समय का निर्धारण किया जाता है। पंचांग हिंदू काल गणना की महत्वपूर्ण पद्धति है, जिसमें तिथि, नक्षत्र, योग, करण और वार के साथ सूर्य तथा चंद्रमा की स्थिति का भी विशेष महत्व होता है।

27 अगस्त 2026 को गुरुवार के दिन श्रावण महीने के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि सुबह 9 बजकर 9 मिनट तक रहेगी। इसके बाद पूर्णिमा तिथि शुरू हो जाएगी। पूर्णिमा के अवसर पर भगवान विष्णु और चंद्र देव की पूजा का विशेष महत्व माना गया है। इसी दिन हयग्रीव जयंती भी मनाई जाएगी। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, हयग्रीव भगवान विष्णु का अवतार हैं और उनकी पूजा विद्या, बुद्धि तथा ज्ञान की प्राप्ति के लिए विशेष फलदायी मानी जाती है।

चतुर्दशी के बाद पूर्णिमा का आगमन, हयग्रीव जयंती से सजेगा दिन

27 अगस्त को सुबह 9 बजकर 9 मिनट तक चतुर्दशी तिथि रहेगी। इसके बाद पूर्णिमा तिथि प्रारंभ हो जाएगी। पूर्णिमा के दिन भगवान विष्णु की पूजा और चंद्र देव को अर्घ्य देने की परंपरा है।

इस दिन हयग्रीव जयंती होने के कारण भगवान विष्णु के हयग्रीव स्वरूप की आराधना का भी विशेष महत्व रहेगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान हयग्रीव को ज्ञान और विद्या का प्रतीक माना जाता है। ऐसे में विद्यार्थी और ज्ञान की प्राप्ति की इच्छा रखने वाले लोग इस दिन भगवान हयग्रीव की पूजा और ध्यान कर सकते हैं।

सूर्योदय से चंद्रोदय तक जानिए दिन का पूरा समय

पंचांग के अनुसार 27 अगस्त को सूर्योदय सुबह 6 बजकर 11 मिनट पर होगा, जबकि सूर्यास्त शाम 6 बजकर 45 मिनट पर होगा। चंद्रोदय शाम 6 बजकर 22 मिनट पर होगा और अगले दिन तड़के 6 बजकर 2 मिनट पर चंद्रास्त होगा।

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इस दिन सूर्य मघा नक्षत्र में स्थित रहेगा, जबकि चंद्रमा धनिष्ठा नक्षत्र में रहेगा। सूर्य सिंह राशि में और चंद्रमा मकर राशि में स्थित रहेगा।

शोभन योग के बाद बनेगा अतिगंड योग

27 अगस्त को सुबह 7 बजकर 54 मिनट तक शोभन योग रहेगा। इसके बाद अतिगंड योग प्रारंभ होगा। पंचांग में योगों का भी विशेष महत्व माना जाता है और शुभ कार्यों के लिए अनुकूल समय निर्धारित करते समय इसे ध्यान में रखा जाता है।

इस दिन अभिजित मुहूर्त दोपहर 12 बजकर 3 मिनट से 12 बजकर 53 मिनट तक रहेगा। इसे दिन के प्रमुख शुभ समयों में से एक माना जाता है। वहीं अमृत काल दोपहर 3 बजकर 12 मिनट से शाम 4 बजकर 54 मिनट तक रहेगा।

राहुकाल में नए काम शुरू करने से बचने की मान्यता

गुरुवार को राहुकाल दोपहर 2 बजकर 2 मिनट से 3 बजकर 37 मिनट तक रहेगा। इसके अलावा गुलिक काल सुबह 9 बजकर 19 मिनट से 10 बजकर 54 मिनट तक रहेगा।

यमगंड काल सुबह 6 बजकर 11 मिनट से 7 बजकर 45 मिनट तक रहेगा। पारंपरिक ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार राहुकाल, गुलिक काल और यमगंड के दौरान नए और महत्वपूर्ण कार्य शुरू करने से बचने की सलाह दी जाती है। हालांकि इन मान्यताओं का पालन व्यक्ति अपनी धार्मिक आस्था और परंपरा के अनुसार करता है।

दक्षिण दिशा में रहेगा दिशाशूल, यात्रा से पहले रखें ध्यान

27 अगस्त को दक्षिण दिशा में दिशाशूल रहेगा। ज्योतिषीय और पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार दिशाशूल वाले दिन संबंधित दिशा में यात्रा करने से बचने की सलाह दी जाती है।

यदि किसी आवश्यक कारण से दक्षिण दिशा की ओर यात्रा करनी हो तो प्रचलित ज्योतिषीय परंपराओं के अनुसार विशेष उपाय करके यात्रा शुरू की जा सकती है। धार्मिक मान्यताओं में यात्रा से पहले शुभ समय और दिशा का विचार करने की परंपरा रही है।

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27 अगस्त 2026 का पंचांग एक नजर में

वार गुरुवार

तिथि सुबह 9 बजकर 9 मिनट तक चतुर्दशी, इसके बाद पूर्णिमा

सूर्योदय सुबह 6 बजकर 11 मिनट

सूर्यास्त शाम 6 बजकर 45 मिनट

चंद्रोदय शाम 6 बजकर 22 मिनट

चंद्रास्त अगले दिन सुबह 6 बजकर 2 मिनट

नक्षत्र सूर्य मघा, चंद्रमा धनिष्ठा

सूर्य राशि सिंह

चंद्र राशि मकर

शोभन योग सुबह 7 बजकर 54 मिनट तक

इसके बाद अतिगंड योग

अभिजित मुहूर्त दोपहर 12 बजकर 3 मिनट से 12 बजकर 53 मिनट तक

अमृत काल दोपहर 3 बजकर 12 मिनट से शाम 4 बजकर 54 मिनट तक

राहुकाल दोपहर 2 बजकर 2 मिनट से 3 बजकर 37 मिनट तक

गुलिक काल सुबह 9 बजकर 19 मिनट से 10 बजकर 54 मिनट तक

यमगंड काल सुबह 6 बजकर 11 मिनट से 7 बजकर 45 मिनट तक

दिशाशूल दक्षिण दिशा में

पूर्णिमा पर विष्णु पूजा और चंद्र देव को अर्घ्य का विशेष महत्व

27 अगस्त को सुबह चतुर्दशी समाप्त होने के बाद पूर्णिमा तिथि शुरू होगी। पूर्णिमा के अवसर पर भगवान विष्णु की पूजा के साथ चंद्र देव की आराधना की परंपरा है। हयग्रीव जयंती के कारण इस दिन भगवान विष्णु के हयग्रीव स्वरूप का स्मरण भी विशेष माना गया है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार ज्ञान, बुद्धि और विद्या की कामना रखने वाले श्रद्धालुओं के लिए यह दिन विशेष महत्व रखता है। श्रद्धालु अपनी आस्था और परंपरा के अनुसार पूजा पाठ, व्रत और धार्मिक अनुष्ठान कर सकते हैं।

 


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