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हरिद्वार में अर्द्धकुंभ की तैयारियों को झटका: गंग नहर में अचानक छोड़ा 12 हजार क्यूसेक पानी, निर्माणाधीन घाट डूबे

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हरिद्वार। अर्द्धकुंभ की तैयारियों के बीच गंग नहर में अचानक बढ़ाए गए पानी ने निर्माणाधीन घाटों की चिंता बढ़ा दी है। बुधवार सुबह उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग की ओर से करीब 12 हजार क्यूसेक पानी छोड़े जाने के बाद ऋषिकुल पुल से ज्वालापुर तक निर्माणाधीन कई घाटों तक पानी पहुंच गया।

सामान्य दिनों में करीब पांच से साढ़े पांच हजार क्यूसेक पानी छोड़े जाने की बात सामने आ रही है। अचानक लगभग दोगुना पानी आने से निर्माण एजेंसियों में हड़कंप मच गया।

अर्द्धकुंभ के मद्देनजर ऋषिकुल पुल से ज्वालापुर तक कई स्थानों पर घाटों का निर्माण तेजी से चल रहा है। इन्हें नवंबर तक पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित है। ऐसे में निर्माण स्थलों तक पानी पहुंचने से जहां बुधवार को काम प्रभावित हुआ, वहीं निर्माण सामग्री और तैयार हो चुके हिस्सों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता बढ़ गई है।

पानी बढ़ने से निर्माण की रफ्तार पर ब्रेक

जलस्तर बढ़ने के बाद कई निर्माणाधीन घाटों पर पानी पहुंच गया। अब पानी कम होने के बाद निर्माण स्थलों को दोबारा व्यवस्थित करना और प्रभावित हिस्सों में काम शुरू करना निर्माण एजेंसियों के लिए चुनौती होगा। यदि जलस्तर लंबे समय तक बढ़ा रहा तो निर्माण कार्यों की रफ्तार प्रभावित होने के साथ नवंबर की समयसीमा पर भी असर पड़ सकता है।

पानी छोड़ने से पहले समन्वय क्यों नहीं?

घटना ने अर्द्धकुंभ की तैयारियों से जुड़े विभागों के बीच समन्वय व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। जब ऋषिकुल पुल से ज्वालापुर तक बड़े स्तर पर घाटों का निर्माण चल रहा है और काम पूरा करने की समयसीमा नवंबर तय है, ऐसे में नहर में पानी बढ़ाने से पहले निर्माण एजेंसियों और अर्द्धकुंभ मेला अधिष्ठान को इसकी जानकारी दी गई थी या नहीं, यह बड़ा सवाल है।

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यदि पानी छोड़ने की प्रक्रिया पहले से निर्धारित थी तो निर्माणाधीन घाटों की सुरक्षा के लिए आवश्यक एहतियाती कदम क्यों नहीं उठाए गए? और यदि पानी अचानक बढ़ाया गया तो संबंधित विभागों को इसकी तत्काल सूचना क्यों नहीं दी गई? फिलहाल इन सवालों के स्पष्ट जवाब सामने नहीं आए हैं।

पानी उतरने के बाद भी बढ़ेगी चुनौती

निर्माणाधीन घाटों पर पानी पहुंचने का असर केवल एक दिन के काम तक सीमित नहीं माना जा रहा। पानी उतरने के बाद निर्माण स्थलों की सफाई और स्थिति सामान्य करने, सामग्री को व्यवस्थित करने तथा प्रभावित हिस्सों में दोबारा काम शुरू करने में अतिरिक्त समय लग सकता है।

अर्द्धकुंभ जैसे बड़े आयोजन की तैयारियों में विभिन्न विभागों के बीच बेहतर तालमेल बेहद जरूरी है। गंग नहर में अचानक बढ़े जलस्तर की घटना ने इसी समन्वय व्यवस्था पर सवालिया निशान लगा दिया है। अब निगाहें इस बात पर हैं कि संबंधित विभाग प्रभावित घाटों पर काम जल्द शुरू कराने और नवंबर की समयसीमा के भीतर निर्माण पूरा करने के लिए क्या कदम उठाते हैं।

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