देहरादून। आगामी त्योहारों को देखते हुए उत्तराखंड सरकार ने मिलावटखोरों, जमाखोरों और खाद्य पदार्थों में नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई तेज कर दी है। मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद पूरे राज्य में बड़े पैमाने पर जांच और प्रवर्तन अभियान शुरू किया गया है। अधिकारियों को सभी जिलों में एक सप्ताह तक विशेष अभियान चलाकर खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।
सरकार की ओर से यह अभियान ऐसे समय में चलाया जा रहा है, जब रक्षा बंधन, कृष्ण जन्माष्टमी, नवरात्रि और दिवाली जैसे बड़े त्योहार नजदीक हैं। त्योहारों के दौरान मिठाइयों, दूध से बने उत्पादों, खाद्य तेल, मसालों और अन्य खाने पीने की वस्तुओं की मांग बढ़ जाती है। इसी को देखते हुए प्रशासन ने खाद्य सुरक्षा को लेकर निगरानी और कार्रवाई बढ़ा दी है।
जिलों में छापेमारी, दुकानों की जांच और सैंपलिंग
मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद अधिकारियों को सभी जिलों में अभियान चलाने को कहा गया है। डिविजनल कमिश्नरों को अभियान की निगरानी की जिम्मेदारी दी गई है। उन्हें यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं कि खाद्य पदार्थों में मिलावट, जमाखोरी और अन्य नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो।
राज्यभर में खाने पीने की दुकानों, प्रतिष्ठानों और अन्य संबंधित स्थानों पर छापेमारी की जा रही है। अधिकारियों की टीमें खाद्य पदार्थों की जांच कर रही हैं और संदिग्ध उत्पादों के नमूने लेकर उन्हें परीक्षण के लिए प्रयोगशालाओं में भेज रही हैं।
खराब और एक्सपायर सामान मौके पर ही कराया जा रहा नष्ट
अभियान के दौरान अधिकारियों को एक्सपायर हो चुके, खराब और घटिया गुणवत्ता वाले खाने पीने के सामान को मौके पर ही नष्ट करने के निर्देश दिए गए हैं। नियमों का उल्लंघन करने वाले दुकानदारों और प्रतिष्ठानों को नोटिस जारी किए जा रहे हैं।
गंभीर मामलों में न्यायालय में मुकदमे की कार्रवाई भी शुरू की जा रही है। प्रशासन का उद्देश्य त्योहारों के दौरान बाजार में सुरक्षित और मानकों के अनुरूप खाद्य सामग्री की उपलब्धता सुनिश्चित करना है।
चीनी की जमाखोरी और घरेलू एलपीजी के व्यावसायिक इस्तेमाल पर नजर
खाद्य पदार्थों में मिलावट के साथ ही प्रशासन जरूरी वस्तुओं की जमाखोरी पर भी नजर रख रहा है। अधिकारियों को विशेष रूप से चीनी जैसी जरूरी वस्तुओं की जमाखोरी रोकने के निर्देश दिए गए हैं।
इसके अलावा घरेलू एलपीजी सिलेंडरों के व्यावसायिक इस्तेमाल पर भी कड़ी निगरानी की जा रही है। नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर संबंधित लोगों और प्रतिष्ठानों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है।
देहरादून में 70 प्रतिष्ठानों की जांच
देहरादून जिले में सोमवार को खाने पीने की चीजों के 11 सैंपल लिए गए। अधिकारियों के अनुसार 1 अगस्त से अब तक जिले में 70 प्रतिष्ठानों की जांच की जा चुकी है। इस दौरान परीक्षण के लिए 48 सैंपल लिए गए हैं।
हरिद्वार में 47 प्रतिष्ठानों की जांच की गई और 27 सैंपल लिए गए। नैनीताल में 10 दुकानों की जांच के दौरान छह सैंपल लिए गए। जांच के दौरान 10 किलो घटिया गुणवत्ता की मिठाइयों को नष्ट कराया गया।
