Home » उत्तर प्रदेश » रामलला के खजाने का पूरा हिसाब: विवादों के बीच स्वामी गोविंद देव गिरि का बड़ा बयान, अब तक मिले 3,200 करोड़ रुपये, खर्च के बाद भी 1,800 करोड़ सुरक्षित

रामलला के खजाने का पूरा हिसाब: विवादों के बीच स्वामी गोविंद देव गिरि का बड़ा बयान, अब तक मिले 3,200 करोड़ रुपये, खर्च के बाद भी 1,800 करोड़ सुरक्षित

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अयोध्या। श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में हालिया प्रशासनिक फेरबदल और विवादों के बाद अब पूरी व्यवस्था को नए सिरे से पारदर्शी और त्रुटिरहित बनाने की कवायद तेज हो गई है। ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद देव गिरि ने मंदिर के वित्तीय लेखा-जोखा को लेकर एक बहुत बड़ा और महत्वपूर्ण खुलासा किया है। उन्होंने बताया कि जब से भव्य राम मंदिर के निर्माण की प्रक्रिया शुरू हुई है, तब से लेकर अब तक देश-विदेश के श्रद्धालुओं के माध्यम से ट्रस्ट को लगभग 3,200 करोड़ रुपये की कुल आय (दान और चंदा) प्राप्त हुई है। इसमें से भव्य मंदिर निर्माण, गर्भगृह और अन्य बुनियादी ढांचों के विकास पर हुए भारी-भरकम खर्च के बाद भी आज की तारीख में ट्रस्ट के बैंक खातों में करीब 1,800 करोड़ रुपये की सुरक्षित धनराशि शेष है।

केवल इस्तीफा समाधान नहीं, कार्यप्रणाली सुधारना मुख्य लक्ष्य

स्वामी गोविंद देव गिरि ने आईएएनएस से विशेष बातचीत में स्पष्ट किया कि हाल के दिनों में उपजे विवादों के बाद केवल पदाधिकारियों के इस्तीफे मंजूर कर लेने भर से पूरी समस्या का अंत नहीं हो जाता। उनका साफ मानना है कि असली और स्थायी समाधान ट्रस्ट की पूरी कार्यप्रणाली में आमूलचूल सुधार करना है। उन्होंने बताया कि मंदिर प्रबंधक के पद को लेकर भी बड़ा निर्णय लिया जा चुका है। गोपाल राव को पहले ही आधिकारिक रूप से सूचित कर दिया गया है कि अब वे इस पद की प्रशासनिक जिम्मेदारियों का निर्वहन नहीं करेंगे। ट्रस्ट अब एक ऐसी फुल-प्रूफ और आधुनिक व्यवस्था तैयार करने में जुटा है, जिससे पूरी प्रणाली में शत-प्रतिशत पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित की जा सके।

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चंपत राय के चरित्र पर नहीं, काम करने के तरीके पर हुई कार्रवाई

बैठक में चंपत राय और डॉ. अनिल मिश्रा के इस्तीफे स्वीकार किए जाने के बाद राजनीतिक गलियारों में लग रहे आरोपों पर कोषाध्यक्ष ने खुलकर अपनी बात रखी। उन्होंने चंपत राय के साथ अपने दशकों पुराने व्यक्तिगत और संगठनात्मक जुड़ाव का हवाला देते हुए कहा कि जो कार्रवाई या बदलाव हुए हैं, वे केवल चंपत राय के काम करने के सख्त और पारंपरिक तरीके (कार्यशैली) को लेकर हुए हैं, न कि उनके व्यक्तिगत चरित्र या निष्ठा को लेकर। स्वामी गोविंद देव गिरि ने दोटूक शब्दों में कहा कि यदि कोई व्यक्ति चंपत राय पर सीधे तौर पर आर्थिक अनियमितता या गबन का आरोप लगाता है, तो वह इसे सिरे से खारिज करते हैं और इसे बिल्कुल सही नहीं मानते।

चंपत राय को पहले भी दी गई थी कार्यशैली बदलने की सलाह

कोषाध्यक्ष ने यह भी स्वीकार किया कि चंपत राय को समय-समय पर अपनी प्रशासनिक कार्यशैली और व्यवहार में बदलाव लाने के लिए कई बार दोस्ताना सलाह दी गई थी। उनकी कार्यशैली में कुछ ऐसी कमियां थीं जिसके कारण विवाद बढ़े, लेकिन उन प्रशासनिक खामियों को उनके चरित्र या ईमानदारी से जोड़कर देखना पूरी तरह अनुचित है। उन्होंने कहा कि हालिया घटनाक्रमों के कारण आम जनता और रामभक्तों के बीच जो भी थोड़ा-बहुत भ्रम पैदा हुआ था, उसे दूर करने की प्रक्रिया अब पूरी ताकत से शुरू हो चुकी है। जल्द ही दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा और ट्रस्ट एक बार फिर देश की सबसे विश्वसनीय धार्मिक संस्था के रूप में काम करेगा।

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अखिलेश यादव के आरोपों पर एसआईटी की रिपोर्ट का इंतजार

समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव द्वारा पूर्व में राम मंदिर के चढ़ावे में कथित चोरी और संदिग्ध आरोपियों के सत्तारूढ़ दल से संपर्कों को लेकर उठाए गए तीखे सवालों पर स्वामी गोविंद देव गिरि ने बेहद सधा हुआ रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि इस पूरे मामले की जांच के लिए गठित की गई विशेष जांच दल (SIT) की अंतिम और आधिकारिक रिपोर्ट आने से पहले वह इस राजनीतिक विषय पर कोई भी टिप्पणी करना उचित नहीं समझते। उन्होंने अंत में जोड़ा कि किसी भी बड़े और ऐतिहासिक ट्रस्ट में समय-समय पर फैसलों और व्यवस्थाओं की आंतरिक समीक्षा होना एक सतत और सामान्य प्रक्रिया है, जिससे संस्थाएं कमजोर नहीं बल्कि और अधिक मजबूत व विश्वसनीय बनती हैं।

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