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अयोध्या के संत बोले-रामलला के दर्शन में कोई कमी नहीं, सुप्रीम कोर्ट का फैसला देशहित में होगा

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अयोध्या। राम मंदिर के चढ़ावे में कथित गबन से जुड़े मामले की सुनवाई से पहले अयोध्या के संतों ने स्पष्ट कहा है कि इस विवाद का रामलला के दर्शन और पूजा-पाठ पर कोई असर नहीं पड़ा है। उन्होंने कहा कि प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु रामलला के दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं और मंदिर में दर्शन एवं पूजा की व्यवस्था पहले की तरह सुचारु रूप से संचालित हो रही है। संतों ने सुप्रीम कोर्ट में सोमवार को होने वाली सुनवाई पर भी भरोसा जताते हुए कहा कि न्यायालय का निर्णय देश, धर्म और संस्कृति के हित में होगा।

भक्तों की संख्या लगातार बढ़ रही, दर्शन व्यवस्था सुचारु

राम मंदिर ट्रस्ट के सदस्य दिनेंद्र दास ने कहा कि अयोध्या में श्रद्धालुओं की संख्या लगातार बढ़ रही है और रामलला के दर्शन करने वालों की कोई कमी नहीं है। उन्होंने बताया कि मंदिर में नियमित रूप से पूजा-पाठ हो रहा है तथा श्रद्धालुओं को बिना किसी परेशानी के दर्शन कराए जा रहे हैं।

उन्होंने कहा कि राम मंदिर निर्माण का लगभग 99 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है और अब व्यवस्थाओं को और बेहतर बनाने की दिशा में काम किया जा रहा है। उन्होंने विश्वास जताया कि सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद मंदिर की व्यवस्थाओं में और अधिक सुधार देखने को मिलेगा।

नई एसआईटी जांच का किया समर्थन

दिनेंद्र दास ने राम मंदिर चढ़ावा मामले की जांच के लिए नई एसआईटी के गठन का स्वागत करते हुए कहा कि यदि किसी प्रकार की शंका है तो उसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि अयोध्या के लोग पूरे घटनाक्रम से परिचित हैं और मंदिर ट्रस्ट जांच एजेंसियों को पूरा सहयोग देगा ताकि भविष्य में किसी प्रकार का विवाद न रहे।

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उन्होंने कहा कि यदि जांच निष्पक्ष ढंग से होगी तो सच्चाई सामने आएगी और मंदिर की व्यवस्था पहले से अधिक पारदर्शी बनेगी।

सुप्रीम कोर्ट पर जताया भरोसा

राम मंदिर के चढ़ावे में कथित गबन से जुड़ी चार याचिकाओं पर सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई प्रस्तावित है। इससे पहले अयोध्या के कई संतों ने न्यायपालिका पर भरोसा जताया है।

जगतगुरु परमहंस आचार्य ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट देश का सर्वोच्च न्यायालय है और वहां जो भी फैसला होगा, वह देश और भारतीय संस्कृति के हित में होगा। उन्होंने कहा कि न्याय की सर्वोच्च संस्था पर सभी को विश्वास रखना चाहिए।

महामंडलेश्वर विष्णु दास ने भी नई एसआईटी के गठन का स्वागत करते हुए कहा कि उन्हें विश्वास है कि सुप्रीम कोर्ट का निर्णय संत समाज और देशहित में होगा। उन्होंने आरोप लगाया कि राम मंदिर के दान प्रकरण को लेकर विपक्ष अनावश्यक राजनीति कर रहा है, जबकि मामले की निष्पक्ष जांच होने देना ही उचित होगा।


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