मुज़फ़्फ़रनगर। खतौली थाना क्षेत्र में कूड़े के ढेर में एक दिन की मृत नवजात बच्ची का शव मिलने से इंसानियत को झकझोर देने वाला मामला सामने आया। जिस बच्ची ने अभी दुनिया को ठीक से देखा तक नहीं था, उसे कूड़े के ढेर में छोड़ दिया गया। सूचना मिलने पर क्रांतिकारी शालू सैनी गुरुवार को मौके पर पहुंचीं और नवजात को अपने हाथों में उठाकर दोपहर करीब 2 बजे सम्मानजनक अंतिम विदाई दी।

शालू सैनी को सूचना मिली थी कि खतौली क्षेत्र में कूड़े के ढेर के बीच नवजात बच्ची का शव पड़ा है। मौके पर पहुंचने के बाद उन्होंने बच्ची के शव को वहां से उठाया और विधि-विधान के साथ अंतिम संस्कार कर उसे सम्मानपूर्वक विदाई दी।
शालू सैनी ने बताया कि वह अब तक 6 हजार से अधिक लावारिस और बेसहारा शवों को अपना नाम देकर सम्मानजनक अंतिम विदाई दे चुकी हैं। लेकिन नवजात बच्चों के अंतिम संस्कार का मौका जब भी आता है, उनकी रूह तक कांप जाती है। उनका कहना है कि इतनी छोटी बच्ची को कूड़े में फेंक देना बेहद पीड़ादायक है।
उन्होंने कहा कि बेटियां किसी पर बोझ नहीं होतीं। अगर किसी परिवार को बेटी पालने में परेशानी है तो उसे कूड़े में फेंकने के बजाय उनके आश्रम में छोड़ सकते हैं। शालू सैनी ने कहा कि ऐसी बच्चियों को वह खुद पाल-पोसकर सक्षम बनाने का प्रयास करेंगी।
इस घटना ने एक बार फिर नवजात बच्चियों को लेकर समाज की सोच पर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक तरफ बच्चियों को बचाने और उन्हें आगे बढ़ाने की बातें होती हैं, वहीं दूसरी तरफ एक मासूम को जन्म के बाद कूड़े के ढेर में छोड़ दिया गया। शालू सैनी की पहल ने उस बच्ची को कम से कम वह सम्मान दिया, जिसकी वह हकदार थी।

