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हरियाली अमावस्या पर शिव आराधना और दान-पुण्य का विशेष महत्व, रात में लगेगा साल का आखिरी पूर्ण सूर्य ग्रहण

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नई दिल्ली। हिंदू धर्म में पंचांग का विशेष महत्व माना गया है। किसी शुभ कार्य, यात्रा, पूजा-पाठ, धार्मिक अनुष्ठान, निवेश या अन्य महत्वपूर्ण काम की शुरुआत से पहले पंचांग देखकर शुभ और अशुभ समय का विचार किया जाता है। पंचांग हिंदू काल गणना की वह परंपरागत पद्धति है, जो सूर्य, चंद्रमा और अन्य ग्रहों की स्थिति तथा तिथि, नक्षत्र और योग आदि के आधार पर दिन की धार्मिक एवं ज्योतिषीय गणना प्रस्तुत करती है।

12 अगस्त 2026 बुधवार का दिन धार्मिक दृष्टि से खास रहने वाला है। इस दिन श्रावण मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या यानी हरियाली अमावस्या रहेगी। इस अवसर पर भगवान शिव की आराधना, पितरों का तर्पण, दान-पुण्य और पवित्र नदियों में स्नान का विशेष महत्व बताया गया है। इसी दिन रात में वर्ष का दूसरा और आखिरी पूर्ण सूर्य ग्रहण भी लगेगा, हालांकि यह ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा।

रात 11:06 बजे तक रहेगी हरियाली अमावस्या

पंचांग के अनुसार 12 अगस्त को श्रावण मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि रात 11 बजकर 6 मिनट तक रहेगी। इसके बाद प्रतिपदा तिथि शुरू हो जाएगी।

हरियाली अमावस्या को धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है। इस दिन भगवान शिव की पूजा और आराधना करने से विशेष फल की प्राप्ति होने की मान्यता है। श्रद्धालु शिवलिंग पर जल अर्पित कर भगवान शिव का पूजन कर सकते हैं। पितरों की शांति के लिए तर्पण और जरूरतमंद लोगों को अन्न, वस्त्र या अन्य सामग्री का दान करने का भी विशेष महत्व बताया गया है।

अमावस्या के दिन पवित्र नदियों में स्नान करने की भी धार्मिक परंपरा है। मान्यता है कि श्रद्धा और विधि-विधान से किए गए दान-पुण्य से पुण्य फल की प्राप्ति होती है।

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सूर्योदय से सूर्यास्त तक जानिए दिन का समय

12 अगस्त बुधवार को सूर्योदय सुबह 6 बजकर 5 मिनट पर होगा, जबकि सूर्यास्त शाम 6 बजकर 58 मिनट पर होगा। चंद्रोदय सुबह 5 बजकर 19 मिनट पर और चंद्रास्त शाम 6 बजकर 52 मिनट पर होगा।

पंचांग के अनुसार इस दिन सूर्य अश्लेषा नक्षत्र में स्थित रहेगा। वहीं चंद्रमा सुबह 7 बजकर 59 मिनट तक पुष्य नक्षत्र में रहेगा और इसके बाद अश्लेषा नक्षत्र में प्रवेश करेगा।

व्यतिपात योग के बाद बनेगा वरीयान योग

12 अगस्त को दोपहर 3 बजकर 24 मिनट तक व्यतिपात योग रहेगा। इसके बाद वरीयान योग प्रारंभ होगा। पंचांग में विभिन्न योगों का धार्मिक और ज्योतिषीय दृष्टि से विशेष महत्व माना जाता है।

दिन का अभिजित मुहूर्त सुबह के बाद दोपहर 11 बजकर 59 मिनट से 12 बजकर 52 मिनट तक रहेगा। इसे दिन के प्रमुख शुभ मुहूर्तों में माना जाता है। इसके अलावा अमृत काल तड़के 4 बजकर 36 मिनट से सुबह 6 बजकर 5 मिनट तक रहेगा।

