लखनऊ। लखनऊ क्राइम ब्रांच ने फर्जी दस्तावेजों के आधार पर जीएसटी फर्म पंजीकृत कराकर इनपुट टैक्स क्रेडिट यानी आईटीसी का कथित तौर पर फर्जी लाभ लेने वाले गिरोह का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने इस मामले में चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि गिरोह ने कागजी लेनदेन के जरिए सरकारी राजस्व को करीब 27.30 लाख रुपये का नुकसान पहुंचाया। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से छह मोबाइल फोन भी बरामद किए हैं।
फर्जी फर्म बनाकर चल रहा था आईटीसी का खेल
एडीसीपी क्राइम किरन यादव के मुताबिक, क्राइम ब्रांच की मदद से हसनगंज थाना पुलिस ने वैभव सिंह, मोहम्मद अरसान, विकास कुमार मिश्रा और मोहम्मद साकिब को गिरफ्तार किया है।
पुलिस के अनुसार आरोपियों ने मेसर्स घनश्याम इंटरप्राइजेज नाम से एक फर्म बनाई थी। इस फर्म के नाम पर कच्चा सीसा अपशिष्ट, पेरिंग्स और प्लास्टिक स्क्रैप की खरीद बिक्री के लिए जीएसटीआईएन लिया गया था।
पुलिस की जांच में फर्म के पंजीकरण और कारोबार से संबंधित दस्तावेजों में कई अनियमितताएं सामने आईं। इसके बाद फर्म की गतिविधियों की विस्तृत जांच शुरू की गई।
फर्जी दस्तावेजों से तैयार किया गया आईटीसी नेटवर्क
जांच में पुलिस को कथित तौर पर पता चला कि फर्म के माध्यम से फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल कर अलग अलग फर्मों और कंपनियों के साथ लेनदेन दिखाया गया। इन कागजी लेनदेन के आधार पर फर्जी आईटीसी का दावा किया गया और उसे अन्य फर्मों को पास ऑन किया गया।
पुलिस के मुताबिक, इस पूरी प्रक्रिया में वास्तविक कारोबार के मुकाबले कागजों पर अधिक लेनदेन दिखाकर फर्जी आईटीसी का नेटवर्क तैयार किया जा रहा था।
कागजों पर कारोबार, असल में राजस्व को नुकसान
पुलिस का आरोप है कि गिरोह के सदस्य फर्जी दस्तावेजों के आधार पर जीएसटी फर्म का इस्तेमाल करते थे। इसके बाद विभिन्न कंपनियों और फर्मों से संपर्क कर फर्जी आईटीसी को एक-दूसरे को पास ऑन किया जाता था।
इस तरह बिना वास्तविक कारोबार किए कागजी लेनदेन का नेटवर्क तैयार किया गया और उसके जरिए जीएसटी कर का कथित अपवंचन किया गया। पुलिस के अनुसार इस फर्जीवाड़े से सरकारी राजस्व को करीब 27.30 लाख रुपये का नुकसान हुआ।
30 अगस्त 2025 की शिकायत के बाद शुरू हुई जांच
एडीसीपी क्राइम ने बताया कि 30 अगस्त 2025 को प्राप्त प्रार्थना पत्र के आधार पर मेसर्स घनश्याम इंटरप्राइजेज से संबंधित जांच शुरू की गई थी।
जांच के दौरान फर्म के पंजीकरण, दस्तावेजों और कथित कारोबार में कई गड़बड़ियां सामने आईं। इसके बाद हसनगंज थाने में मामला दर्ज किया गया और जांच को आगे बढ़ाया गया।
जांच में सामने आए तथ्यों और आरोपियों की भूमिका के आधार पर पुलिस ने चार लोगों को गिरफ्तार कर लिया।
चारों आरोपियों की शैक्षिक योग्यता भी सामने आई
पुलिस के मुताबिक गिरफ्तार आरोपियों में वैभव सिंह की उम्र 35 वर्ष है और उसने बीटेक किया है। मोहम्मद अरसान 32 वर्ष का है और उसने एमकॉम की पढ़ाई की है।
विकास कुमार मिश्रा की उम्र 35 वर्ष है और वह बीए एलएलबी है। वहीं मोहम्मद साकिब 28 वर्ष का है और उसने बीए की पढ़ाई की है।
छह मोबाइल फोन बरामद
क्राइम ब्रांच और हसनगंज थाना पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में आरोपियों के कब्जे से छह मोबाइल फोन बरामद किए गए हैं। पुलिस इन मोबाइल फोन और अन्य दस्तावेजों के आधार पर गिरोह की गतिविधियों और उससे जुड़े लोगों के बारे में जानकारी जुटा रही है।
अन्य फर्मों और सहयोगियों की भी होगी जांच
एडीसीपी क्राइम किरन यादव ने बताया कि गिरफ्तार आरोपियों के खिलाफ नियमानुसार कानूनी कार्रवाई की जा रही है। साथ ही फर्जी जीएसटी फर्म और फर्जी आईटीसी के माध्यम से सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंचाने में शामिल अन्य संभावित सहयोगियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।
पुलिस संबंधित फर्मों और कंपनियों के लेनदेन की भी जांच कर रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि फर्जी आईटीसी के नेटवर्क में कितने लोग और संस्थाएं शामिल थीं।
फर्जी आईटीसी नेटवर्क की जांच आगे बढ़ी
लखनऊ पुलिस की कार्रवाई के बाद अब जांच का दायरा और बढ़ सकता है। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि आरोपियों ने कितनी फर्मों के साथ कागजी लेनदेन किया और इस नेटवर्क के जरिए कितने समय तक कथित फर्जी आईटीसी का खेल चलता रहा।
फिलहाल चार आरोपी पुलिस की गिरफ्त में हैं और मामले में आगे की विधिक कार्रवाई जारी है।



