नई दिल्ली। मंगलवार, 3 नवंबर को कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की नवमी तिथि रहेगी। हिंदू धर्म में पंचांग का विशेष महत्व माना जाता है। किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत, पूजा-पाठ, यात्रा, व्यापार और मांगलिक कार्यों से पहले तिथि, नक्षत्र, योग, करण और शुभ-अशुभ मुहूर्त का विचार किया जाता है। पंचांग के अनुसार, मंगलवार को सुबह 9 बजकर 53 मिनट तक शुक्ल योग रहेगा। इसके बाद ब्रह्म योग की शुरुआत होगी। वहीं, इस दिन उत्तर दिशा में दिशाशूल रहेगा। ऐसे में उत्तर दिशा की यात्रा करने से बचने की सलाह दी जाती है।
मंगलवार को सूर्योदय सुबह 6 बजकर 37 मिनट पर होगा, जबकि सूर्यास्त शाम 5 बजकर 43 मिनट पर होगा। चंद्रमा का उदय रात 12 बजकर 54 मिनट पर और चंद्रास्त अगले दिन दोपहर 2 बजकर 3 मिनट पर होगा। नवमी तिथि दोपहर 11 बजकर 54 मिनट तक रहेगी। इसके बाद कार्तिक कृष्ण पक्ष की दशमी तिथि प्रारंभ हो जाएगी।
स्वाति नक्षत्र में रहेंगे सूर्य देव
पंचांग के अनुसार, मंगलवार को सूर्य देव स्वाति नक्षत्र में विराजमान रहेंगे। ज्योतिष शास्त्र में स्वाति नक्षत्र को स्वतंत्रता, गति और परिवर्तन का प्रतीक माना जाता है। इस नक्षत्र के अधिष्ठाता देवता पवन देव हैं, जबकि इसके स्वामी राहु माने जाते हैं।
मान्यता है कि स्वाति नक्षत्र में सूर्य की स्थिति व्यक्ति के भीतर स्वतंत्र रूप से निर्णय लेने और पुरानी परिस्थितियों से बाहर निकलने की इच्छा को मजबूत करती है। इस दौरान व्यक्ति अपने कार्यों को नए तरीके से करने और जीवन में बदलाव लाने के लिए प्रेरित हो सकता है।
सुबह 9:53 बजे तक शुक्ल योग, इसके बाद ब्रह्म योग
मंगलवार को सुबह 9 बजकर 53 मिनट तक शुक्ल योग रहेगा। इसके बाद ब्रह्म योग शुरू होगा। ज्योतिष शास्त्र में शुक्ल योग को 27 नित्य योगों में 24वां योग माना गया है। संस्कृत में शुक्ल शब्द का अर्थ सफेद, उज्ज्वल, चमकदार और शुद्ध होता है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस योग की अधिष्ठात्री देवी पार्वती मानी जाती हैं। कुछ मान्यताओं में सिद्धि देवी का भी उल्लेख मिलता है। शुक्ल योग में पूजा-पाठ, धार्मिक अनुष्ठान और सकारात्मक कार्य करना शुभ माना जाता है।
अभिजीत मुहूर्त में मिलेगा शुभ कार्यों का अवसर
मंगलवार को अभिजीत मुहूर्त सुबह 11 बजकर 48 मिनट से दोपहर 12 बजकर 32 मिनट तक रहेगा। ज्योतिष शास्त्र में अभिजीत मुहूर्त को दिन के सबसे शुभ समयों में से एक माना जाता है। इसकी अवधि लगभग 48 मिनट होती है।
मान्यता है कि इस मुहूर्त में शुरू किए गए कार्यों में सफलता की संभावना बढ़ती है और अशुभ प्रभावों से बचाव होता है। नए कार्य की शुरुआत, पूजा-पाठ, धार्मिक आयोजन और महत्वपूर्ण निर्णय लेने के लिए इस समय को अनुकूल माना जाता है।
रात 1:03 बजे से 2:38 बजे तक अमृतकाल
पंचांग के अनुसार, मंगलवार की रात 1 बजकर 3 मिनट से 2 बजकर 38 मिनट तक अमृतकाल रहेगा। ज्योतिष में अमृतकाल को अत्यंत शुभ और मंगलकारी समय माना गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस अवधि में किए गए कार्यों से सकारात्मक परिणाम प्राप्त होते हैं।
नए व्यापार की शुरुआत, निवेश, पूजा-पाठ और महत्वपूर्ण कार्यों के लिए अमृतकाल को अनुकूल माना जाता है। हालांकि, किसी भी कार्य के लिए स्थानीय पंचांग और अन्य मुहूर्त का भी विचार किया जाता है।
राहुकाल में नए शुभ कार्यों की शुरुआत से बचें
