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बंगाल की सियासत में ‘महाभारत’: दिलीप घोष ने चंद्रिमा को घेरा, बोले- जब ट्रेडमिल पर बजट बनेगा तो आर्थिक स्थिति तो बिगड़ेगी ही

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कोलकाता। पश्चिम बंगाल की राजनीति में उस समय भूचाल आ गया जब ममता बनर्जी की बेहद करीबी और सरकार में वित्त राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) रहीं चंद्रिमा भट्टाचार्य ने तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के सभी पदों से इस्तीफा देकर बागी गुट का दामन थाम लिया। इस बड़े राजनीतिक घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए पश्चिम बंगाल सरकार में मंत्री दिलीप घोष ने टीएमसी नेतृत्व और चंद्रिमा भट्टाचार्य दोनों पर तीखे हमले किए हैं। उन्होंने कहा कि बंगाल की बदहाल आर्थिक स्थिति टीएमसी के पागलपन और कुशासन का सीधा नतीजा है।

बजट को लेकर चंद्रिमा के दावों पर उठाए गंभीर सवाल

मंत्री दिलीप घोष ने चंद्रिमा भट्टाचार्य के उस बयान पर कड़ा ऐतराज जताया जिसमें उन्होंने कहा था कि वित्त मंत्री रहने के बावजूद बजट तैयार करने में कभी उनकी सलाह नहीं ली गई। दिलीप घोष ने सवालिया लहजे में कहा कि अगर इतने सालों तक कैबिनेट में रहते हुए उन्हें बजट प्रक्रिया की जानकारी नहीं थी, तो वह उस कुर्सी पर क्यों बैठी थीं? क्या वह सिर्फ एक रबर स्टैंप थीं? उन्होंने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर भी तंज कसते हुए कहा कि खुद मुख्यमंत्री ने एक बार दावा किया था कि उन्होंने ट्रेडमिल पर दौड़ते हुए बजट तैयार किया है। घोष ने पूछा कि क्या राज्य का बजट इस तरह की बचकानी हरकतों से बनता है? यह पूरी तरह से प्रशासनिक पागलपन है और इसी वजह से आज बंगाल आर्थिक रूप से बदहाली के कगार पर पहुंच गया है।

डूबते जहाज से भागने का लगाया आरोप

दिलीप घोष ने चंद्रिमा भट्टाचार्य की मंशा पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब तक सत्ता का सुख मिला, तब तक वह चुप रहीं और आज जब पार्टी का अंत करीब दिख रहा है, तो वह ईमानदारी की बातें कर रही हैं। उन्होंने पूछा कि जनता द्वारा चुनी गई प्रतिनिधि होने के नाते उन्होंने तब आवाज क्यों नहीं उठाई जब सरकार में सब कुछ गलत हो रहा था? इतने सालों तक चुप्पी साधे रखना और अब अचानक बगावत करना यह साफ करता है कि वह केवल अपनी राजनीतिक जमीन बचाने के लिए डूबते जहाज से भाग रही हैं।

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दो हजार पंचायत प्रधानों के फरार होने से प्रशासनिक कामकाज ठप

प्रदेश की जमीनी प्रशासनिक व्यवस्था पर चिंता जताते हुए दिलीप घोष ने एक और बड़ा दावा किया। उन्होंने कहा कि राज्य में कम से कम 2,000 ग्राम पंचायत प्रधान या तो डर के मारे दफ्तर नहीं आ रहे हैं, या पूरी तरह से फरार और निष्क्रिय हो चुके हैं। इस वजह से ग्रामीण इलाकों में सरकारी योजनाओं का क्रियान्वयन ठप हो गया है और आम जनता को जरूरी प्रमाण पत्र तक नहीं मिल पा रहे हैं। उन्होंने ऐसे जनप्रतिनिधियों को चेतावनी भरे लहजे में कहा कि सरकार से वेतन लेने के बाद जनता के प्रति जवाबदेही से भागा नहीं जा सकता। यदि वे काम पर वापस नहीं लौटे तो उन्हें गंभीर कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा। उन्होंने साफ किया कि टीएमसी शासन में हुए हर भ्रष्टाचार की जांच की जा रही है और दोषियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।

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