पहाड़ी जिलों में भी जांच अभियान जारी
सरकार के निर्देश के बाद पर्वतीय जिलों में भी खाद्य सुरक्षा को लेकर अभियान चलाया जा रहा है। पौड़ी में 10, बागेश्वर में तीन, अल्मोड़ा और पिथौरागढ़ में दो दो, टिहरी में छह और उत्तरकाशी में चार सैंपल लिए गए।
चंपावत में 21 स्थानों की जांच की गई और 10 सैंपल परीक्षण के लिए प्रयोगशाला भेजे गए। अधिकारियों की ओर से अन्य जिलों में भी खाद्य प्रतिष्ठानों की जांच और सैंपलिंग जारी है।
त्योहारों से पहले बाजार में मिलावट पर जीरो टॉलरेंस
सरकार का यह अभियान त्योहारों के दौरान मिलावटी और घटिया खाद्य सामग्री की बिक्री पर रोक लगाने के उद्देश्य से चलाया जा रहा है। त्योहारों के समय मिठाइयों और अन्य खाद्य उत्पादों की मांग अचानक बढ़ने के कारण मिलावट की आशंका भी बढ़ जाती है। ऐसे में प्रशासन ने बाजारों में निगरानी बढ़ा दी है।
अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि जांच के दौरान किसी भी प्रकार की लापरवाही न बरती जाए और नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
मोबाइल फूड टेस्टिंग लैब से मौके पर जांच
भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण यानी एफएसएसएआई की ओर से भी खाद्य पदार्थों में मिलावट रोकने के लिए राज्यों के साथ मिलकर विभिन्न स्तरों पर जांच अभियान चलाए जाते हैं। मौके पर तत्काल जांच की सुविधा उपलब्ध कराने के लिए राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में मोबाइल फूड टेस्टिंग लैबोरेटरी संचालित की जा रही हैं।
इन मोबाइल प्रयोगशालाओं को फूड सेफ्टी ऑन व्हील्स के नाम से जाना जाता है। इनका उद्देश्य खाद्य पदार्थों की मौके पर जांच कर संदिग्ध मामलों की पहचान करना और खाद्य सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करना है।
ज्यादा जोखिम वाले खाद्य उत्पादों पर विशेष निगरानी
खाद्य सुरक्षा से जुड़े अभियानों में जोखिम आधारित निरीक्षण और रैंडम सैंपलिंग पर भी जोर दिया जाता है। डेयरी उत्पाद, मसाले और खाद्य तेल जैसी अधिक जोखिम वाली श्रेणियों पर विशेष निगरानी रखी जाती है।
अधिकारियों की ओर से लिए गए सैंपलों को परीक्षण के लिए प्रयोगशालाओं में भेजा जा रहा है। जांच रिपोर्ट के आधार पर संबंधित प्रतिष्ठानों के खिलाफ आगे की कार्रवाई की जाती है।
नियम तोड़ने वालों पर जुर्माने से लेकर लाइसेंस रद्द करने तक कार्रवाई
खाद्य सुरक्षा नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर संबंधित कारोबारियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जा रही है। इसमें नोटिस जारी करने, जुर्माना लगाने, लाइसेंस रद्द करने और गंभीर मामलों में न्यायालयीन कार्रवाई तक के प्रावधान शामिल हैं।
सरकार और खाद्य सुरक्षा अधिकारियों का प्रयास है कि त्योहारों के दौरान लोगों को सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण खाद्य सामग्री उपलब्ध हो तथा मिलावटखोरी और जमाखोरी पर प्रभावी तरीके से रोक लगाई जा सके।
आगामी दिनों में भी यह अभियान जारी रहने की उम्मीद है और अधिकारियों को अपने अपने जिलों में लगातार बाजारों की निगरानी करने के निर्देश दिए गए हैं।



