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मां लक्ष्मी और भगवान विष्णु की पूजा के लिए उत्तम दिन, यात्रा से पहले जान लें दिशाशूल

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नई दिल्ली। हिंदू धर्म में पंचांग का विशेष महत्व माना जाता है। किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत, पूजा पाठ, यात्रा, निवेश या अन्य महत्वपूर्ण कार्य से पहले पंचांग के जरिए तिथि, नक्षत्र, योग और शुभ अशुभ समय की जानकारी ली जाती है। पंचांग सूर्य, चंद्रमा और ग्रहों की स्थिति के आधार पर हिंदू काल गणना की महत्वपूर्ण पद्धति है।

21 अगस्त 2026 को शुक्रवार के दिन श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि रात 11:36 बजे तक रहेगी। इसके बाद दशमी तिथि प्रारंभ हो जाएगी। शुक्रवार का दिन मां लक्ष्मी की पूजा के लिए विशेष माना जाता है। इस दिन माता लक्ष्मी के साथ भगवान विष्णु या नारायण की पूजा करना शुभ रहेगा। इसके अलावा संतोषी माता और वैभव लक्ष्मी की पूजा भी की जा सकती है।

शुक्रवार को मां लक्ष्मी और भगवान विष्णु की पूजा

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार शुक्रवार का संबंध मां लक्ष्मी से माना जाता है। इसलिए इस दिन धन, सुख और समृद्धि की कामना के लिए माता लक्ष्मी की विधि विधान से पूजा की जाती है। भगवान विष्णु के साथ मां लक्ष्मी की पूजा करने से परिवार में सुख समृद्धि और शांति की कामना की जाती है।

शुक्रवार को संतोषी माता और वैभव लक्ष्मी की आराधना भी विशेष फलदायी मानी जाती है। श्रद्धालु अपनी श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार पूजा पाठ, व्रत और दान कर सकते हैं।

सूर्योदय और सूर्यास्त का समय

21 अगस्त को सूर्योदय सुबह 6:09 बजे होगा, जबकि सूर्यास्त शाम 6:50 बजे होगा। चंद्रमा दोपहर 1:58 बजे उदय होगा और रात 12:36 बजे अस्त होगा।

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पंचांग के अनुसार इस दिन सूर्य सिंह राशि में स्थित रहेगा। वहीं चंद्रमा वृश्चिक राशि में रहेगा।

अनुराधा के बाद शुरू होगा ज्येष्ठा नक्षत्र

21 अगस्त को सूर्य मघा नक्षत्र में स्थित रहेगा। चंद्रमा सुबह के समय अनुराधा नक्षत्र में रहेगा। लगभग 11:52 बजे के बाद चंद्रमा ज्येष्ठा नक्षत्र में प्रवेश करेगा।

इस तरह दिन के दौरान नक्षत्र परिवर्तन भी देखने को मिलेगा। धार्मिक और ज्योतिषीय मान्यताओं में नक्षत्रों को शुभ कार्यों के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।

अभिजीत मुहूर्त में किए जा सकते हैं शुभ कार्य

21 अगस्त को अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12:04 बजे से 12:55 बजे तक रहेगा। इसे दिन के प्रमुख शुभ समय में शामिल किया जाता है। मान्यता है कि इस अवधि में महत्वपूर्ण और शुभ कार्य शुरू किए जा सकते हैं।

इसके अलावा अमृत काल सुबह 4:55 बजे से 6:43 बजे तक रहेगा। शुभ कार्यों के लिए मुहूर्त देखते समय व्यक्ति को अपने स्थान के अनुसार पंचांग के समय की पुष्टि भी करनी चाहिए, क्योंकि स्थानीय सूर्योदय और सूर्यास्त के आधार पर समय में अंतर हो सकता है।

राहुकाल में शुभ कार्यों से बचने की मान्यता

शुक्रवार को राहुकाल सुबह 10:54 बजे से दोपहर 12:30 बजे तक रहेगा। वहीं गुलिक काल सुबह 7:44 बजे से 9:19 बजे तक रहेगा। यमगंड काल दोपहर 3:40 बजे से शाम 5:15 बजे तक रहेगा।

पारंपरिक ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार राहुकाल, गुलिक काल और यमगंड के दौरान नए शुभ कार्य शुरू करने से बचने की सलाह दी जाती है। हालांकि जरूरी कार्यों के लिए परिस्थितियों और व्यक्तिगत मान्यताओं के अनुसार निर्णय लिया जा सकता है।

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पश्चिम दिशा में रहेगा दिशाशूल

पंचांग के अनुसार शुक्रवार को पश्चिम दिशा में दिशाशूल रहेगा। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार दिशाशूल वाले दिशा में यात्रा करने से बचने की सलाह दी जाती है।

यदि किसी कारण से पश्चिम दिशा की यात्रा करना जरूरी हो तो प्रचलित धार्मिक मान्यताओं के अनुसार संबंधित उपाय करके यात्रा शुरू की जा सकती है। दिशाशूल संबंधी मान्यताएं धार्मिक और ज्योतिषीय परंपराओं पर आधारित हैं।

21 अगस्त 2026 का प्रमुख पंचांग

तिथि: श्रावण शुक्ल नवमी, रात 11:36 बजे तक, इसके बाद दशमी

वार: शुक्रवार

सूर्योदय: सुबह 6:09 बजे

सूर्यास्त: शाम 6:50 बजे

चंद्रोदय: दोपहर 1:58 बजे

चंद्रास्त: रात 12:36 बजे

सूर्य राशि: सिंह

चंद्र राशि: वृश्चिक

सूर्य नक्षत्र: मघा

चंद्र नक्षत्र: अनुराधा, इसके बाद ज्येष्ठा

अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 12:04 से 12:55 बजे तक

अमृत काल: सुबह 4:55 से 6:43 बजे तक

राहुकाल: सुबह 10:54 से दोपहर 12:30 बजे तक

गुलिक काल: सुबह 7:44 से 9:19 बजे तक

यमगंड: दोपहर 3:40 से शाम 5:15 बजे तक

दिशाशूल: पश्चिम दिशा

मां लक्ष्मी की कृपा के लिए पूजा का विशेष दिन

शुक्रवार को मां लक्ष्मी की पूजा के साथ भगवान विष्णु का स्मरण करना विशेष धार्मिक महत्व रखता है। श्रद्धालु घर में साफ सफाई के बाद दीपक जलाकर माता लक्ष्मी और भगवान विष्णु की पूजा कर सकते हैं। अपनी श्रद्धा के अनुसार फल, फूल और प्रसाद अर्पित कर सुख समृद्धि की कामना की जा सकती है।

यह पंचांग नई दिल्ली के समय के आधार पर दिया गया है। अलग अलग शहरों में सूर्योदय, सूर्यास्त और मुहूर्त के समय में कुछ अंतर हो सकता है। धार्मिक अनुष्ठान या महत्वपूर्ण कार्य के लिए स्थानीय पंचांग से समय की पुष्टि करना उचित रहेगा।

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