मंगलवार को राहुकाल दोपहर 2 बजकर 57 मिनट से शाम 4 बजकर 20 मिनट तक रहेगा। हिंदू ज्योतिष में राहुकाल को अशुभ समय माना जाता है। इस अवधि में नए व्यापार, मांगलिक कार्य या किसी नए महत्वपूर्ण काम की शुरुआत करने से बचने की सलाह दी जाती है।
राहुकाल की गणना सूर्योदय और सूर्यास्त के बीच के समय को आठ बराबर भागों में बांटकर की जाती है। इसका समय प्रत्येक दिन बदलता रहता है। हालांकि, इस दौरान पहले से चल रहे कार्यों को जारी रखा जा सकता है।
यमगंड काल और गुलिक काल का समय
मंगलवार को यमगंड काल सुबह 9 बजकर 23 मिनट से 10 बजकर 47 मिनट तक रहेगा। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, इस अवधि को नए और शुभ कार्यों की शुरुआत के लिए अनुकूल नहीं माना जाता। इस दौरान नई यात्रा, व्यापार की शुरुआत और महत्वपूर्ण आर्थिक लेन-देन से बचने की सलाह दी जाती है।
वहीं, गुलिक काल दोपहर 12 बजकर 10 मिनट से 1 बजकर 33 मिनट तक रहेगा। ज्योतिष शास्त्र में गुलिक काल को सामान्यतः अशुभ समय की श्रेणी में रखा जाता है। हालांकि, कुछ परंपराओं में इस दौरान बैंक में धन जमा करने, दान देने और बार-बार किए जाने वाले कार्यों को अनुकूल माना जाता है।
तुला राशि में रहेंगे सूर्य, सिंह राशि में चंद्रमा
मंगलवार को सूर्य देव तुला राशि में विराजमान रहेंगे। ज्योतिष शास्त्र में तुला राशि को सूर्य की नीच राशि माना जाता है। मान्यता के अनुसार, सूर्य के तुला राशि में होने पर आत्मविश्वास, नेतृत्व क्षमता और निर्णय लेने की शक्ति में कुछ कमी महसूस हो सकती है।
वहीं, चंद्र देव सिंह राशि में रहेंगे। सिंह राशि के स्वामी सूर्य देव हैं। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, सिंह राशि में चंद्रमा की स्थिति व्यक्ति के आत्मविश्वास, नेतृत्व क्षमता और मनोबल को प्रभावित करती है। इस राशि में चंद्रमा होने से व्यक्ति के भीतर अपने विचारों को प्रमुखता देने और नेतृत्व करने की भावना बढ़ सकती है। हालांकि, कभी-कभी अहंकार और दूसरों की सलाह को नजरअंदाज करने की प्रवृत्ति भी बढ़ सकती है।
उत्तर दिशा में रहेगा दिशाशूल, यात्रा करने से बचें
मंगलवार को उत्तर दिशा में दिशाशूल रहेगा। हिंदू ज्योतिष और वास्तु परंपराओं में दिशाशूल का विशेष महत्व बताया गया है। मान्यता है कि सप्ताह के अलग-अलग दिनों में अलग-अलग दिशाओं में यात्रा करना अशुभ हो सकता है।
मंगलवार को उत्तर दिशा में दिशाशूल होने के कारण इस दिशा में यात्रा शुरू करने से बचने की सलाह दी जाती है। यदि किसी कारणवश यात्रा करना आवश्यक हो, तो अपनी पारिवारिक और धार्मिक परंपराओं के अनुसार उपाय किए जा सकते हैं।
मंगलवार, 3 नवंबर का पंचांग
तिथि: कार्तिक कृष्ण पक्ष नवमी, सुबह 11:54 बजे तक, इसके बाद दशमी।
सूर्योदय: सुबह 6:37 बजे।
सूर्यास्त: शाम 5:43 बजे।
चंद्रोदय: रात 12:54 बजे।
चंद्रास्त: अगले दिन दोपहर 2:03 बजे।
नक्षत्र: स्वाति।
शुक्ल योग: सुबह 9:53 बजे तक।
ब्रह्म योग: सुबह 9:53 बजे के बाद।
अभिजीत मुहूर्त: सुबह 11:48 बजे से दोपहर 12:32 बजे तक।
अमृतकाल: रात 1:03 बजे से 2:38 बजे तक।
राहुकाल: दोपहर 2:57 बजे से शाम 4:20 बजे तक।
यमगंड काल: सुबह 9:23 बजे से 10:47 बजे तक।
गुलिक काल: दोपहर 12:10 बजे से 1:33 बजे तक।
दिशाशूल: उत्तर दिशा।
चंद्र राशि: सिंह।
सूर्य राशि: तुला।
पंचांग में दिए गए शुभ और अशुभ समय धार्मिक एवं ज्योतिषीय मान्यताओं पर आधारित हैं। मुहूर्त की गणना स्थान के अनुसार बदल सकती है, इसलिए किसी विशेष धार्मिक या मांगलिक कार्य के लिए स्थानीय पंचांग का भी मिलान करना उचित रहेगा।

