नई दिल्ली। हिंदू धर्म में पंचांग का विशेष महत्व माना जाता है। किसी शुभ कार्य की शुरुआत करनी हो, यात्रा पर जाना हो, पूजा पाठ करना हो या फिर किसी नए काम के लिए समय तय करना हो, पंचांग देखकर शुभ और अशुभ समय का विचार करने की परंपरा रही है।
पंचांग में केवल तिथि और वार की जानकारी ही नहीं होती, बल्कि नक्षत्र, योग, करण, राहुकाल, दिशाशूल, सूर्योदय, सूर्यास्त, चंद्रोदय और चंद्रास्त समेत कई महत्वपूर्ण जानकारियां भी मिलती हैं। गुरुवार 20 अगस्त 2026 को सावन मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि रहेगी। रात 9 बजकर 20 मिनट तक अष्टमी तिथि रहेगी, इसके बाद नवमी तिथि शुरू हो जाएगी।
अष्टमी तिथि में पूजा पाठ और धार्मिक कार्य का महत्व
20 अगस्त को गुरुवार का दिन है और सावन शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि रहेगी। अष्टमी तिथि को श्रद्धालु अपनी आस्था के अनुसार पूजा पाठ, ध्यान, मंत्र जाप और अन्य धार्मिक गतिविधियां कर सकते हैं।
पंचांग के अनुसार इस दिन अष्टमी तिथि रात 9 बजकर 20 मिनट तक रहेगी। इसके बाद नवमी तिथि का आरंभ होगा।
सूर्योदय और सूर्यास्त का समय
20 अगस्त को सूर्योदय सुबह 5 बजकर 34 मिनट पर होगा, जबकि सूर्यास्त शाम 6 बजकर 30 मिनट पर होगा।
चंद्रोदय दोपहर 12 बजकर 39 मिनट पर होगा और चंद्रास्त रात 11 बजकर 15 मिनट पर होगा। इस दिन चंद्रमा वृश्चिक राशि में स्थित रहेगा।
विशाखा नक्षत्र सुबह तक रहेगा
नक्षत्र की बात करें तो विशाखा नक्षत्र सुबह 9 बजकर 9 मिनट तक रहेगा। इसके बाद नक्षत्र परिवर्तन होगा।
पंचांग के अनुसार इस दिन इंद्र योग सुबह 4 बजकर 26 मिनट तक रहेगा। वहीं विष्टि करण सुबह 8 बजकर 17 मिनट तक रहेगा। इसके बाद अगले योग और करण का प्रभाव रहेगा।
अभिजीत मुहूर्त में बन सकता है शुभ कार्य का संयोग
गुरुवार को शुभ कार्य के लिए अभिजीत मुहूर्त सुबह 11 बजकर 37 मिनट से दोपहर 12 बजकर 27 मिनट तक रहेगा। पंचांग परंपरा को मानने वाले लोग इस अवधि को महत्वपूर्ण कार्यों के लिए शुभ मानते हैं।
हालांकि किसी विशेष धार्मिक संस्कार, विवाह, गृह प्रवेश या अन्य मांगलिक कार्य के लिए व्यक्तिगत कुंडली और स्थानीय पंचांग के अनुसार मुहूर्त देखना अधिक उचित माना जाता है।
दोपहर में रहेगा राहुकाल
20 अगस्त को राहुकाल दोपहर 1 बजकर 39 मिनट से 3 बजकर 16 मिनट तक रहेगा। पारंपरिक ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार राहुकाल में नए और महत्वपूर्ण कार्य शुरू करने से बचने की सलाह दी जाती है।
इसके अलावा गुलिक काल सुबह 8 बजकर 48 मिनट से 10 बजकर 25 मिनट तक रहेगा। यमघण्ट काल सुबह 5 बजकर 34 मिनट से 7 बजकर 11 मिनट तक रहेगा।
दक्षिण दिशा में रहेगा दिशाशूल
पंचांग के अनुसार 20 अगस्त को दिशाशूल दक्षिण दिशा में रहेगा। ऐसे में दक्षिण दिशा की यात्रा करने वाले लोग पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार दिशाशूल का विचार करते हैं।
यात्रा या किसी विशेष कार्य के लिए निकलने से पहले पंचांग में दिए गए समय और अपनी स्थानीय परंपराओं का ध्यान रखा जा सकता है।
20 अगस्त 2026 पंचांग एक नजर में
वार गुरुवार
तिथि सावन शुक्ल पक्ष अष्टमी
अष्टमी समाप्त रात 9 बजकर 20 मिनट
सूर्योदय सुबह 5 बजकर 34 मिनट
सूर्यास्त शाम 6 बजकर 30 मिनट
चंद्रोदय दोपहर 12 बजकर 39 मिनट
चंद्रास्त रात 11 बजकर 15 मिनट
चंद्र राशि वृश्चिक
नक्षत्र विशाखा सुबह 9 बजकर 9 मिनट तक
अभिजीत मुहूर्त सुबह 11 बजकर 37 मिनट से दोपहर 12 बजकर 27 मिनट
राहुकाल दोपहर 1 बजकर 39 मिनट से 3 बजकर 16 मिनट
गुलिक काल सुबह 8 बजकर 48 मिनट से 10 बजकर 25 मिनट
यमघण्ट काल सुबह 5 बजकर 34 मिनट से 7 बजकर 11 मिनट
दिशाशूल दक्षिण दिशा
धार्मिक और ज्योतिषीय मुहूर्त स्थान के अनुसार थोड़ा बदल सकते हैं, इसलिए महत्वपूर्ण संस्कार या मांगलिक कार्य के लिए स्थानीय पंचांग से समय की पुष्टि करना उचित रहेगा।



