मुज़फ़्फ़रनगर। तितावी थाना क्षेत्र के धौलरा गांव में सरकारी जमीन से कब्जा हटाने की कार्रवाई के दौरान तीन पर हमले के मामले में अब एक दिन बाद नया मोड़ सामने आया है। प्रशासनिक टीम के साथ अभद्रता और लेखपाल से मारपीट के आरोपों के बाद अब आरोपी पक्ष की महिला गुरुवार दोपहर करीब 3 बजे एसएसपी कार्यालय पहुंची। महिला ने प्रशासनिक टीम, लेखपाल, ग्राम प्रधान और पुलिस पर गंभीर आरोप लगाते हुए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की मांग की।
आपको बता दें कि बुधवार को अन्नपूर्णा भवन के लिए प्रस्तावित सरकारी जमीन पर रातोंरात दीवार खड़ी किए जाने की सूचना पर नायब तहसीलदार रिजवान अली और लेखपाल मनीष प्रशासनिक टीम के साथ धौलरा पहुंचे थे। प्रशासन की ओर से निर्माण हटाने की कार्रवाई के दौरान विवाद हो गया था। इस मामले में प्रशासनिक टीम ने लेखपाल के साथ मारपीट और अभद्रता के आरोप लगाए थे। पुलिस ने कुछ लोगों को हिरासत में लेकर कार्रवाई शुरू की थी और नायब तहसीलदार की ओर से पुलिस को तहरीर भी दी गई थी।
इसी कार्रवाई के बाद गुरुवार को प्रमिला और उनकी बेटी शिवानी ने एसएसपी कार्यालय पहुंचकर अपनी ओर से पूरी घटना बताई। उनका कहना है कि उन्होंने बैनामे के जरिए करीब 600 गज जमीन खरीदी है। परिवार का आरोप है कि उनकी जमीन से सटी खसरा संख्या 146 की भूमि में उनकी करीब दो मीटर जमीन दब गई थी और वहां पहले से शौचालय बना हुआ था। अपनी जमीन तक पहुंचने और पशुओं की देखभाल के लिए रास्ते की मांग को लेकर उन्होंने अधिकारियों से शिकायत की थी।
शिवानी के मुताबिक, उन्हें रास्ता दिलाने का आश्वासन मिला था। इसके बाद जब उन्होंने अपनी खरीदी हुई जमीन पर नींव भरने का काम शुरू किया तो दोपहर करीब 2:30 बजे लेखपाल मनीष, ग्राम प्रधान और कुछ अन्य लोग मौके पर पहुंचे। आरोप है कि इस दौरान उनके और परिवार के सदस्यों के साथ गाली-गलौज और मारपीट की गई। शिवानी ने एसएसपी कार्यालय में अपने सिर पर लगी चोट भी दिखाई।
परिवार का आरोप है कि मौके पर मौजूद महिला पुलिसकर्मियों ने उनके मोबाइल फोन छीन लिए और लेखपाल व अन्य लोगों ने उनके साथ धक्का-मुक्की की। इसके बाद जेसीबी से उनकी भरी जा रही नींव को खोद दिया गया और वहां खड़े पेड़ को भी काट दिया गया। परिवार ने यह भी आरोप लगाया कि पुलिस उन्हें और उनके परिजनों को तितावी थाने ले गई, जहां उनके साथ दोबारा मारपीट की गई।
परिवार के मुताबिक, रात करीब 10 बजे उन्हें शामली बस अड्डे पर छोड़ दिया गया। देर रात करीब 12 बजे जब वे घर पहुंचे तो दरवाजे खुले थे और सामान अस्त-व्यस्त मिला। परिवार ने इन घटनाओं की जांच कराने और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
इस पूरे मामले में अब दोनों पक्षों की शिकायतें सामने आ चुकी हैं। प्रशासन की ओर से सरकारी जमीन पर कब्जे और टीम के साथ अभद्रता व मारपीट की शिकायत की गई है, जबकि दूसरे पक्ष ने कार्रवाई के दौरान मारपीट और पुलिस के दुर्व्यवहार के आरोप लगाए हैं। ऐसे में जमीन के रिकॉर्ड, मौके की स्थिति, निर्माण और दोनों पक्षों के आरोपों की जांच के बाद ही पूरे विवाद की तस्वीर साफ होगी।
