मुज़फ्फरनगर। संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) के आह्वान पर भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) के बैनर तले मंगलवार को मुज़फ्फरनगर कलेक्ट्रेट में धरना-प्रदर्शन किया गया। प्रदर्शन के बाद किसानों ने राष्ट्रपति के नाम संबोधित ज्ञापन प्रशासनिक अधिकारी को सौंपा। इस दौरान भाकियू के राष्ट्रीय प्रवक्ता चौधरी राकेश टिकैत ने भारत-अमेरिका ट्रेड डील, छात्रों के आंदोलन, बिजली के निजीकरण, गन्ना किसानों के मुद्दे और मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी सहित कई विषयों पर केंद्र और राज्य सरकार की नीतियों की आलोचना की।
भारत-अमेरिका ट्रेड डील का किया विरोध
मीडिया से बातचीत में राकेश टिकैत ने कहा कि संयुक्त किसान मोर्चा के आह्वान पर देशभर के जिला मुख्यालयों पर महापंचायतें आयोजित की जा रही हैं। उन्होंने दावा किया कि भारत-अमेरिका ट्रेड डील यदि किसानों और डेयरी क्षेत्र के हितों के प्रतिकूल रही, तो इसका सबसे अधिक नुकसान किसानों, पशुपालकों और छोटे व्यापारियों को होगा।
उन्होंने कहा कि यदि विदेशी कृषि और डेयरी उत्पादों को भारतीय बाजार में विशेष छूट दी जाती है, तो भारतीय किसान प्रतिस्पर्धा में कमजोर पड़ जाएंगे। उन्होंने सरकार से किसानों के हितों की रक्षा करने की मांग की।
एमएसपी, गन्ना भुगतान और बिजली निजीकरण पर भी उठाई आवाज
राकेश टिकैत ने बिजली के निजीकरण और स्मार्ट मीटर योजना का विरोध करते हुए कहा कि किसान किसी भी कीमत पर बिजली के निजीकरण को स्वीकार नहीं करेंगे।
उन्होंने गन्ना किसानों के बकाया भुगतान को ब्याज सहित दिलाने, गन्ने का मूल्य बढ़ाने तथा सभी फसलों पर कानूनी गारंटी के साथ न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) लागू करने की मांग भी दोहराई।
छात्रों पर लाठीचार्ज की निष्पक्ष जांच की मांग
जंतर-मंतर पर छात्रों के प्रदर्शन का जिक्र करते हुए टिकैत ने कहा कि युवा रोजगार और शिक्षा जैसे मुद्दों को लेकर अपनी लोकतांत्रिक आवाज उठा रहे हैं। उन्होंने छात्रों पर हुई कथित पुलिस कार्रवाई की आलोचना करते हुए कहा कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
उन्होंने आरोप लगाया कि आंदोलन को बदनाम करने का प्रयास किया गया और छात्रों की आवाज को दबाने की कोशिश हुई।
‘यूनिवर्सिटी का नाम बदल दो, तोड़ना समाधान नहीं’
मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी से जुड़े सवाल पर राकेश टिकैत ने कहा कि यदि किसी को यूनिवर्सिटी के नाम पर आपत्ति है तो उसका नाम बदला जा सकता है, लेकिन किसी विश्वविद्यालय को तोड़ना समाधान नहीं है।
उन्होंने कहा कि प्रदेश में नई यूनिवर्सिटियों की संख्या बढ़ाने पर ध्यान दिया जाना चाहिए। उनके अनुसार, किसी शैक्षणिक संस्थान को ध्वस्त करने का संदेश देश और विदेश दोनों स्तरों पर उचित नहीं जाएगा।
कांवड़ यात्रा को लेकर भी दी सलाह
कांवड़ यात्रा का उल्लेख करते हुए राकेश टिकैत ने कहा कि आजकल कई युवा अत्यधिक वजन वाली कांवड़ लेकर लंबी दूरी तय करते हैं, जिससे उनके स्वास्थ्य, विशेषकर रीढ़ की हड्डी पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
उन्होंने कहा कि आस्था जल की मात्रा में नहीं, बल्कि श्रद्धा में होती है। उनके अनुसार सरकार को कांवड़ के वजन और जल की अधिकतम सीमा तय करने पर विचार करना चाहिए।
‘किसानों और युवाओं की लड़ाई जारी रहेगी’
महापंचायत के दौरान राकेश टिकैत ने कहा कि किसानों, मजदूरों और युवाओं से जुड़े मुद्दों पर उनका संघर्ष आगे भी जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि संयुक्त किसान मोर्चा और भारतीय किसान यूनियन देशभर में किसानों के मुद्दों को लेकर आंदोलन को और मजबूत करेंगे



