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बागपत के टटरी में बाल श्रम के खिलाफ बड़ी कार्रवाई: 8 बच्चे रेस्क्यू, दुकानों-होटल-वर्कशॉप में चला अभियान

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बागपत। जिलाधिकारी अस्मिता लाल के निर्देश पर जनपद में बाल श्रम एवं भिक्षावृत्ति उन्मूलन के लिए चलाए जा रहे अभियान के तहत बुधवार को टटरी कस्बे में बड़ी कार्रवाई की गई। श्रम विभाग, थाना एएचटीयू और सहयोगी संस्था की संयुक्त टीम ने विभिन्न दुकानों, होटल-ढाबों और ऑटोमोबाइल वर्कशॉप में निरीक्षण करते हुए बाल श्रम में लगे आठ बच्चों को रेस्क्यू किया। आवश्यक वैधानिक प्रक्रिया पूरी करने के बाद सभी बच्चों को उनके परिजनों के सुपुर्द कर दिया गया।

अभियान के दौरान श्रम प्रवर्तन अधिकारी प्रदीप कुमार के नेतृत्व में श्रम विभाग की टीम, थाना एएचटीयू बागपत के थानाध्यक्ष शिव सिंह, महिला उपनिरीक्षक सरिता सिंह मय टीम तथा ग्रामीण समाज विकास केंद्र (जस्ट राइट फॉर चिल्ड्रेन) के गजेंद्र सिंह की संयुक्त टीम ने टटरी क्षेत्र में विभिन्न प्रतिष्ठानों का निरीक्षण किया।

निरीक्षण के दौरान आठ बच्चे बाल श्रम करते हुए पाए गए। टीम ने तत्काल कार्रवाई करते हुए सभी बच्चों को रेस्क्यू किया। श्रम प्रवर्तन अधिकारी की ओर से बच्चों के संबंध में आवश्यक वैधानिक कार्रवाई की गई। प्रक्रिया पूरी होने के बाद बच्चों को उनके परिजनों के सुपुर्द किया गया।

18 वर्ष से कम उम्र के बच्चों से श्रम न कराने की चेतावनी

अभियान के दौरान दुकानदारों, होटल-ढाबा संचालकों और अन्य प्रतिष्ठान मालिकों को स्पष्ट निर्देश दिए गए कि 18 वर्ष से कम आयु के बच्चों से किसी भी प्रकार का बाल श्रम न कराया जाए। अधिकारियों ने चेतावनी दी कि बाल श्रम कराते हुए पाए जाने पर संबंधित प्रतिष्ठान संचालक के खिलाफ नियमानुसार वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।

सहायक श्रम आयुक्त एमएल पाल ने कहा कि जनपद में बाल एवं किशोर श्रम के खिलाफ अभियान लगातार जारी रहेगा। बच्चों का स्थान कार्यस्थल नहीं, बल्कि विद्यालय है। प्रतिष्ठान संचालकों को बच्चों को शिक्षा से जोड़ने और उनके बेहतर भविष्य के निर्माण में सहयोग करना चाहिए।

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उन्होंने कहा कि बाल श्रम बच्चों के अधिकारों और उनके भविष्य को प्रभावित करता है। बाल श्रम की रोकथाम के लिए समाज के प्रत्येक वर्ग को अपनी जिम्मेदारी निभानी होगी।

बच्चों को शिक्षा और सुरक्षित भविष्य से जोड़ना जरूरी : मेहर चंद

ग्रामीण समाज विकास केंद्र के सचिव मेहर चंद ने कहा कि बाल श्रम के कारण बच्चे शिक्षा और अपने अधिकारों से दूर हो जाते हैं। अभियान के दौरान रेस्क्यू किए गए बच्चों को संरक्षण और शिक्षा से जोड़ना सबसे महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि बाल श्रम की रोकथाम केवल सरकारी विभागों की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि समाज, अभिभावकों और व्यापारियों को भी इसमें सक्रिय भूमिका निभानी होगी। उन्होंने प्रतिष्ठान संचालकों से अपील की कि वे बच्चों को काम पर रखने के बजाय उन्हें स्कूल भेजने में सहयोग करें, ताकि उनका भविष्य सुरक्षित और बेहतर बनाया जा सके।

स्थानीय लोगों को भी किया जागरूक

अभियान के दौरान स्थानीय लोगों और प्रतिष्ठान संचालकों को बाल एवं किशोर श्रम से संबंधित कानूनी प्रावधानों की जानकारी दी गई। दुकानों, बाजार, होटल-ढाबों और अन्य प्रतिष्ठानों पर बाल श्रम रोकथाम संबंधी पंपलेट चस्पा कर लोगों को जागरूक किया गया।

टीम ने लोगों को 1090, 112, 1076, 1098, 1930 और 1033 सहित संबंधित हेल्पलाइन नंबरों की जानकारी भी दी, ताकि बाल श्रम अथवा बच्चों से जुड़ी किसी भी समस्या की सूचना संबंधित विभाग तक पहुंचाई जा सके।

अभियान के दौरान भिक्षावृत्ति करते हुए कोई बच्चा नहीं मिला। श्रम विभाग ने स्पष्ट किया कि जनपद में बाल एवं किशोर श्रम तथा भिक्षावृत्ति के खिलाफ अभियान आगे भी लगातार जारी रहेगा। अभियान का उद्देश्य बच्चों को श्रम से मुक्त कराकर शिक्षा, संरक्षण और सुरक्षित भविष्य से जोड़ना है।

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