रात में लगेगा साल का दूसरा और आखिरी पूर्ण सूर्य ग्रहण

12 अगस्त की रात आसमान में इस साल का दूसरा और आखिरी पूर्ण सूर्य ग्रहण लगेगा। भारतीय समय के अनुसार सूर्य ग्रहण रात 9 बजकर 4 मिनट पर शुरू होगा और 13 अगस्त की देर रात 1 बजकर 28 मिनट पर समाप्त होगा।

ग्रहण का चरम काल रात 11 बजकर 16 मिनट पर रहेगा। हालांकि भारत के लोगों के लिए राहत की बात यह है कि यह पूर्ण सूर्य ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा।

पूर्ण सूर्य ग्रहण ग्रीनलैंड, आइसलैंड, स्पेन, उत्तरी रूस और पुर्तगाल के कुछ हिस्सों में दिखाई देगा। भारत में ग्रहण दिखाई नहीं देने के कारण यहां पारंपरिक मान्यता के अनुसार सूतक काल भी मान्य नहीं होगा।

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राहुकाल में शुभ कार्यों से बचने की मान्यता

पंचांग के अनुसार बुधवार को राहुकाल दोपहर 12 बजकर 31 मिनट से 2 बजकर 8 मिनट तक रहेगा। वहीं गुलिक काल सुबह 10 बजकर 55 मिनट से दोपहर 12 बजकर 31 मिनट तक रहेगा।

यमगंड काल सुबह 7 बजकर 42 मिनट से 9 बजकर 18 मिनट तक रहेगा। पारंपरिक ज्योतिषीय मान्यताओं में राहुकाल, गुलिक काल और यमगंड को शुभ कार्यों के लिए उपयुक्त नहीं माना जाता। इसलिए इन अवधियों में नए कार्यों की शुरुआत करने से बचने की सलाह दी जाती है।

कर्क राशि में रहेंगे सूर्य और चंद्रमा

ज्योतिषीय गणना के अनुसार 12 अगस्त को सूर्य कर्क राशि में स्थित रहेगा। चंद्रमा भी कर्क राशि में ही रहेगा। अमावस्या तिथि होने के कारण सूर्य और चंद्रमा की स्थिति एक ही राशि में होना इस दिन को ज्योतिषीय दृष्टि से भी महत्वपूर्ण बनाता है।

इस दिन उत्तर दिशा में दिशाशूल रहेगा। ज्योतिष और वास्तु की पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार दिशाशूल वाली दिशा में यात्रा करने से बचने की सलाह दी जाती है। यदि किसी कारणवश उत्तर दिशा की यात्रा करना जरूरी हो तो प्रस्थान से पहले पारंपरिक ज्योतिषीय उपाय करने की मान्यता है।

शिव आराधना, तर्पण और दान के लिए खास दिन

हरियाली अमावस्या के अवसर पर श्रद्धालु भगवान शिव का जलाभिषेक कर सकते हैं। शिव मंदिर में पूजा-अर्चना करने के साथ जरूरतमंदों को भोजन, अन्न, वस्त्र और अपनी सामर्थ्य के अनुसार अन्य वस्तुओं का दान करने की परंपरा है।

पितरों के निमित्त तर्पण और श्रद्धापूर्वक दान-पुण्य करने का भी इस दिन विशेष महत्व बताया गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार अमावस्या पर किए गए ऐसे कर्म पितरों की शांति और परिवार के कल्याण के लिए शुभ माने जाते हैं।

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इस तरह 12 अगस्त का दिन एक ओर हरियाली अमावस्या के धार्मिक महत्व के कारण खास रहेगा, वहीं दूसरी ओर रात में लगने वाला साल का आखिरी पूर्ण सूर्य ग्रहण इसे खगोलीय दृष्टि से भी महत्वपूर्ण बनाएगा। भारत में ग्रहण दिखाई नहीं देने के कारण यहां इसके लिए सूतक मान्य नहीं होगा।

 


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