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यूएन में गीदड़भभकी देकर घिरे शहबाज शरीफ: भारत ने दिलाया ‘फॉर्म-47’ याद, रिपोर्टर ने पूछा- हाफिज पर कब होगी कार्रवाई?

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न्यूयॉर्क। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र में एक बार फिर कश्मीर और सिंधु जल संधि का मुद्दा उठाते हुए भारत पर निशाना साधा। 25 सितंबर को अपने संबोधन में शरीफ ने कश्मीर को पाकिस्तान की “जुगुलर वेन” यानी गले की नस बताया और सिंधु नदी के पानी को लेकर भारत पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के हिस्से के पानी को रोकने या मोड़ने की किसी भी कोशिश को उनका देश “युद्ध की कार्रवाई” मानेगा।

शरीफ ने अपने भाषण में सिंधु नदी प्रणाली को पाकिस्तान और पूरे क्षेत्र के लिए जीवनरेखा बताते हुए कहा कि नदियां देशों को जोड़ने का काम करें, उन्हें बांटने का नहीं। वहीं, भारत के खिलाफ उनके इस रुख के जवाब में संयुक्त राष्ट्र में भारत ने ‘राइट टू रिप्लाई’ का इस्तेमाल किया। भारत की प्रथम सचिव पेटल गहलोत ने पाकिस्तान के दावों पर सवाल उठाते हुए आतंकवाद, अल्पसंख्यकों की स्थिति और पाकिस्तान की राजनीतिक व्यवस्था से जुड़े मुद्दे उठाए।

पेटल गहलोत ने पाकिस्तान के आतंकवाद संबंधी रिकॉर्ड का उल्लेख करते हुए 9/11 हमलों के मास्टरमाइंड ओसामा बिन लादेन के पाकिस्तान में पाए जाने का संदर्भ दिया। उन्होंने पाकिस्तान की राजनीति में चर्चित रहे ‘फॉर्म-47’ का भी उल्लेख किया और इसे मौजूदा पाकिस्तानी सत्ता को लेकर उठने वाले सवालों के संदर्भ में रखा।

‘फॉर्म-47’ का संदर्भ पाकिस्तान के 2024 के आम चुनावों से जुड़ा है। चुनाव के बाद कई उम्मीदवारों और राजनीतिक दलों ने नतीजों की गणना और घोषणा को लेकर सवाल उठाए थे। ब्रिटेन की हाउस ऑफ कॉमन्स लाइब्रेरी ने भी 2024 के चुनाव के बाद वोटिंग और परिणामों को लेकर उठे धांधली के आरोपों का उल्लेख किया है। कॉमनवेल्थ ऑब्जर्वर ग्रुप की रिपोर्ट में भी कुछ निर्वाचन क्षेत्रों में फॉर्म-45 और उसके आधार पर तैयार किए गए फॉर्म-47 से जुड़ी कथित अनियमितताओं का उल्लेख किया गया था।

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पाकिस्तान की सैन्य व्यवस्था और संवैधानिक बदलावों का मुद्दा भी हाल के महीनों में चर्चा में रहा है। 27वें संवैधानिक संशोधन के बाद पाकिस्तान की सैन्य कमान की संरचना में महत्वपूर्ण बदलाव हुए और अगस्त 2026 में संसद ने रक्षा बलों से संबंधित कानूनों में भी बदलाव किए। इन घटनाक्रमों को लेकर पाकिस्तान की राजनीतिक व्यवस्था में सेना की भूमिका पर बहस जारी है।

भारत के जवाब में पेटल गहलोत ने पाकिस्तान के उस दावे पर भी प्रतिक्रिया दी जिसमें शहबाज शरीफ ने भारत-पाकिस्तान सैन्य टकराव से जुड़े घटनाक्रमों को पाकिस्तान की उपलब्धि के रूप में पेश किया था। गहलोत ने भारत की ओर से सैन्य कार्रवाई और उसके प्रभाव से जुड़े साक्ष्यों का हवाला देते हुए पाकिस्तान के दावे को चुनौती दी। उन्होंने कहा कि उपलब्ध सैटेलाइट तस्वीरों और अन्य सबूतों के आधार पर भारतीय कार्रवाई में पाकिस्तान के सैन्य ठिकानों को नुकसान पहुंचने की बात सामने आई थी।

शहबाज शरीफ के संयुक्त राष्ट्र दौरे के दौरान आतंकवाद को लेकर उनसे सीधे सवाल भी पूछे गए। संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में प्रवेश करते समय एक पत्रकार ने उनसे पूछा कि पाकिस्तान आतंकवादियों को पनाह देना कब बंद करेगा। शरीफ ने इस सवाल का कोई जवाब नहीं दिया और आगे बढ़ गए। बाद में संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय से बाहर निकलते समय उनसे लश्कर-ए-तैयबा प्रमुख हाफिज सईद के खिलाफ मुकदमा चलाने को लेकर सवाल किया गया, लेकिन उन्होंने इस पर भी कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। इस पूरे घटनाक्रम की रिपोर्ट कई मीडिया संस्थानों ने की है।

हाफिज सईद लश्कर-ए-तैयबा का संस्थापक है और भारत में 26/11 मुंबई आतंकी हमले से जुड़े मामलों में आरोपी रहा है। भारत सरकार ने उसे आतंकवादी के तौर पर नामित किया है। पत्रकारों के सवालों पर शहबाज शरीफ की ओर से जवाब नहीं दिए जाने का वीडियो भी सामने आया, जिसके बाद उनका संयुक्त राष्ट्र दौरा आतंकवाद से जुड़े सवालों को लेकर चर्चा में रहा।

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इस तरह शहबाज शरीफ के संयुक्त राष्ट्र संबोधन में कश्मीर और सिंधु जल संधि प्रमुख मुद्दे रहे, जबकि भारत के जवाब में आतंकवाद, ओसामा बिन लादेन, पाकिस्तान की चुनावी प्रक्रिया और फॉर्म-47 जैसे मुद्दे सामने आए। संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र में भारत और पाकिस्तान के बीच आरोप-प्रत्यारोप का यह सिलसिला एक बार फिर दोनों देशों के बीच लंबे समय से चले आ रहे विवादों को अंतरराष्ट्रीय मंच पर ले आया है। संयुक्त राष्ट्र के अनुसार 81वें महासभा सत्र की सामान्य बहस 22 से 26 सितंबर और 28 सितंबर को निर्धारित है।

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