मुज़फ़्फ़रनगर में किसानों के हक पर डाका डालने वालों और युवाओं को नशे के जाल में धकेलने वालों के खिलाफ अब प्रशासन ने आर-पार की लड़ाई का ऐलान कर दिया है। यूरिया की काला बाज़ारी और नशीली दवाओं के अवैध कारोबार के मामलों में लगातार हो रही कार्रवाई के बीच जिलाधिकारी उमेश मिश्रा और एसएसपी संजय कुमार वर्मा ने कड़ा रुख अपनाया है। दोनों अधिकारियों ने स्पष्ट किया हैं कि ऐसे मामलों में सिर्फ गिरफ्तारी और जेल भेजना ही पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि आरोपियों के खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (रासुका, NSA) जैसी कठोर कार्रवाई भी की जाएगी। प्रशासन के इस रुख के बाद जिले में अवैध कारोबार से जुड़े लोगों में बेचैनी बढ़ गई है।

किसानों के यूरिया से लेकर युवाओं के भविष्य तक… अब सीधा प्रहार
पिछले कुछ महीनों में मुज़फ़्फ़रनगर में दो ऐसे मामले सामने आए, जिन्होंने प्रशासन को सख्त कदम उठाने के लिए मजबूर कर दिया।
पहला मामला किसानों के लिए उपलब्ध यूरिया की कथित काला बाज़ारी और उसके अवैध उपयोग से जुड़ा है, जबकि दूसरा मामला नशीली दवाओं के उस नेटवर्क से जुड़ा है, जिस पर युवाओं को नशे की गिरफ्त में धकेलने के आरोप हैं।
प्रशासन का मानना है कि ये केवल आर्थिक अपराध नहीं हैं, बल्कि समाज और सार्वजनिक व्यवस्था पर सीधा हमला हैं।
खालापार में टूटा नशीली दवाओं के नेटवर्क का जाल
हाल ही में खालापार थाना पुलिस ने नशीली दवाओं की अवैध बिक्री से जुड़े एक बड़े नेटवर्क का खुलासा किया था।
कार्रवाई के दौरान लाखों रुपये की दवाएं बरामद की गईं और कई दवा विक्रेताओं को गिरफ्तार किया गया। पुलिस के मुताबिक, इस नेटवर्क को दवाओं की सप्लाई करने वाला गोरखपुर का एक कारोबारी अभी भी फरार है, जिसकी तलाश में लगातार दबिश दी जा रही है।
जांच एजेंसियां अब इस नेटवर्क की जड़ तक पहुंचने का प्रयास कर रही हैं।
यूरिया नेटवर्क पर भी लगातार चोट
दूसरी ओर एसपी देहात महादिक अक्षय संजय के नेतृत्व में किसानों के यूरिया की कथित कालाबाज़ारी से जुड़े नेटवर्क पर भी कार्रवाई की गई।
इस मामले में कई खाद विक्रेताओं के खिलाफ मुकदमे दर्ज हुए, गिरफ्तारियां हुईं और कृषि विभाग ने भी अलग से कानूनी कार्रवाई शुरू की।
जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर कथित मास्टरमाइंड सर्वेन्द्र राणा की तलाश की जा रही है, जो फिलहाल फरार बताया जा रहा है।
इनके अलावा ज़िले में भारी तादाद में किसानों के उर्वरक खाद यूरिया को नकली DEF बनाने में इस्तेमाल किया जा रहा है। पूर्व में शहर कोतवाली और सिखेड़ा थाना क्षेत्र में पकड़े गए मामलों के साथ ही अब पुलिस और जिला प्रशासन के रडार पर फेक DEF का पूरा सिंडिकेट हैं।
SSP संजय कुमार वर्मा ने स्पष्ट किया है कि किसानों के हक़ पर डाका डालने वालों पर NSA की कार्रवाई की जाएगी।

डीएम और एसएसपी की दो टूक
एसएसपी संजय कुमार वर्मा ने स्पष्ट कहा है कि यूरिया की काला बाज़ारी हो, उसका अवैध इस्तेमाल हो, उसका व्यावसायिक उपयोग हो या फिर नशीली दवाओं का कारोबार हो, इससे जुड़े लोगों के खिलाफ तह तक जाकर कार्रवाई की जा रही है।
वहीं जिलाधिकारी उमेश मिश्रा ने भी साफ कर दिया है कि किसानों और युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम के तहत कार्रवाई की जाएगी।
क्यों अहम है रासुका की कार्रवाई?
राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA/रासुका) देश के सबसे कठोर कानूनों में गिना जाता है। इसके तहत प्रशासन किसी व्यक्ति को सार्वजनिक व्यवस्था और सुरक्षा के लिए खतरा मानते हुए निरुद्ध (Preventive Detention) कर सकता है।
यही वजह है कि रासुका की कार्रवाई को प्रशासन का सबसे सख्त संदेश माना जा रहा है।

जिले में बढ़ी हलचल, अगली सूची का इंतजार
यूरिया की काला बाज़ारी, फेक DEF का निर्माण और नशीली दवाओं के मामलों में लगातार हो रही कार्रवाई के बीच अब जिले में चर्चाओं का केंद्र एक ही सवाल है कि रासुका की कार्रवाई की सूची में अगला नाम किसका होगा?
फिलहाल पुलिस, कृषि विभाग और प्रशासन की अलग अलग कार्रवाई जारी है। जांच एजेंसियां नेटवर्क से जुड़े हर व्यक्ति और कड़ी की पड़ताल में जुटी हैं।
एक बात साफ है कि मुज़फ़्फ़रनगर में अब किसानों के यूरिया और युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करने वालों के लिए हालात पहले जैसे नहीं रहने वाले।



