नई दिल्ली। बुधवार, 4 नवंबर को कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की दशमी तिथि रहेगी। हिंदू धर्म में किसी भी शुभ कार्य, पूजा-पाठ, यात्रा, निवेश या नए काम की शुरुआत से पहले पंचांग देखने की परंपरा है। पंचांग के माध्यम से तिथि, नक्षत्र, योग, करण और ग्रहों की स्थिति की जानकारी मिलती है। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, बुधवार को अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:42 बजे से दोपहर 12:26 बजे तक रहेगा। वहीं, सुबह 8 बजे तक ब्रह्म योग का प्रभाव रहेगा। इसके बाद इंद्र योग शुरू होगा।
दशमी तिथि और सूर्योदय-सूर्यास्त का समय
पंचांग के अनुसार, कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की दशमी तिथि मंगलवार सुबह 11:54 बजे से शुरू होकर बुधवार सुबह 11:03 बजे तक रहेगी। इसके बाद कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि आरंभ हो जाएगी, जो 5 नवंबर को सुबह 10:35 बजे तक रहेगी।
बुधवार को सूर्योदय सुबह 6:37 बजे और सूर्यास्त शाम 5:43 बजे होगा। चंद्रोदय रात 1:53 बजे होगा, जबकि अगले दिन चंद्रास्त दोपहर 2:38 बजे रहेगा।
स्वाति नक्षत्र में रहेंगे सूर्य देव
बुधवार को सूर्य देव स्वाति नक्षत्र में विराजमान रहेंगे। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, स्वाति नक्षत्र के अधिष्ठाता देवता पवन देव हैं और इसके स्वामी राहु माने जाते हैं। इस नक्षत्र को स्वतंत्रता, गतिशीलता और बदलाव से जोड़कर देखा जाता है। मान्यता है कि इस नक्षत्र में सूर्य की स्थिति व्यक्ति के भीतर पुरानी परिस्थितियों और बंधनों से बाहर निकलकर स्वतंत्र रूप से काम करने की भावना को मजबूत कर सकती है।
सुबह 8 बजे तक ब्रह्म योग, इसके बाद इंद्र योग
पंचांग के अनुसार, बुधवार सुबह 8 बजे तक ब्रह्म योग रहेगा। इसके बाद इंद्र योग शुरू हो जाएगा। ज्योतिष शास्त्र में ब्रह्म योग को 27 नित्य योगों में 25वां योग बताया गया है। इसे धार्मिक अनुष्ठानों, पूजा-पाठ, शांति कर्म और नए कार्यों की शुरुआत के लिए शुभ माना जाता है। स्वास्थ्य संबंधी उपचार और चिकित्सा कार्यों के लिए भी इस योग को अनुकूल माना गया है।
अभिजीत मुहूर्त में करें नए कार्यों की शुरुआत
बुधवार को अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:42 बजे से दोपहर 12:26 बजे तक रहेगा। यह अवधि लगभग 44 मिनट की होगी। ज्योतिषीय मान्यताओं में अभिजीत मुहूर्त को दिन के सबसे शुभ समयों में शामिल किया जाता है। मान्यता है कि इस दौरान शुरू किए गए कार्यों में सफलता और सकारात्मक परिणाम मिलने की संभावना रहती है। नए काम की शुरुआत, महत्वपूर्ण निर्णय और शुभ कार्यों के लिए इस समय को अनुकूल माना जाता है।
रात 9:24 से 11 बजे तक रहेगा अमृतकाल
बुधवार को रात 9:24 बजे से 11 बजे तक अमृतकाल रहेगा। पंचांग और ज्योतिषीय मान्यताओं में अमृतकाल को अत्यंत शुभ और सकारात्मक समय माना जाता है। इस अवधि में पूजा-पाठ, नए व्यापार की शुरुआत, निवेश और महत्वपूर्ण यात्रा जैसे कार्य करना शुभ माना जाता है। मान्यता है कि अमृतकाल में किए गए कार्यों से अनुकूल परिणाम प्राप्त हो सकते हैं।
राहुकाल में नए शुभ कार्यों की शुरुआत से बचें
