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विपक्ष का सरकार पर हमला, बोले- कानून के नाम पर जनता और छात्रों को किया जा रहा गुमराह

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नई दिल्ली। संसद के मॉनसून सत्र के दौरान सोमवार को सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026 को लेकर विपक्षी दलों ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) और झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के सांसदों ने आरोप लगाया कि सरकार केवल नए कानून लाकर जनता और छात्रों को गुमराह कर रही है, जबकि पेपर लीक जैसी समस्याओं के समाधान के लिए प्रभावी कार्रवाई और शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार की जरूरत है।

छात्रों के खिलाफ कार्रवाई पर उठाए सवाल

कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने संसद परिसर में मीडिया से बातचीत के दौरान कहा कि उन्हें जानकारी मिली है कि बिहार और पश्चिम बंगाल में छात्रों के खिलाफ अब भी एफआईआर दर्ज की जा रही हैं। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इस जानकारी की अभी पुष्टि नहीं हुई है। उन्होंने कहा कि यदि तथ्यों की पुष्टि नहीं हुई है तो ऐसे मामलों पर स्पष्टता जरूरी है।

कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने संशोधन विधेयक की आवश्यकता पर सवाल उठाते हुए कहा कि सरकार पहले भी इस विषय पर कानून बना चुकी है। उन्होंने पूछा कि यदि पहले का कानून पर्याप्त था तो नए संशोधन की जरूरत क्यों पड़ी। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार प्रभावी जांच और कार्रवाई के बजाय केवल नए कानून लाने पर जोर दे रही है।

इमरान मसूद ने पेपर लीक मामलों का उल्लेख करते हुए कहा कि जांच एजेंसियों को समयबद्ध तरीके से कार्रवाई करनी चाहिए ताकि दोषियों को सजा मिल सके। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि छात्रों के विरोध-प्रदर्शनों के दौरान उनके साथ कठोर व्यवहार किया गया।

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‘सिर्फ कानून बदलने से नहीं होगा समाधान’

लोकसभा में कांग्रेस के नेता गौरव गोगोई ने चर्चा के दौरान कहा कि केवल कानून में संशोधन करने से समस्या का समाधान नहीं होगा। उन्होंने कहा कि यदि जांच निष्पक्ष और प्रभावी नहीं होगी तो कानून का उद्देश्य पूरा नहीं हो सकेगा। उन्होंने सरकार पर भ्रष्टाचार के आरोपियों को बचाने का भी आरोप लगाया।

कांग्रेस सांसद उज्ज्वल रमन सिंह ने कहा कि किसी भी कानून की सफलता उसके प्रभावी क्रियान्वयन पर निर्भर करती है। उनके अनुसार यदि जांच समय पर पूरी नहीं होती और चार्जशीट दाखिल करने में देरी होती है तो कानूनी प्रक्रिया प्रभावित होती है। उन्होंने सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए कहा कि इच्छाशक्ति के बिना कोई भी कानून प्रभावी साबित नहीं हो सकता।

टीएमसी और झामुमो ने भी सरकार को घेरा

तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ सांसद सौगत रॉय ने राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) में सुधार के लिए हाई पावर्ड टास्क फोर्स के गठन का स्वागत किया, लेकिन कहा कि इससे विपक्ष की सभी चिंताओं का समाधान नहीं होता। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से माफी की मांग दोहराई और छात्रों के खिलाफ कथित बल प्रयोग के मुद्दे पर गृह मंत्री अमित शाह की आलोचना की।

झामुमो सांसद महुआ माजी ने कहा कि उनकी पार्टी विधेयक पर गंभीर और विस्तृत चर्चा चाहती है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार पहले भी पेपर लीक रोकने के दावे करती रही है, लेकिन अपेक्षित सुधार नहीं हो पाया। उन्होंने कहा कि भविष्य में ऐसा कानून बनाया जाना चाहिए, जिसमें विपक्ष के सुझावों को भी शामिल किया जाए।

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टीएमसी सांसद सागरिका घोष ने आरोप लगाया कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों के खिलाफ अत्यधिक बल प्रयोग किया गया। उन्होंने सरकार से सवाल किया कि प्रदर्शन कर रहे छात्रों के खिलाफ इतनी कठोर कार्रवाई की आवश्यकता क्यों पड़ी।

हालांकि, इन नेताओं द्वारा लगाए गए आरोप सरकार के खिलाफ राजनीतिक बयान हैं। सरकार की ओर से इन आरोपों पर अलग पक्ष या प्रतिक्रिया इस खबर में उपलब्ध नहीं है।


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