नई दिल्ली। भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित द्विपक्षीय व्यापार समझौते (बीटीए) को लेकर हलचल तेज हो गई है। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शुक्रवार को इस समझौते को जल्द अंतिम रूप देने की जरूरत पर जोर देते हुए कहा कि इसका निष्पादन वैश्विक व्यापार और दोनों देशों के आर्थिक संबंधों के हित में होगा। उन्होंने संकेत दिया कि दोनों देशों के बीच चल रही बातचीत अब अंतिम चरण की ओर बढ़ रही है।
बैंकॉक में अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) और विश्व बैंक की वार्षिक बैठकों के इतर अटलांटिक काउंसिल के साथ बातचीत में सीतारमण ने कहा कि वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल भी हाल ही में समझौते को लेकर सकारात्मक उम्मीद जता चुके हैं। गोयल ने एक-दो दिन पहले कहा था कि उन्हें उम्मीद है कि समझौता जल्द हस्ताक्षर के लिए तैयार हो जाएगा।
वित्त मंत्री के बयान को भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता में संभावित प्रगति के संकेत के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि, समझौते पर हस्ताक्षर और इसके लागू होने की औपचारिक तारीख को लेकर अभी अंतिम घोषणा नहीं हुई है।
वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भारत की विकास दर मजबूत: सीतारमण
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच भारत की आर्थिक वृद्धि को मजबूत बताया। उन्होंने कहा कि तमाम चुनौतियों के बावजूद भारत अपनी विकास दर बनाए रखने में सफल रहा है। कोविड महामारी के बाद पिछले चार-पांच वर्षों से भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में शामिल रहा है।
सीतारमण ने इस प्रदर्शन का श्रेय समावेशी विकास नीतियों, कौशल विकास में निवेश और वित्तीय अनुशासन को दिया। उनके मुताबिक, सरकार आर्थिक विकास को गति देने के साथ-साथ सार्वजनिक धन के जिम्मेदारीपूर्ण इस्तेमाल पर भी ध्यान दे रही है।
उन्होंने कहा कि अर्थव्यवस्था के कमजोर वर्गों को सहायता देना जरूरी है, लेकिन इसके साथ अनियंत्रित सरकारी खर्च से बचना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। सरकार इस संतुलन को बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है।
पूंजीगत खर्च से बुनियादी ढांचे को मिली रफ्तार
निर्मला सीतारमण ने बुनियादी ढांचे के विकास में सार्वजनिक पूंजीगत व्यय की भूमिका को भी महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि सरकार के पूंजीगत खर्च से देश में बुनियादी ढांचे के निर्माण को गति मिली है और इसका अर्थव्यवस्था पर व्यापक गुणक प्रभाव पड़ा है।
गुणक प्रभाव का अर्थ है कि बुनियादी ढांचे पर सरकारी निवेश से निर्माण गतिविधियों, रोजगार, परिवहन, कारोबार और अन्य आर्थिक क्षेत्रों में भी गतिविधियां बढ़ती हैं। सरकार की रणनीति आर्थिक विकास को गति देने के साथ वित्तीय अनुशासन बनाए रखने पर केंद्रित है।
पीयूष गोयल बोले- पहले चरण का कानूनी मसौदा तैयार हो रहा
भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को लेकर एक दिन पहले वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने भी अहम जानकारी दी थी। उन्होंने कहा था कि समझौते के पहले चरण को अंतिम रूप दिया जा चुका है और फिलहाल उसका कानूनी मसौदा तैयार किया जा रहा है।
गोयल के अनुसार, समझौते को लागू करने से पहले यह सुनिश्चित करना जरूरी होगा कि भारत को समान प्रतिस्पर्धी अर्थव्यवस्थाओं के मुकाबले पर्याप्त प्रतिस्पर्धात्मक लाभ मिले। इससे संकेत मिलता है कि सरकार व्यापार समझौते के संभावित लाभों के साथ घरेलू उद्योग और भारतीय कारोबारियों के हितों को भी ध्यान में रख रही है।
अमेरिकी राजदूत ने भी जल्द समझौते के संकेत दिए
भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता को लेकर अमेरिका की ओर से भी सकारात्मक संकेत सामने आए हैं। भारत में अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर ने गुरुवार को कहा था कि प्रस्तावित समझौते का व्यापक ढांचा तैयार हो चुका है और दोनों देश इसे अंतिम रूप देने के बेहद करीब हैं।
नई दिल्ली में आयोजित ब्लूमबर्ग न्यू इकॉनमी फोरम में बोलते हुए गोर ने कहा था कि भारत और अमेरिका व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने की दिशा में काफी आगे बढ़ चुके हैं।
दोनों देशों के आर्थिक रिश्तों के लिए अहम समझौता
भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित द्विपक्षीय व्यापार समझौते से व्यापारिक संबंधों को नई दिशा मिलने की उम्मीद है। समझौते के विभिन्न प्रावधानों को अंतिम रूप देने के दौरान बाजार तक पहुंच, प्रतिस्पर्धात्मक लाभ और दोनों देशों के आर्थिक हितों जैसे मुद्दे महत्वपूर्ण रहेंगे।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के ताजा बयान, पीयूष गोयल की ओर से कानूनी मसौदा तैयार होने की जानकारी और अमेरिकी राजदूत के सकारात्मक संकेतों से वार्ता में प्रगति के संकेत मिलते हैं। हालांकि, समझौते की अंतिम शर्तों, हस्ताक्षर और लागू होने की तारीख को लेकर आधिकारिक घोषणा का इंतजार है।

