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जयंत चौधरी पर अखिलेश की टिप्पणी से भड़कीं मायावती, बोलीं सपा गिरगिट की तरह रंग बदलती है

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लखनऊ। राष्ट्रीय लोकदल और उसके नेता केंद्रीय मंत्री जयंत चौधरी को लेकर समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव की टिप्पणी पर बहुजन समाज पार्टी प्रमुख मायावती ने तीखा हमला बोला है। अखिलेश यादव के कथित बयान “हमने इनको चवन्नी से रुपया बना दिया है” को लेकर मायावती ने इसे अहंकारी, अमर्यादित और अलोकतांत्रिक बताया। उन्होंने अखिलेश यादव से राष्ट्रीय लोकदल, जयंत चौधरी और चौधरी चरण सिंह के परिवार के साथ ही जाट समाज से माफी मांगने की बात कही।

मायावती ने शनिवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कई पोस्ट के जरिए समाजवादी पार्टी और अखिलेश यादव पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने सपा के राजनीतिक रवैये पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि यह पार्टी गठबंधन के दौरान अपना राजनीतिक काम निकालने के बाद सहयोगियों से दूरी बना लेती है।

अखिलेश के बयान को बताया अमर्यादित

मायावती ने कहा कि सपा प्रमुख की ओर से अपनी पुरानी सहयोगी पार्टी राष्ट्रीय लोकदल और उसके नेता जयंत चौधरी के बारे में इस तरह का सार्वजनिक बयान देना पूर्णतः अमर्यादित और अशोभनीय है।

उन्होंने कहा कि इस तरह की अहंकारी और अलोकतांत्रिक बयानबाजी के लिए अखिलेश यादव को संबंधित पार्टी और उसके नेता से माफी मांगनी चाहिए। मायावती ने चौधरी चरण सिंह के परिवार का उल्लेख करते हुए जाट समाज से भी माफी मांगने को उचित बताया।

सपा के राजनीतिक चरित्र पर उठाए सवाल

बसपा प्रमुख ने समाजवादी पार्टी के राजनीतिक इतिहास पर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि सपा का चाल, चरित्र और चेहरा उसके विरोधी दलों के साथ साथ सहयोगी दलों के लिए भी राजनीतिक संकीर्णता और जातिवादी द्वेष से प्रभावित रहा है।

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मायावती ने दावा किया कि इसी वजह से कई मौकों पर सपा के राजनीतिक रवैये का चुनावी लाभ भाजपा को मिला और धर्मनिरपेक्ष ताकतें कमजोर हुईं।

सपा बसपा गठबंधन का भी किया जिक्र

मायावती ने अपने बयान में सपा और बसपा के पुराने गठबंधन का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि सपा के कथित अहंकारी स्वभाव के कारण 1993 में उत्तर प्रदेश में मुलायम सिंह यादव के साथ बना सपा बसपा गठबंधन जल्दी टूट गया था।

इसके बाद उन्होंने 2 जून 1995 के लखनऊ स्टेट गेस्ट हाउस कांड का उल्लेख करते हुए उस घटना को अपने खिलाफ हत्या के षड्यंत्र से जोड़कर सपा पर गंभीर आरोप लगाए।

मायावती ने कहा कि आगे चलकर अखिलेश यादव के नेतृत्व में लोकसभा चुनाव के दौरान बसपा और सपा के बीच गठबंधन हुआ, लेकिन चुनाव परिणाम अपेक्षा के अनुरूप नहीं आने के बाद दोनों दलों का गठबंधन टूट गया। उन्होंने इसके लिए अखिलेश यादव के कथित अहंकारी और स्वार्थी रवैये को जिम्मेदार बताया।

बाबा साहेब के सिद्धांतों का दिया हवाला

बसपा प्रमुख ने कहा कि उनकी पार्टी बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर के आत्मसम्मान और स्वाभिमान के कारवां वाली पार्टी है। उन्होंने कहा कि बसपा अपनी अंबेडकरवादी नीतियों और सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय के सिद्धांतों से कभी विमुख नहीं हो सकती।

उन्होंने सपा के साथ भविष्य में किसी राजनीतिक समीकरण को लेकर भी अपने रुख को स्पष्ट करते हुए पार्टी के राजनीतिक व्यवहार पर सवाल उठाए।

सपा पर लगाया गठबंधन का फायदा उठाने का आरोप

मायावती ने कहा कि सपा गठबंधन के मामले में केवल अपना राजनीतिक काम निकालना जानती है और काम निकल जाने के बाद सहयोगी दल के प्रति उसका रवैया बदल जाता है।

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उन्होंने इसी संदर्भ में सपा पर तीखा तंज कसते हुए कहा कि पार्टी “गिरगिट की तरह अपना रंग बदल लेती है”। मायावती ने आरोप लगाया कि सपा बाद में अपने पुराने सहयोगियों के बारे में अनाप शनाप भाषा का इस्तेमाल भी करती रहती है।

उन्होंने सर्वसमाज के लोगों से सपा की संकीर्ण और जातिवादी राजनीति से सावधान रहने की अपील की।

पीडीए को लेकर भी अखिलेश पर निशाना

मायावती ने अखिलेश यादव के पीडीए राजनीतिक नारे को लेकर भी उन पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि अखिलेश यादव अपने राजनीतिक स्वार्थ के अनुसार पीडीए में पी का अर्थ कभी पिछड़ा वर्ग तो कभी पंडितों के हित से जोड़ते हैं।

बसपा प्रमुख ने दावा किया कि सपा पिछड़े वर्गों में अपनी जाति के अलावा अन्य पिछड़े वर्गों, अल्पसंख्यकों और सवर्ण समाज, विशेष रूप से ब्राह्मण समाज की हितैषी नहीं रही है।

सपा सरकारों पर दलित और पिछड़ों के उत्पीड़न का आरोप

मायावती ने सपा की पूर्ववर्ती सरकारों पर भी गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि सपा की सरकारों में दलितों, पिछड़ों, अल्पसंख्यकों और सवर्ण समाज के लोगों, विशेष रूप से ब्राह्मणों का शोषण और उत्पीड़न हुआ।

उन्होंने आरोप लगाया कि इन वर्गों के हित में सकारात्मक कदम नहीं उठाए गए और सपा सरकारों में गुंडों, बदमाशों, माफियाओं तथा अराजक तत्वों को फायदा हुआ।

हालांकि ये मायावती द्वारा लगाए गए राजनीतिक आरोप हैं। इन दावों पर सपा की ओर से प्रतिक्रिया आने पर राजनीतिक तस्वीर और स्पष्ट हो सकती है।

आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर मायावती की अपील

मायावती ने अपने बयान के अंत में उत्तर प्रदेश के आगामी विधानसभा चुनाव का जिक्र करते हुए सर्वसमाज के लोगों से सपा को सत्ता में नहीं आने देने की अपील की।

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उन्होंने कहा कि सपा की कथित संकीर्ण और जातिवादी राजनीति से सर्वसमाज के लोगों को सावधान रहना चाहिए। मायावती का यह हमला ऐसे समय में आया है जब उत्तर प्रदेश की राजनीति में विभिन्न दलों के बीच बयानबाजी तेज हो रही है और पुराने गठबंधनों तथा राजनीतिक समीकरणों को लेकर चर्चा जारी है।

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