मुज़फ़्फ़रनगर। कांवड़ यात्रा-2026 में इस बार आस्था के साथ नवाचार और अनूठी प्रस्तुतियों का अद्भुत संगम देखने को मिल रहा है। कभी स्पोर्ट्स कार की तर्ज पर बनी कांवड़, कभी गोल्डन कांवड़, कभी विशाल त्रिशूल तो कभी भव्य झांकियां… इन्हीं के बीच अब दिल्ली के हर्ष विहार से आई नोटों से सजी अनोखी कांवड़ श्रद्धालुओं और राहगीरों के आकर्षण का केंद्र बन गई है। दूर से देखने पर ऐसा प्रतीत होता है मानो पूरी कांवड़ नोटों की चादर से ढकी हुई हो। जहां-जहां यह कांवड़ पहुंच रही है, वहां लोग रुककर इसकी तस्वीरें और वीडियो अपने मोबाइल में कैद कर रहे हैं।
दिल्ली के हर्ष विहार निवासी शिवभक्त दीपांशु हरिद्वार की हरकी पैड़ी से पवित्र गंगाजल लेकर अपने गंतव्य की ओर पैदल यात्रा कर रहे हैं। उनकी कांवड़ को 10, 20, 50 और 100 रुपये के अनगिनत नोटों से सजाया गया है। दीपांशु के साथ उनके चार साथी भी यात्रा में सहयोग कर रहे हैं, हालांकि इस विशेष कांवड़ को वह स्वयं अपने कंधे पर लेकर चल रहे हैं।
“नोट नहीं, बाबा के प्रति श्रद्धा का प्रतीक हैं”
मीडिया से बातचीत करते हुए दीपांशु ने बताया कि काफी समय से उनका सपना था कि वह नोटों से सजी विशेष कांवड़ लेकर भगवान भोलेनाथ की सेवा करें। उन्होंने कहा कि इसी इच्छा को पूरा करने के लिए वर्ष 2026 में उन्होंने यह अनूठी कांवड़ तैयार कराई है।
दीपांशु ने बताया कि कांवड़ में लगे नोटों की उन्होंने कभी गिनती नहीं की। उनके लिए यह धन नहीं, बल्कि भगवान भोलेनाथ के प्रति श्रद्धा, प्रेम और समर्पण का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि बाबा भोलेनाथ के आशीर्वाद से ही यह कांवड़ तैयार हो सकी है और इसमें लगे सभी नोट उन्हीं को समर्पित हैं।
जलाभिषेक के बाद नोटों से कराया जाएगा भंडारा
दीपांशु ने बताया कि कांवड़ का मूल ढांचा उन्होंने हरकी पैड़ी से करीब नौ हजार रुपये में तैयार कराया था। इसके बाद उन्होंने उस पर अलग-अलग मूल्यवर्ग के नोट सजाए। उन्होंने कहा कि जलाभिषेक पूरा होने के बाद कांवड़ में लगे सभी नोटों का उपयोग भंडारा कराने में किया जाएगा, ताकि श्रद्धालुओं की सेवा हो सके।
उन्होंने बताया कि उन्होंने 28 जुलाई को हरिद्वार से गंगाजल उठाया था और उनकी यात्रा लगभग 200 किलोमीटर की है। प्रतिदिन वह करीब 18 से 19 किलोमीटर पैदल चलते हैं और 10 अगस्त तक अपने गंतव्य पर पहुंचने का लक्ष्य है।
दीपांशु ने बताया कि उनके साथ यात्रा में चार लोग हैं। हालांकि नोटों से सजी कांवड़ केवल उनकी है और वह अकेले इसे अपने कंधे पर लेकर चल रहे हैं। उनके साथ चल रहे अन्य साथी उनके भाई हैं, जो पूरी यात्रा में उनका सहयोग और हौसला बढ़ा रहे हैं।
यूपी में मिला भरपूर प्यार, पांचवीं कांवड़ यात्रा पर निकले दीपांशु
दीपांशु ने कहा कि उत्तराखंड की तुलना में उत्तर प्रदेश में प्रवेश करने के बाद उन्हें श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों का भरपूर स्नेह और सहयोग मिला। उन्होंने कहा कि यूपी में जगह-जगह लोगों ने उनका स्वागत किया, जिससे उन्हें बेहद खुशी हुई। उन्होंने इसके लिए उत्तर प्रदेश के लोगों का आभार भी व्यक्त किया।
उन्होंने बताया कि यह उनकी पांचवीं कांवड़ यात्रा है। इससे पहले वह कलश कांवड़ और डाक कांवड़ लेकर यात्रा कर चुके हैं, लेकिन नोटों से सजी यह उनकी पहली विशेष कांवड़ है। उनका कहना है कि बाबा भोलेनाथ की कृपा से ही उन्हें हर बार कुछ नया करने की प्रेरणा मिलती है।
मुज़फ़्फ़रनगर से गुजर रही यह नोटों वाली कांवड़ इन दिनों श्रद्धालुओं के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है। आस्था, सेवा और अनूठी प्रस्तुति का यह संगम कांवड़ यात्रा-2026 को और भी खास बना रहा है।



