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वराह जयंती पर विष्णु सहस्रनाम का जाप शुभ, जानें राहुकाल और अभिजीत मुहूर्त

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नई दिल्ली। हिंदू धर्म में पंचांग का विशेष महत्व माना जाता है। किसी शुभ कार्य की शुरुआत, यात्रा, निवेश, पूजा-पाठ या अन्य महत्वपूर्ण कार्यों से पहले पंचांग देखकर शुभ-अशुभ समय का विचार किया जाता है। पंचांग हिंदू काल-गणना की पारंपरिक पद्धति है, जिसमें सूर्य, चंद्रमा और अन्य ग्रहों की स्थिति के आधार पर तिथि, नक्षत्र, योग और मुहूर्त की गणना की जाती है।

13 सितंबर 2026 को भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि सुबह 7:08 बजे तक रहेगी। इसके बाद शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि शुरू हो जाएगी। रविवार का यह दिन भगवान विष्णु के वराह अवतार को समर्पित रहेगा और इस दिन वराह जयंती के अवसर पर भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना करना शुभ माना जाता है।

वराह जयंती पर विष्णु पूजा का विशेष महत्व

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार वराह अवतार भगवान विष्णु के प्रमुख अवतारों में से एक है। वराह जयंती के दिन भगवान विष्णु के वराह स्वरूप की पूजा करने से विशेष पुण्य फल प्राप्त होने की मान्यता है।

इस दिन श्रीमद्भागवत पुराण के तीसरे स्कंध का पाठ करना और भगवान विष्णु के विष्णु सहस्रनाम का जाप करना शुभ फलदायी माना गया है। श्रद्धालु विधि-विधान से भगवान विष्णु की पूजा कर सकते हैं और अपनी श्रद्धा के अनुसार व्रत एवं धार्मिक अनुष्ठान कर सकते हैं।

सूर्योदय, सूर्यास्त और चंद्रोदय का समय

13 सितंबर को रविवार सुबह 6:16 बजे सूर्योदय होगा, जबकि सूर्यास्त शाम 6:29 बजे होने का अनुमान है। चंद्रमा का उदय सुबह 8:03 बजे और चंद्रास्त शाम 7:47 बजे होगा।

पंचांग के अनुसार इस दिन सूर्य पूर्व फाल्गुनी नक्षत्र में स्थित रहेगा, जबकि चंद्रमा से संबंधित नक्षत्र की स्थिति में दिन के दौरान परिवर्तन होगा। सुबह से दोपहर 1:06 बजे तक हस्त नक्षत्र रहेगा और इसके बाद चित्रा नक्षत्र शुरू हो जाएगा।

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शुक्ल योग के बाद शुरू होगा ब्रह्म योग

13 सितंबर को दोपहर 1:43 बजे तक शुक्ल योग रहेगा। इसके बाद ब्रह्म योग प्रारंभ होगा। पंचांग में योगों का भी विशेष महत्व माना जाता है और शुभ कार्यों के लिए अनुकूल योग को प्राथमिकता दी जाती है।

इस दिन अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:58 बजे से दोपहर 12:47 बजे तक रहेगा। पारंपरिक ज्योतिष में अभिजीत मुहूर्त को दिन के प्रमुख शुभ समयों में शामिल किया जाता है। इस अवधि में शुभ कार्य किए जाने की मान्यता है।

अमृत काल भी रहेगा शुभ

रविवार को अमृत काल सुबह 7:03 बजे से 8:40 बजे तक रहेगा। धार्मिक और ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार अमृत काल को शुभ कार्यों के लिए अनुकूल समय माना जाता है। ऐसे में श्रद्धालु इस अवधि में पूजा-पाठ और अन्य धार्मिक कार्य कर सकते हैं।

राहुकाल में शुभ कार्य शुरू करने से बचें

पंचांग के अनुसार रविवार को राहुकाल शाम 4:57 बजे से 6:29 बजे तक रहेगा। इसके अलावा गुलिक काल दोपहर 3:25 बजे से शाम 4:57 बजे तक और यमगंड काल दोपहर 12:22 बजे से शाम 1:54 बजे तक रहेगा।

पारंपरिक ज्योतिषीय मान्यताओं में राहुकाल, गुलिक काल और यमगंड को शुभ कार्यों के लिए अनुकूल नहीं माना जाता। इसलिए इन अवधियों में नए या महत्वपूर्ण कार्यों की शुरुआत करने से बचने की सलाह दी जाती है।

पश्चिम दिशा में रहेगा दिशाशूल

13 सितंबर को पश्चिम दिशा में दिशाशूल रहेगा। ज्योतिष और वास्तु की पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार दिशाशूल वाले दिन संबंधित दिशा में यात्रा करने से बचने की सलाह दी जाती है।

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यदि पश्चिम दिशा की यात्रा करना आवश्यक हो, तो धार्मिक मान्यताओं के अनुसार कुछ ज्योतिषीय उपायों के बाद यात्रा शुरू की जा सकती है। हालांकि, इन उपायों को आस्था और पारंपरिक मान्यता के रूप में ही देखा जाता है।

सूर्य और चंद्रमा की राशि स्थिति

पंचांग के अनुसार रविवार को सूर्य वृश्चिक राशि में स्थित रहेगा, जबकि चंद्रमा मकर राशि में रहेगा। ग्रहों की यह स्थिति दिन के पंचांग का महत्वपूर्ण हिस्सा मानी जाती है।

इस प्रकार 13 सितंबर 2026 को वराह जयंती, भगवान विष्णु की पूजा, विष्णु सहस्रनाम जाप और धार्मिक पाठ के लिए महत्वपूर्ण दिन माना गया है। वहीं, शुभ कार्यों के लिए अभिजीत मुहूर्त और अमृत काल का ध्यान रखने तथा राहुकाल, गुलिक काल और यमगंड काल में नए कार्य शुरू करने से बचने की पारंपरिक सलाह दी गई है।

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