लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर ने समाजवादी पार्टी (सपा) अध्यक्ष अखिलेश यादव पर तीखा राजनीतिक हमला बोला है। उन्होंने दावा किया कि सपा का पीडीए (पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक) समीकरण कमजोर पड़ रहा है और पार्टी अब अपने पारंपरिक वोट बैंक को बचाने की चुनौती का सामना कर रही है।
मंगलवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अखिलेश यादव को टैग करते हुए ओम प्रकाश राजभर ने कहा कि आगामी राजनीतिक मुकाबला केवल एनडीए से नहीं, बल्कि सपा को अपने ही सहयोगियों और पारंपरिक समर्थन आधार से भी करना पड़ेगा।
“पीडीए हाथ से निकल रहा, एमवाई समीकरण बचाने की नौबत”
राजभर ने अपने पोस्ट में दावा किया कि जमीनी स्तर पर सपा का पीडीए समीकरण कमजोर हो चुका है और अब पार्टी के सामने एमवाई (मुस्लिम-यादव) समीकरण को बचाने की चुनौती खड़ी हो गई है।
उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी मुस्लिम मतदाताओं के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं, जबकि एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी भी उसी वोट बैंक में अपनी राजनीतिक जमीन तलाश रहे हैं। राजभर ने कहा कि इससे समाजवादी पार्टी के पारंपरिक समर्थन आधार पर दबाव बढ़ रहा है।
कानून-व्यवस्था और माफिया संरक्षण को लेकर लगाए आरोप
ओम प्रकाश राजभर ने समाजवादी पार्टी पर कानून-व्यवस्था को लेकर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि ग्रामीण क्षेत्रों में सपा की छवि गुंडागर्दी और माफिया संरक्षण से जुड़ी पार्टी के रूप में बनी हुई है।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सपा शासनकाल में गैर-यादव पिछड़ों और बहुजन समाज के लोगों के साथ अन्याय हुआ तथा प्रशासनिक तंत्र पर राजनीतिक प्रभाव बढ़ा। इन आरोपों के समर्थन में उन्होंने कोई साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया।
“2027 में मुख्य विपक्षी दल बनने की स्थिति भी नहीं रहेगी”
राजभर ने दावा किया कि समाजवादी पार्टी की कार्यशैली से उसका पारंपरिक मुस्लिम समर्थन भी कमजोर हो रहा है। उन्होंने कहा कि यदि यही स्थिति बनी रही तो वर्ष 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में सपा मुख्य विपक्षी दल बनने की स्थिति में भी नहीं रह जाएगी।
उन्होंने अखिलेश यादव को सलाह देते हुए कहा कि उन्हें जमीनी हकीकत को समझना चाहिए और अपने राजनीतिक सहयोगियों तथा समर्थन आधार में हो रहे बदलावों पर गंभीरता से ध्यान देना चाहिए।
राजभर ने अपने संदेश के अंत में कहा कि वह राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी होने के बावजूद “मित्र” के नाते सलाह दे रहे हैं, ताकि भविष्य में राज्य को एक मजबूत विपक्ष भी मिल सके।



