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28 अक्टूबर पंचांग: सुबह 11:14 से दोपहर 12:41 बजे तक अमृतकाल, जानें राहुकाल और शुभ मुहूर्त

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नई दिल्ली। बुधवार, 28 अक्टूबर को कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि रहेगी। पंचांग के अनुसार, इस दिन सुबह 11:14 बजे से दोपहर 12:41 बजे तक अमृतकाल रहेगा, जबकि अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:42 बजे से दोपहर 12:27 बजे तक है। सूर्य देव तुला राशि में और चंद्र देव वृषभ राशि में रहेंगे। वहीं, राहुकाल दोपहर 12:10 बजे से 1:34 बजे तक रहेगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, शुभ कार्यों की शुरुआत से पहले पंचांग और मुहूर्त का विचार किया जाता है।

तिथि, सूर्योदय और सूर्यास्त

पंचांग के अनुसार, कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि 28 अक्टूबर को तड़के 4:07 बजे से शुरू होकर गुरुवार, 29 अक्टूबर की रात 1:06 बजे तक रहेगी। इसके बाद कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि आरंभ होगी, जो 29 अक्टूबर की रात 10:10 बजे तक रहेगी।

  • सूर्योदय: सुबह 6:33 बजे
  • सूर्यास्त: शाम 5:47 बजे
  • चंद्रोदय: शाम 7:31 बजे
  • चंद्रास्त: अगले दिन सुबह 9:47 बजे

अमृतकाल और अभिजीत मुहूर्त

बुधवार को सुबह 11:14 बजे से दोपहर 12:41 बजे तक अमृतकाल रहेगा। ज्योतिषीय मान्यताओं में इस अवधि को शुभ और सकारात्मक माना जाता है। इस दौरान पूजा-पाठ, नए कार्यों की योजना और महत्वपूर्ण निर्णय लेने के लिए मुहूर्त का विचार किया जाता है।

वहीं, अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:42 बजे से दोपहर 12:27 बजे तक रहेगा। इसे दिन के प्रमुख शुभ मुहूर्तों में गिना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस समय में शुभ कार्य करना अच्छा माना जाता है।

राहुकाल, यमगंड और गुलिक काल

पंचांग के अनुसार, बुधवार को दिन के कुछ समय ऐसे भी रहेंगे, जिन्हें पारंपरिक ज्योतिष में नए शुभ कार्यों की शुरुआत के लिए अनुकूल नहीं माना जाता।

  • राहुकाल: दोपहर 12:10 बजे से 1:34 बजे तक
  • यमगंड काल: सुबह 7:58 बजे से 9:22 बजे तक
  • गुलिक काल: सुबह 10:46 बजे से दोपहर 12:10 बजे तक
  • दिशाशूल: उत्तर दिशा
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धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, राहुकाल और यमगंड में नए शुभ कार्य शुरू करने से बचने की सलाह दी जाती है। हालांकि, इन समयों की गणना स्थान के अनुसार बदल सकती है। यात्रा की योजना बनाते समय स्थानीय पंचांग देखना उचित रहेगा।

स्वाति नक्षत्र में रहेंगे सूर्य देव

पंचांग के अनुसार, इस दिन सूर्य देव स्वाति नक्षत्र में रहेंगे। स्वाति नक्षत्र के अधिष्ठाता देवता पवन देव माने जाते हैं, जबकि इसके स्वामी राहु हैं। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, इस नक्षत्र का संबंध स्वतंत्रता, बदलाव और अपने निर्णय स्वयं लेने की प्रवृत्ति से जोड़ा जाता है।

सुबह 7:18 बजे तक व्यतिपात योग

बुधवार को सुबह 7:18 बजे तक व्यतिपात योग रहेगा। इसके बाद वरीयान योग आरंभ होगा। ज्योतिष में वरीयान को 27 नित्य योगों में 18वां योग बताया गया है। पारंपरिक मान्यताओं में इसे सुख-सुविधाओं, ऐश्वर्य और समृद्धि से जोड़ा जाता है।

तुला राशि में सूर्य, वृषभ में चंद्रमा

इस दिन सूर्य देव तुला राशि में रहेंगे। ज्योतिष शास्त्र में तुला राशि को सूर्य की नीच राशि माना जाता है। पारंपरिक ज्योतिषीय व्याख्याओं के अनुसार, सूर्य को आत्मविश्वास, नेतृत्व और प्रतिष्ठा का कारक माना जाता है। तुला राशि में सूर्य की स्थिति को इन विषयों में संतुलन बनाए रखने की आवश्यकता से जोड़कर देखा जाता है।

वहीं, चंद्र देव पूरे दिन और रात वृषभ राशि में संचार करेंगे। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, वृषभ चंद्रमा की उच्च राशि है। चंद्रमा को मन और भावनाओं का कारक माना जाता है, इसलिए इस स्थिति को मानसिक स्थिरता, शांति और भावनात्मक संतुलन से जोड़ा जाता है।

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