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मुज़फ़्फ़रनगर में पन्ना धाय की जातीय पहचान पर विवाद: ‘भारत के नारी रत्न’ पुस्तक में ‘खीची राजपूत’ लिखे जाने पर आपत्ति, कलेक्ट्रेट पर प्रदर्शन कर सौंपा ज्ञापन

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मुज़फ़्फ़रनगर। भारत सरकार की ओर से प्रकाशित पुस्तक ‘भारत के नारी रत्न’ में पन्ना धाय की जातीय पहचान को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। बुधवार सुबह करीब 11 बजे अखिल भारतीय गुर्जर महासभा, मुज़फ़्फ़रनगर के बैनर तले दर्जनों लोगों ने जिला कलेक्ट्रेट पहुंचकर प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के बाद प्रधानमंत्री के नाम DM के माध्यम से एक ज्ञापन सौंपकर पुस्तक में प्रकाशित तथ्य की जांच कराने की मांग की गई।

महासभा की ओर से दिए गए ज्ञापन में कहा गया है कि सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय द्वारा प्रकाशित ‘भारत के नारी रत्न’ पुस्तक के वर्ष 2022 के संस्करण के पृष्ठ संख्या 8 पर राजस्थान की वीरांगना पन्ना धाय की जातीय पहचान ‘खीची राजपूत’ के रूप में अंकित की गई है। महासभा ने इस विवरण पर आपत्ति जताते हुए इसे उपलब्ध ऐतिहासिक एवं प्रमाणित स्रोतों से अलग बताया है।

सरकारी प्रस्तुतियों का हवाला देकर उठाया सवाल

महासभा का दावा है कि राजस्थान के पांडोली (चित्तौड़गढ़) पैनोरमा, कैमरी (राजसमंद) पैनोरमा और गोवर्धन विलास, उदयपुर स्थित पैनोरमा/पार्क एवं प्रतिमाओं सहित विभिन्न सरकारी प्रस्तुतियों में पन्ना धाय की पहचान गुर्जर समाज से संबंधित दर्शाई गई है।

महासभा ने कहा कि ऐसे में भारत सरकार के आधिकारिक प्रकाशन में अलग विवरण प्रकाशित होने से ऐतिहासिक तथ्यों को लेकर भ्रम की स्थिति पैदा होती है।

‘किसी का विरोध नहीं, तथ्यों की जांच चाहते हैं’

ज्ञापन में कहा गया है कि संगठन का उद्देश्य किसी समाज का विरोध या अपमान करना नहीं है, बल्कि ऐतिहासिक तथ्यों की प्रमाणिकता और निष्पक्षता सुनिश्चित करना है। महासभा ने कहा कि पन्ना धाय का त्याग और बलिदान किसी एक समाज तक सीमित नहीं, बल्कि देश की गौरवशाली ऐतिहासिक विरासत का हिस्सा है।

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महासभा ने केंद्र सरकार से पुस्तक में प्रकाशित जानकारी की तथ्यात्मक जांच कराने और राजस्थान सरकार सहित अन्य प्रमाणित ऐतिहासिक स्रोतों से तथ्यों का सत्यापन कराने की मांग की है।

शुद्धिपत्र की मांग

मांग की गई कि यदि पुस्तक में प्रकाशित जातीय पहचान का विवरण जांच में गलत पाया जाता है तो उसे संशोधित कर शुद्धिपत्र जारी किया जाए और पुस्तक के आगामी संस्करण में सही तथ्य प्रकाशित किए जाएं।

 

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