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मुज़फ़्फ़रनगर की ‘बंधुआ फैक्ट्री’ कांड पर मानवाधिकार आयोग का बड़ा एक्शन: UP सरकार को नोटिस, मुख्य सचिव-DGP से दो हफ्ते में रिपोर्ट तलब

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मुज़फ़्फ़रनगर के मांडी गांव की कथित दोना–पत्तल फैक्ट्री में 12 मजदूरों को डेढ़ साल तक बंधुआ बनाकर रखने, उनके साथ मारपीट करने और आधी रात तक जबरन काम कराने के मामले ने अब राष्ट्रीय स्तर पर गंभीर रूप ले लिया है। भारत के राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने मीडिया रिपोर्टों का स्वतः संज्ञान लेते हुए उत्तर प्रदेश सरकार को नोटिस जारी किया है। आयोग ने स्पष्ट संकेत दिया है कि यदि सामने आए आरोप सही साबित होते हैं, तो यह मानवाधिकारों के गंभीर और अस्वीकार्य उल्लंघन का मामला होगा। आयोग ने राज्य सरकार से दो सप्ताह के भीतर विस्तृत रिपोर्ट तलब करते हुए जिला प्रशासन को कानून के तहत जांच और पीड़ितों के पुनर्वास की प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश दिए हैं।

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NHRC की सख्ती: सीधे मुख्य सचिव और DGP से मांगा जवाब

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने 25 जून को प्रकाशित मीडिया रिपोर्टों का स्वतः संज्ञान लेते हुए उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक (DGP) को नोटिस जारी किया है।


आयोग ने कहा है कि मीडिया रिपोर्टों में वर्णित तथ्य यदि सही पाए जाते हैं, तो यह केवल श्रम कानूनों का उल्लंघन नहीं बल्कि मानवाधिकारों के गंभीर हनन का मामला है।

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दोनों वरिष्ठ अधिकारियों से दो सप्ताह के भीतर विस्तृत रिपोर्ट मांगी गई है।

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DM को जांच, श्रमिकों के पुनर्वास और ई-श्रम पंजीकरण के निर्देश

आयोग ने मुज़फ़्फ़रनगर के जिलाधिकारी को बंधुआ मजदूरी प्रथा (उन्मूलन) अधिनियम, 1976 और श्रम एवं रोजगार मंत्रालय की मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) के तहत पूरे मामले की जांच करने के निर्देश दिए हैं।

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इसके साथ ही NHRC ने अपने 8 दिसंबर 2021 के परामर्श (Advisory 2.0) का हवाला देते हुए सभी मुक्त कराए गए श्रमिकों का तत्काल ई-श्रम पोर्टल पर पंजीकरण सुनिश्चित करने को कहा है।

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आरोप: डेढ़ साल तक कैद, मारपीट और आधी रात तक जबरन काम

आपको बता दें कि फैक्ट्री में 12 मजदूरों को कथित तौर पर करीब डेढ़ वर्ष तक बंधक बनाकर रखा गया।


आरोप है कि उनसे देर रात तक जबरन काम कराया जाता था, पर्याप्त भोजन और मजदूरी नहीं दी जाती थी तथा विरोध करने पर बेरहमी से मारपीट की जाती थी।

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बताया गया है कि एक मजदूर किसी तरह वहां से भाग निकला और तितावी थाने पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई। इसके बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए अन्य मजदूरों को भी वहां से मुक्त कराया।

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मेडिकल जांच में गंभीर चोटों के संकेत, मौत की भी जांच

मुक्त कराए गए मजदूरों की मेडिकल जांच में खरोंच, गहरे घाव, हड्डियां टूटने और लंबे समय तक शारीरिक प्रताड़ना के संकेत मिले हैं।

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रिपोर्टों में यह भी दावा किया गया है कि मामले में एक व्यक्ति की मौत की जानकारी सामने आई है, जबकि अन्य संभावित मौतों की भी जांच की जा रही है।

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रेलवे स्टेशन और बस अड्डों से लाए गए थे मजदूर?

पुलिस के अनुसार, पीड़ित उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, छत्तीसगढ़, राजस्थान, हरियाणा और उत्तराखंड सहित कई राज्यों के रहने वाले हैं। कुछ मजदूर नेपाल के भी बताए गए हैं।

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आरोप है कि इन्हें रेलवे स्टेशन, बस अड्डों और अन्य सार्वजनिक स्थानों से नौकरी, अच्छा वेतन, भोजन और रहने की सुविधा का झांसा देकर फैक्ट्री तक लाया गया।

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फैक्ट्री पहुंचने के बाद कथित तौर पर उनके मोबाइल फोन और पहचान पत्र जब्त कर लिए गए, ताकि वे परिवार से संपर्क न कर सकें और वहां से निकल न पाएं।

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‘पिट बुल’ डॉग से डराने का भी आरोप

आपको बता दें कि मजदूरों को भागने से रोकने और दहशत में रखने के लिए फैक्ट्री परिसर में पिट बुल नस्ल के कुत्तों का इस्तेमाल किया जाता था।

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हरियाणा पुलिस के साथ मुख्य आरोपी अंकित बालियान का खेल

इस बीच मामले का मुख्य आरोपी अंकित अभी भी मुज़फ़्फ़रनगर पुलिस की गिरफ्त से बाहर है। पुलिस सूत्रों के अनुसार, वह हरियाणा के पलवल जिले में शस्त्र अधिनियम के एक मामले में गिरफ्तार होकर न्यायिक हिरासत में है। मुज़फ़्फ़रनगर पुलिस अब उसे इस मामले में हिरासत में लेने की कानूनी प्रक्रिया में जुटी है।

आपको ये भी बता दें कि पुलिस इस मामले में अंकित के पिता और उसके एक साथी को पहले ही जेल भेज चुकी है, जबकि तीसरे एक अन्य आरोपी को भी पुलिस ने हाल ही में सलाखों के पीछे भेजा था।

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अब सरकार की रिपोर्ट पर निगाह

NHRC की सख्त दखल के बाद अब यह मामला सिर्फ एक आपराधिक जांच तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि मानवाधिकार संरक्षण से जुड़े राष्ट्रीय स्तर के मामले में बदल गया है।

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अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि उत्तर प्रदेश सरकार आयोग के सामने क्या रिपोर्ट पेश करती है और जांच में इन गंभीर आरोपों की पुष्टि होती है या नहीं। यदि आरोप सही साबित होते हैं, तो संबंधित लोगों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

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