बुधवार को राहुकाल दोपहर 12:10 बजे से 1:33 बजे तक रहेगा। ज्योतिष शास्त्र में राहुकाल को नए और शुभ कार्यों की शुरुआत के लिए प्रतिकूल समय माना जाता है। इसकी गणना सूर्योदय से सूर्यास्त के बीच के समय को आठ बराबर भागों में बांटकर की जाती है। स्थान के अनुसार राहुकाल के समय में बदलाव हो सकता है। मान्यता के अनुसार, इस अवधि में नया काम शुरू करने से बचना चाहिए, हालांकि पहले से चल रहे कार्य जारी रखे जा सकते हैं।
यमगंड और गुलिक काल का समय
बुधवार को यमगंड काल सुबह 8 बजे से 9:24 बजे तक रहेगा। ज्योतिषीय मान्यताओं में इस समय को भी नए कार्यों की शुरुआत के लिए अशुभ माना जाता है। इस दौरान नया व्यापार शुरू करने, महत्वपूर्ण काम की शुरुआत करने और यात्रा पर निकलने से बचने की सलाह दी जाती है।
वहीं, गुलिक काल सुबह 10:47 बजे से दोपहर 12:10 बजे तक रहेगा। ज्योतिष में गुलिक काल को सामान्यतः नए शुभ कार्यों की शुरुआत के लिए अनुकूल नहीं माना जाता। हालांकि, मान्यताओं के अनुसार, इस अवधि में पहले से जारी कार्य किए जा सकते हैं। कुछ ज्योतिषीय परंपराओं में नियमित रूप से किए जाने वाले कार्यों, बैंक में धन जमा करने और दान-पुण्य को इस समय किया जा सकता है।
तुला राशि में रहेंगे सूर्य, सिंह राशि में चंद्रमा
बुधवार को सूर्य देव तुला राशि में रहेंगे। ज्योतिष शास्त्र में तुला राशि को सूर्य की नीच राशि माना जाता है। मान्यता के अनुसार, इस स्थिति में व्यक्ति के आत्मविश्वास, निर्णय क्षमता और नेतृत्व से जुड़े पक्षों पर प्रभाव पड़ सकता है। ऐसे समय में महत्वपूर्ण फैसले लेते हुए संतुलन और धैर्य बनाए रखने की सलाह दी जाती है।
वहीं, चंद्र देव सिंह राशि में विराजमान रहेंगे। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, सिंह राशि में चंद्रमा की स्थिति आत्मविश्वास, नेतृत्व क्षमता और प्रभावशाली व्यक्तित्व से जुड़ी मानी जाती है। इस दौरान व्यक्ति में अपनी बात रखने और परिस्थितियों का सामना करने का साहस बढ़ सकता है। हालांकि, कभी-कभी आत्मसम्मान और अहंकार के बीच संतुलन बनाए रखना भी जरूरी माना जाता है।
बुधवार को उत्तर दिशा में रहेगा दिशाशूल
पंचांग के अनुसार, बुधवार को उत्तर दिशा में दिशाशूल रहेगा। कुछ पंचांगों में इसे उत्तर-पूर्व यानी ईशान कोण की ओर भी बताया जाता है। ज्योतिष और वास्तु संबंधी मान्यताओं में दिशाशूल को उस दिशा से जुड़ा अशुभ योग माना जाता है, जिसमें यात्रा शुरू करने से बचने की सलाह दी जाती है। यदि आवश्यक हो तो यात्रा से पहले परंपरागत उपाय करने की मान्यता भी प्रचलित है।
4 नवंबर 2026 का प्रमुख पंचांग
तिथि: कार्तिक कृष्ण दशमी, सुबह 11:03 बजे तक; इसके बाद एकादशी
सूर्योदय: सुबह 6:37 बजे
सूर्यास्त: शाम 5:43 बजे
चंद्रोदय: रात 1:53 बजे
चंद्रास्त: अगले दिन दोपहर 2:38 बजे
ब्रह्म योग: सुबह 8 बजे तक
इंद्र योग: सुबह 8 बजे के बाद
अभिजीत मुहूर्त: सुबह 11:42 बजे से दोपहर 12:26 बजे तक
अमृतकाल: रात 9:24 बजे से 11 बजे तक
राहुकाल: दोपहर 12:10 बजे से 1:33 बजे तक
यमगंड काल: सुबह 8 बजे से 9:24 बजे तक
गुलिक काल: सुबह 10:47 बजे से दोपहर 12:10 बजे तक
दिशाशूल: उत्तर दिशा

