अयोध्या। राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्रा ने राम मंदिर में चढ़ावे (दान) से जुड़े हालिया विवाद को पूरे मंदिर परिवार के लिए “बेहद पीड़ादायक” और दुर्भाग्यपूर्ण बताया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस चूक को सुधारने के लिए पूरी व्यवस्था में आवश्यक और कड़े बदलाव किए जाएंगे ताकि भविष्य में इस तरह की घटना की पुनरावृत्ति न हो सके। इसके साथ ही उन्होंने राम मंदिर के शेष बचे निर्माण कार्यों की समय-सीमा और प्रगति की विस्तृत जानकारी भी मीडिया के साथ साझा की।
चढ़ावा विवाद पर जताया गहरा दुख, कहा- सुधारेंगे व्यवस्था
नृपेंद्र मिश्रा ने पत्रकारों से बातचीत के दौरान कहा कि श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद देव गिरी के साथ उनकी इस संवेदनशील मामले पर विस्तृत बातचीत हुई है। उन्होंने कहा, “राम मंदिर में जो घटना घटित हुई है, वह अपने आप में एक कलंक की तरह है। इस घटना से हम सभी को न केवल गहरा दुख पहुंचा है, बल्कि एक छोटापन भी महसूस हो रहा है।” उन्होंने जोर देकर कहा कि यह पूरी तरह से आंतरिक व्यवस्था और प्रबंधन का विषय है, जिसमें जल्द ही व्यापक सुधार किए जाएंगे। उन्हें पूरा विश्वास है कि कड़े कदम उठाने के बाद भविष्य में ऐसी कोई घटना दोबारा नहीं होगी।
30 जुलाई तक पूरा होगा मुख्य मंदिर का निर्माण
मंदिर निर्माण की समीक्षा बैठक के बाद नृपेंद्र मिश्रा ने बताया कि रामलला का मुख्य मंदिर अब अपने अंतिम चरण में पहुंच चुका है और ३० जुलाई तक इसका सभी प्रमुख निर्माण कार्य पूरी तरह संपन्न कर लिया जाएगा। वर्तमान में मुख्य रूप से दो बड़े कार्य शेष हैं। पहला, पुराने मंदिर और उससे जुड़े स्मारक का कार्य, जहां २४ घंटे अनवरत जलने वाली अखंड ज्योति की विशेष व्यवस्था की जानी है। इसके अलावा, स्मारक से संबंधित दूसरा बड़ा कार्य चल रहा है, जिसे जुलाई के अंत तक पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
परिकोटा और ऑडिटोरियम की समय-सीमा तय
मुख्य मंदिर के अलावा परिसर के अन्य विकास कार्यों के बारे में जानकारी देते हुए उन्होंने बताया कि मंदिर के चारों ओर बनने वाली लगभग चार किलोमीटर लंबी सुरक्षात्मक बाउंड्री वॉल का निर्माण कार्य ३० सितंबर तक पूरा करने का लक्ष्य है। निर्माण स्थल के निरीक्षण के बाद उन्हें विश्वास है कि यह काम समय पर हो जाएगा। मंदिर परिसर के बाहर श्रद्धालुओं और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के लिए बनने वाले भव्य ऑडिटोरियम का काम नवंबर-दिसंबर तक पूरा होने की संभावना है। इस संग्रहालय की स्टोरी लाइन (कथावस्तु) पूरी तरह तैयार हो चुकी है। इसमें आधुनिक तकनीक, थ्री-डी और वीडियो प्रस्तुति को किस तरह शामिल किया जाए, इस पर शनिवार और रविवार को होने वाली उच्चस्तरीय बैठकों में अंतिम निर्णय लिया जाएगा।
श्रद्धालुओं की संख्या कभी कम नहीं होगी
रामलला के दर्शन के लिए उमड़ रही भारी भीड़ पर मिश्रा ने कहा कि यह मंदिर पूरी दुनिया में अपने आप में अद्वितीय है। हालांकि सभी मंदिर श्रद्धा और आस्था के परम केंद्र होते हैं, लेकिन यह मंदिर एक बेहद लंबे आंदोलन और संघर्ष के बाद उसी पावन स्थान पर बना है, जहां भगवान श्री राम साक्षात विराजमान हुए हैं। यही कारण है कि यहां आने वाले भक्तों की संख्या कभी कम नहीं होगी। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि सनातन धर्म को मानने वाला हर व्यक्ति अपने जीवन में कम से कम एक बार रामलला के दर्शन करने अयोध्या जरूर आएगा।
उन्होंने यह भी बताया कि निर्माण कार्यों में पारदर्शिता और गुणवत्ता बनाए रखने के लिए एलएंडटी, टीसीई, राजकीय निर्माण निगम और इंजीनियर्स इंडिया लिमिटेड जैसी देश की शीर्ष एजेंसियां मिलकर काम कर रही हैं। किसी भी तकनीकी विवाद या महत्वपूर्ण विषय पर निर्णय लेने के लिए एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में उच्चस्तरीय समिति गठित है, जो अपनी सिफारिशें सीधे ट्रस्ट को सौंपती है।


