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‘नेता हमारा मुर्दा है…’: लखनऊ में UGC के विरोध में सवर्ण मोर्चा का बड़ा प्रदर्शन, श्मशान घाट तक निकाला जुलूस

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लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में यूजीसी से जुड़े प्रस्तावित प्रावधानों के विरोध में सवर्ण मोर्चा संगठन के बैनर तले बड़ी संख्या में लोगों ने प्रदर्शन किया। प्रदर्शन में ब्राह्मण और ठाकुर समाज के लोगों के साथ अन्य वर्गों के लोग भी शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों ने वीमेन पावर लाइन चौराहे पर एकत्र होकर यूजीसी रोलबैक की मांग को लेकर नारेबाजी की।

प्रदर्शनकारियों के हाथों में अलग-अलग तरह की तख्तियां थीं। इनमें कुछ पर ‘संवैधानिक अछूत’ जैसे नारे लिखे हुए थे। करीब आधे घंटे तक चौराहे पर प्रदर्शन करने के बाद प्रदर्शनकारी बैकुंठ धाम श्मशान घाट की ओर बढ़ गए। इस दौरान पुलिस बल भी प्रदर्शनकारियों के साथ चलता रहा।

सवर्ण सांसद और विधायकों की सांकेतिक अर्थी लेकर निकले प्रदर्शनकारी

प्रदर्शन के दौरान लोगों ने सांकेतिक तौर पर सवर्ण समाज से जुड़े सांसदों और विधायकों की अर्थी भी उठा रखी थी। प्रदर्शनकारी नारे लगाते हुए आगे बढ़े।

इस दौरान ‘मुर्दा है भई, मुर्दा है, नेता हमारा मुर्दा है’ जैसे नारे लगाए गए। प्रदर्शनकारियों ने सत्ता में बैठे सवर्ण नेताओं से अपनी मांगों को लेकर सवाल करने की बात कही।

संगठन के अध्यक्ष संदीप सिंह के आह्वान पर प्रदर्शनकारी यहां जुटे थे। उन्होंने कहा कि सवर्ण समाज से जुड़े सत्ता में बैठे नेताओं से लगातार सवाल किए जा रहे हैं और यूजीसी के मुद्दे पर विरोध आगे भी जारी रहेगा।

संदीप सिंह बोले, काला कानून स्वीकार नहीं

सवर्ण मोर्चा के अध्यक्ष संदीप सिंह ने कहा कि संगठन यूजीसी के प्रस्तावित प्रावधानों का लगातार विरोध कर रहा है। उन्होंने इसे सवर्ण समाज के हितों के खिलाफ बताते हुए कहा कि यह कानून स्वीकार नहीं किया जाएगा।

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संदीप सिंह ने आरोप लगाया कि सत्ता में बैठे सवर्ण समाज के नेताओं से संगठन लगातार सवाल कर रहा है कि आखिर इस तरह के कानून की जरूरत क्यों पड़ी।

उन्होंने कहा कि संगठन का विरोध तब तक जारी रहेगा, जब तक उनकी मांग के मुताबिक संबंधित प्रावधान पूरी तरह वापस नहीं लिए जाते।

एलएलबी छात्र बोले, विश्वविद्यालयों में बढ़ेगा जातिवाद

प्रदर्शन में शामिल एलएलबी छात्र अभिनव प्रताप सिंह ने कहा कि यदि यूजीसी के प्रस्तावित प्रावधान लागू किए जाते हैं तो विश्वविद्यालयों में भी जातिवाद बढ़ सकता है।

उन्होंने कहा कि अभी छात्र एक साथ रहकर पढ़ाई करते हैं और उनके बीच किसी तरह का भेदभाव नहीं होना चाहिए। प्रदर्शनकारी छात्र ने एससी और एसटी से संबंधित प्रावधानों को विश्वविद्यालयों से हटाने की मांग भी रखी।

प्रदर्शन में ओबीसी वर्ग के लोग भी शामिल

इस प्रदर्शन की एक खास बात यह रही कि इसमें केवल सवर्ण समाज के लोग ही नहीं, बल्कि अन्य वर्गों के लोग भी शामिल दिखाई दिए। प्रदर्शन में शामिल एक युवक के हाथ में मौजूद तख्ती पर लिखा था कि वह ओबीसी है और सवर्ण भाइयों के साथ अन्याय नहीं होने देगा।

इससे प्रदर्शनकारियों ने यह संदेश देने का प्रयास किया कि उनकी आपत्ति केवल किसी एक वर्ग तक सीमित नहीं है, बल्कि वे इसे व्यापक सामाजिक और संवैधानिक मुद्दे के तौर पर देख रहे हैं।

संदीप सिंह ने भाजपा पर लगाए आरोप

संगठन अध्यक्ष संदीप सिंह ने आरोप लगाया कि यह कानून भारतीय जनता पार्टी लेकर आ रही है। उन्होंने कहा कि फिलहाल अदालत ने इस पर रोक लगा रखी है, लेकिन सवाल यह है कि इस तरह के कानून को लाने की जरूरत ही क्यों पड़ी।

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उन्होंने कहा कि उच्च शिक्षण संस्थानों में सवर्ण समाज को कमजोर करने के लिए यूजीसी को एक चक्र के रूप में देखा जा रहा है और उनका संगठन इसे सफल नहीं होने देगा।

हालांकि, प्रदर्शनकारियों द्वारा लगाए गए इन राजनीतिक आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

फर्जी मुकदमों को लेकर जताई चिंता

संदीप सिंह ने कहा कि प्रदर्शनकारियों को आशंका है कि संबंधित प्रावधानों के कारण यदि किसी सवर्ण छात्र के खिलाफ फर्जी मुकदमा दर्ज हो गया तो उसका भविष्य प्रभावित हो सकता है।

उन्होंने कहा कि इसी आशंका के कारण संगठन शुरुआत से ही इसका विरोध कर रहा है। उनका कहना है कि जब तक संबंधित कानून को पूरी तरह वापस नहीं लिया जाता, तब तक आंदोलन जारी रखा जाएगा।

पुलिस की मौजूदगी में आगे बढ़ा प्रदर्शन

वीमेन पावर लाइन चौराहे पर प्रदर्शन के दौरान पुलिस की मौजूदगी रही। करीब आधे घंटे तक नारेबाजी के बाद प्रदर्शनकारी सांकेतिक अर्थी लेकर बैकुंठ धाम श्मशान घाट की तरफ बढ़े।

प्रदर्शन के दौरान पुलिसकर्मी भी उनके साथ चलते रहे। प्रशासन की ओर से प्रदर्शन के दौरान कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए निगरानी की गई।

यूजीसी से जुड़े प्रावधानों को लेकर प्रदर्शनकारियों की आपत्तियों और उनकी मांगों के बीच अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकार और संबंधित संस्थाओं की ओर से इस मामले में आगे क्या कदम उठाया जाता है।

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