लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजनीति में 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर बयानबाजी तेज होने लगी है। प्रदेश सरकार में मंत्री और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर ने समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव पर निशाना साधते हुए दावा किया है कि 29 नवंबर को आजमगढ़ में होने वाली सामाजिक समरसता महारैली से सपा को बड़ा राजनीतिक झटका लगेगा। राजभर ने कहा कि इस रैली के जरिए उस क्षेत्र में सपा की राजनीतिक ताकत को चुनौती दी जाएगी, जिसे अखिलेश यादव की पार्टी अपना मजबूत गढ़ मानती है।
राजभर ने कहा कि आजमगढ़ के आईटीआई मैदान में आयोजित होने वाली महारैली के माध्यम से लोगों के बीच राजनीतिक भ्रम दूर करने की कोशिश की जाएगी। उन्होंने दावा किया कि रैली के बाद क्षेत्र में सपा की राजनीतिक स्थिति को लेकर तस्वीर बदल सकती है। हालांकि, ये राजभर के राजनीतिक दावे हैं, जिनका वास्तविक असर आगामी चुनावों में ही स्पष्ट होगा।
आजमगढ़ में 29 नवंबर को होगी सामाजिक समरसता महारैली
सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी की ओर से 29 नवंबर को आजमगढ़ के आईटीआई मैदान में सामाजिक समरसता महारैली आयोजित की जाएगी। राजभर ने इस आयोजन को सपा के प्रभाव वाले क्षेत्र में अपनी राजनीतिक ताकत दिखाने के प्रयास के रूप में पेश किया है।
आजमगढ़ लंबे समय से उत्तर प्रदेश की राजनीति में महत्वपूर्ण स्थान रखता है। ऐसे में यहां महारैली आयोजित करने को सुभासपा की राजनीतिक रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है। राजभर का कहना है कि इस कार्यक्रम के जरिए सपा को चुनौती दी जाएगी और जनता के बीच अपनी बात रखी जाएगी।
अखिलेश यादव के घोषणापत्र पर उठाए सवाल
राजभर ने आगामी विधानसभा चुनाव के लिए अखिलेश यादव की ओर से घोषणापत्र तैयार करने की कवायद पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि सपा प्रमुख चाहे घोषणापत्र जारी करें या कोई दूसरी घोषणा करें, प्रदेश में उनकी सरकार बनने की संभावना नहीं है।
सपा के पिछले कार्यकाल पर निशाना साधते हुए राजभर ने आरोप लगाया कि उस दौरान प्रदेश में दंगे और गुंडागर्दी की घटनाएं हुई थीं, जिससे जनता परेशान थी। उन्होंने कहा कि अखिलेश यादव अपनी सरकार के समय जनता का भरोसा जीतने में सफल नहीं रहे और इसी वजह से उनकी पार्टी सत्ता से बाहर है।
राजभर ने दावा किया कि सपा के पुराने घोषणापत्रों और 2027 के विधानसभा चुनाव के लिए तैयार किए जाने वाले नए घोषणापत्र में कोई बड़ा अंतर नहीं होगा। उनके मुताबिक, जनता अब पुराने वादों के आधार पर सपा के पक्ष में आने वाली नहीं है। ये आरोप राजभर ने राजनीतिक बयानबाजी के दौरान लगाए हैं।
आजम खान से मुलाकात को लेकर भी अखिलेश पर निशाना
अखिलेश यादव के 22 अक्टूबर को रामपुर जेल में आजम खान से मुलाकात करने के प्रस्ताव पर भी राजभर ने टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि चुनाव नजदीक आने के कारण अब अखिलेश यादव को आजम खान की याद आ रही है।
राजभर ने आरोप लगाया कि इस मुलाकात के पीछे मुस्लिम मतदाताओं को सपा के साथ बनाए रखने की राजनीतिक रणनीति हो सकती है। उन्होंने यह भी दावा किया कि मुस्लिम समुदाय में बढ़ती राजनीतिक जागरूकता और असदुद्दीन ओवैसी की बढ़ती लोकप्रियता के कारण सपा को अपनी रणनीति पर दोबारा विचार करना पड़ रहा है।
आजम खान की कानूनी परेशानियों को लेकर भी राजभर ने सपा नेतृत्व पर सवाल उठाए और इसके लिए पार्टी नेतृत्व को जिम्मेदार ठहराया। हालांकि, इस संबंध में उन्होंने अपने आरोपों के समर्थन में कोई विशिष्ट कानूनी तथ्य प्रस्तुत नहीं किए।
2027 के चुनाव को लेकर तेज हुई राजनीतिक बयानबाजी
राजभर ने कन्नौज में हुए एक कार्यक्रम का हवाला देते हुए दावा किया कि जनता ने अखिलेश यादव को नकारना शुरू कर दिया है और इसका असर 2027 के विधानसभा चुनाव में दिखाई देगा। उनके बयान से स्पष्ट है कि सुभासपा आगामी चुनाव से पहले सपा के राजनीतिक प्रभाव को चुनौती देने की तैयारी में है।
उत्तर प्रदेश में अगले विधानसभा चुनाव को देखते हुए विभिन्न राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो रहा है। आजमगढ़ में होने वाली सामाजिक समरसता महारैली सुभासपा के लिए अपनी राजनीतिक ताकत प्रदर्शित करने का अवसर होगी। वहीं, राजभर के दावों का चुनावी असर कितना होगा, यह आने वाले समय में मतदाताओं के रुख और राजनीतिक समीकरणों से तय होगा।

