मुज़फ़्फ़रनगर के बुढ़ाना क्षेत्र में सात साल की बच्ची के अपहरण और दुष्कर्म के करीब छह साल पुराने मामले में न्यायालय ने बुधवार को दो दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई है। दोषी अकरम पुत्र जब्बार और आसिफ उर्फ देशी पुत्र फरमान पर न्यायालय ने कुल 1.20 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है। मामले में अभियोजन पक्ष के लिए डीएनए रिपोर्ट अहम साक्ष्य बनी।
अभियोजन के मुताबिक, वर्ष 2020 में सात साल की बच्ची घर के बाहर खेल रही थी। इसी दौरान दोनों आरोपी उसे बहला-फुसलाकर अपने साथ ले गए और एक मकान की छत पर ले जाकर उसके साथ दुष्कर्म किया। घटना के बाद दोनों फरार हो गए। बच्ची के पिता की तहरीर पर पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की और दोनों आरोपियों को 12 दिसंबर 2020 को गिरफ्तार कर लिया।
विवेचना पूरी होने के बाद पुलिस ने 22 दिसंबर 2020 को दोनों के खिलाफ न्यायालय में आरोप-पत्र दाखिल किया। मुकदमे की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने कुल नौ गवाह पेश किए। इनमें पीड़िता के माता-पिता समेत छह गवाह अपने पूर्व बयानों से मुकर गए और पक्षद्रोही हो गए।
गवाहों के पक्षद्रोही होने के बावजूद अभियोजन पक्ष ने वैज्ञानिक साक्ष्य और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर अपना पक्ष रखा। मुकदमे में आरोपी आसिफ की डीएनए रिपोर्ट महत्वपूर्ण साबित हुई। अभियोजन के अनुसार, डीएनए जांच ने अपराध की पुष्टि से जुड़े वैज्ञानिक साक्ष्य उपलब्ध कराए, जिसे न्यायालय के सामने रखा गया।
अभियोजन पक्ष ने न्यायालय में सात साल की बच्ची के खिलाफ हुए अपराध को गंभीर बताते हुए दोषियों के लिए कठोर सजा की मांग की। दोनों पक्षों की दलीलें और उपलब्ध साक्ष्यों का अवलोकन करने के बाद न्यायालय ने अकरम और आसिफ को दोषी माना।
न्यायालय ने दोनों दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई और कुल 1.20 लाख रुपये का जुर्माना लगाया। वर्ष 2020 में दर्ज हुआ यह मामला करीब छह साल बाद न्यायालय के फैसले के साथ निर्णायक चरण में पहुंचा।

