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सीएम पुष्कर सिंह धामी ने की अपील, रुद्रप्रयाग आने वाले श्रद्धालु शिव-पार्वती की विवाह स्थली त्रियुगीनारायण के दर्शन जरूर करें

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रुद्रप्रयाग। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने देवभूमि की समृद्ध धार्मिक और सांस्कृतिक धरोहर को वैश्विक पटल पर रेखांकित करते हुए जनपद रुद्रप्रयाग में स्थित ऐतिहासिक त्रियुगीनारायण मंदिर की महिमा का बखान किया है। मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक विशेष संदेश साझा करते हुए इस पावन धाम को अत्यंत दिव्य, अलौकिक और पौराणिक दृष्टि से अद्वितीय तीर्थस्थल बताया। उन्होंने देश-विदेश से उत्तराखंड आने वाले सभी श्रद्धालुओं और पर्यटकों से अपील की कि वे जब भी रुद्रप्रयाग जनपद की यात्रा पर आएं, तो इस पवित्र विवाह स्थली के दर्शन कर पुण्य लाभ अवश्य कमाएं।

शिव-पार्वती के दिव्य विवाह की साक्षी है यह पुण्यभूमि

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अपनी पोस्ट के माध्यम से मंदिर के गहरे पौराणिक महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि सनातन परंपरा में त्रियुगीनारायण मंदिर का स्थान बेहद विशिष्ट है, क्योंकि पौराणिक मान्यताओं के अनुसार यही वह परम पावन और लोक-कल्याणकारी भूमि है जहां देवाधिदेव भगवान शिव और जगत जननी माता पार्वती का दिव्य विवाह संपन्न हुआ था। मुख्यमंत्री ने इसे देवभूमि उत्तराखंड की अटूट आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत का अनुपम प्रतीक बताते हुए कहा कि यह मंदिर सदियों से करोड़ों श्रद्धालुओं की अगाध आस्था और श्रद्धा का प्रमुख केंद्र रहा है। हिमालय की शांत और मनोरम वादियों में स्थित होने के कारण यह संपूर्ण परिसर भक्तों को एक अद्वितीय और अलौकिक शांति की अनुभूति कराता है।

त्रेतायुग से प्रज्वलित है अखंड धूनी, वैवाहिक बंधनों का अटूट केंद्र

भौगोलिक और धार्मिक रूप से त्रियुगीनारायण मंदिर केवल एक पूजा स्थल नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति के जीवंत इतिहास का दस्तावेज है। मंदिर परिसर के भीतर स्थित ‘अखंड धूनी’ (कल्याणकारी अग्नि) को लेकर मान्यता है कि यह भगवान शिव और माता पार्वती के पाणिग्रहण संस्कार के समय से ही अनवरत प्रज्वलित है। तीन युगों से जलती आ रही इसी पवित्र अग्नि की गवाही के कारण इस स्थान का नाम ‘त्रियुगीनारायण’ पड़ा। इस अद्वितीय ऐतिहासिक और धार्मिक विशेषता के चलते देश के कोने-कोने से हर वर्ष लाखों की संख्या में श्रद्धालु यहां शीश नवाने आते हैं। वर्तमान समय में इस मंदिर की महत्ता इस कदर बढ़ी है कि देश-विदेश के कई जोड़े (कपल) अपने दांपत्य जीवन की शुरुआत को अमर और सौभाग्यशाली बनाने के लिए यहां आकर इसी पवित्र अग्नि के फेरे लेते हैं।

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वैश्विक पर्यटन और आध्यात्मिकता का मजबूत स्तंभ

देवभूमि उत्तराखंड अपनी प्राकृतिक छटा, गगनचुंबी बर्फीली चोटियों और प्राचीन देव परंपराओं के लिए पूरी दुनिया में एक विशिष्ट पहचान रखती है। त्रियुगीनारायण मंदिर इस सांस्कृतिक पहचान को और अधिक सुदृढ़ और समृद्ध बनाता है। मुख्यमंत्री के इस आह्वान को राज्य में धार्मिक पर्यटन (स्पिरिचुअल टूरिज्म) को बढ़ावा देने और स्थानीय रोजगार को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में देखा जा रहा है। शासन-प्रशासन द्वारा भी इस पावन क्षेत्र में श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए बुनियादी ढांचे और यातायात के साधनों को लगातार बेहतर बनाने के प्रयास किए जा रहे हैं ताकि यहां आने वाले यात्रियों को सुलभ और सुरक्षित दिव्य दर्शन प्राप्त हो सकें।

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