मुज़फ़्फ़रनगर। मुज़फ़्फ़रनगर में जमीन खरीद के नाम पर रुड़की की एप्रो ओवरसीज कंपनी से 7 करोड़ 84 लाख 50 हजार रुपये की धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। कंपनी ने मांडला गांव में औद्योगिक पार्क स्थापित करने के लिए करोड़ों रुपये का भुगतान किया, लेकिन जमीन की रजिस्ट्री उसके पक्ष में नहीं हुई। मामले में 17 लोगों के खिलाफ एफआईआर भी दर्ज कराई गई है।
कंपनी की निदेशक अभिलाषा सिंह ने सोमवार दोपहर करीब 2 बजे प्रेस कॉन्फ्रेंस कर मामले की जानकारी दी और DM से हस्तक्षेप की मांग की। अभिलाषा सिंह के मुताबिक, कपंनी पुरकाजी इलाके के मांडला गांव में करीब 180 बीघा भूमि पर औद्योगिक पार्क स्थापित करना चाहती थी। इससे क्षेत्र के लगभग पांच हजार लोगों को रोजगार मिलने की संभावना थी। रुड़की के कर्नल एन्क्लेव निवासी जितेंद्र वर्मा ने कंपनी को बरला-बसेड़ा मुख्य मार्ग पर करीब 130 बीघा जमीन उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया था। कंपनी को बताया गया कि जमीन विवाद और अन्य भार से मुक्त है। इस आधार पर 3 जुलाई 2024 को अनुबंध किया गया। जमीन का मूल्य 10.25 लाख रुपये प्रति बीघा तय हुआ और उसी दिन तीन लाख रुपये टोकन राशि के रूप में दिए गए।
कंपनी की निदेशक ने बताया कि 27 अगस्त 2024 को जितेंद्र वर्मा ने पहले प्रस्तावित खसरा नंबरों से अलग जमीन का प्रस्ताव दिया। नए अनुबंध के बाद उनके खाते में आरटीजीएस और एनईएफटी के माध्यम से 20 लाख रुपये और भेजे गए। कंपनी के अनुसार, इस तरह जितेंद्र वर्मा को कुल 23 लाख रुपये दिए गए। बाद में मुशीर आलम निवासी ग्राम खुड्डा, थाना छपार को जमीन खरीद प्रक्रिया में सहयोगी बताया गया।
अभिलाषा सिंह के अनुसार, जितेंद्र वर्मा और मुशीर आलम के माध्यम से विभिन्न भूमिधारकों तथा उनके परिवार के सदस्यों के खातों में कुल 5 करोड़ 42 लाख रुपये स्थानांतरित किए गए। इसके अलावा दोनों के नाम और उनके परिजनों व संबंधियों के खातों में 2 करोड़ 42 लाख 50 हजार रुपये भेजे गए। कंपनी का कहना है कि सभी भुगतानों का कुल योग 7 करोड़ 84 लाख 50 हजार रुपये है। इतनी रकम देने के बावजूद जमीन की रजिस्ट्री कंपनी के पक्ष में नहीं कराई गई।
अभिलाषा सिंह ने बताया कि कंपनी ने उत्तर प्रदेश पुलिस से शिकायत की थी, लेकिन एफआईआर दर्ज नहीं हुई। इसके बाद 20 अक्टूबर 2026 को मंगलौर थाने में 17 लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया। कंपनी का आरोप है कि संबंधित लोग पहले रजिस्ट्री कराने का आश्वासन देते रहे, लेकिन बाद में विक्रय पत्र निष्पादित करने से इनकार कर दिया।
कंपनी की निदेशक ने DM मुज़फ़्फ़रनगर को दिए प्रार्थना पत्र में मांग की है कि संबंधित भूमिधारकों को कंपनी के पक्ष में जमीन की रजिस्ट्री कराने के लिए निर्देशित किया जाए। यदि वे जमीन बेचने के इच्छुक नहीं हैं, तो कंपनी को दी गई पूरी रकम वापस दिलाने के लिए कार्रवाई की जाए। उनका कहना है कि जमीन की रजिस्ट्री नहीं होने से कंपनी को आर्थिक नुकसान हुआ है और पांच हजार लोगों को रोजगार देने की योजना भी अटक गई है।
