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मुजफ्फरनगर में मृत्यु की जगह जारी कर दिया जन्म प्रमाण पत्र, 5 साल बाद खुला नगर पालिका का अनोखा कारनामा

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मुजफ्फरनगर। नगर पालिका परिषद मुजफ्फरनगर की प्रमाण पत्र व्यवस्था पर सवाल खड़ा करने वाला हैरान करने वाला मामला सामने आया है। आरोप है कि नगर पालिका के कर्मचारियों ने मृत्यु प्रमाण पत्र के स्थान पर जन्म प्रमाण पत्र जारी कर दिया। हैरानी की बात यह है कि यह गलती करीब पांच वर्षों तक परिवार की जानकारी में नहीं आई। मामला तब सामने आया, जब परिवार ने वर्ष 2026 में प्रमाण पत्र को एक जरूरी काम के लिए इस्तेमाल किया।

मामला किदवई नगर निवासी खुर्शीदा से जुड़ा है। परिवार के मुताबिक खुर्शीदा का निधन 9 अगस्त 2012 को हुआ था। इसके बाद परिजनों ने नगर पालिका में मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाने के लिए प्रक्रिया पूरी कराई। आरोप है कि करीब नौ वर्ष बाद 5 अगस्त 2021 को नगर पालिका से मृत्यु प्रमाण पत्र की जगह जन्म प्रमाण पत्र जारी कर दिया गया। परिवार ने दस्तावेज को मृत्यु प्रमाण पत्र समझकर सुरक्षित रख लिया और वर्षों तक इस गलती की जानकारी नहीं हो सकी।

मौत 2012 में हुई, प्रमाण पत्र 2021 में बना और उसमें दर्ज हो गया जन्म

परिजनों के अनुसार खुर्शीदा निवासी 134 किदवई नगर, मुजफ्फरनगर का निधन 9 अगस्त 2012 को हुआ था। परिवार ने उनकी मृत्यु का प्रमाण पत्र बनवाने के लिए नगर पालिका में आवेदन किया था।

परिवार का कहना है कि काफी समय बाद 5 अगस्त 2021 को उन्हें नगर पालिका से प्रमाण पत्र प्राप्त हुआ। परिजनों ने उसे मृत्यु प्रमाण पत्र समझकर अपने दस्तावेजों में सुरक्षित रख लिया। उस समय उन्हें इस बात का अंदाजा नहीं था कि नगर पालिका की ओर से जारी दस्तावेज मृत्यु प्रमाण पत्र नहीं बल्कि जन्म प्रमाण पत्र है।

जरूरी काम के लिए दस्तावेज लगाया तो खुली पांच साल पुरानी गलती

करीब पांच वर्षों तक यह गलती परिवार की नजर में नहीं आई। मामले का खुलासा 26 अगस्त 2026 को हुआ। परिवार के सदस्य खुर्शीदा का प्रमाण पत्र किसी जरूरी काम के लिए इस्तेमाल करने पहुंचे।

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दस्तावेज जमा करने के दौरान जब प्रमाण पत्र की जांच हुई तो पता चला कि जिस दस्तावेज को परिवार वर्षों से मृत्यु प्रमाण पत्र समझकर संभालकर रखे हुए था, वह वास्तव में जन्म प्रमाण पत्र था। यह जानकारी सामने आते ही परिवार के लोग हैरान रह गए।

परिजनों ने आरोप लगाया कि नगर पालिका कर्मचारियों की लापरवाही के कारण उन्हें वर्षों तक गलत प्रमाण पत्र अपने पास रखना पड़ा।

27 अगस्त को नगर पालिका पहुंचे परिजन

गलती का पता चलने के अगले दिन 27 अगस्त 2026 को परिवार के लोग जन्म प्रमाण पत्र की छायाप्रति लेकर नगर पालिका पहुंचे। परिजनों के मुताबिक उन्होंने अधिकारियों और कर्मचारियों को पूरे मामले की जानकारी दी।

परिवार का कहना है कि नगर पालिका कर्मचारियों ने उनसे मूल प्रमाण पत्र अपने पास ले लिया और इसके बाद सही मृत्यु प्रमाण पत्र जारी करने की प्रक्रिया शुरू की गई।

उसी दिन जारी हुआ सही मृत्यु प्रमाण पत्र

परिजनों के अनुसार 27 अगस्त को ही नगर पालिका की ओर से खुर्शीदा का नया मृत्यु प्रमाण पत्र जारी कर दिया गया। सही दस्तावेज मिलने के बाद परिवार को राहत मिली, लेकिन इस पूरी घटना ने नगर पालिका की प्रमाण पत्र जारी करने की प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए।

परिवार का कहना है कि यदि 26 अगस्त को प्रमाण पत्र किसी जरूरी काम के लिए इस्तेमाल नहीं करना पड़ता तो शायद यह गलती अभी भी सामने नहीं आती और गलत दस्तावेज उनके पास पड़ा रहता।

मृत्यु प्रमाण पत्र की जगह जन्म प्रमाण पत्र कैसे जारी हुआ?

इस मामले के सामने आने के बाद नगर पालिका की कार्यप्रणाली को लेकर कई सवाल खड़े हो रहे हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब परिवार ने मृत्यु प्रमाण पत्र के लिए आवेदन किया था तो जन्म प्रमाण पत्र कैसे जारी हो गया।

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प्रमाण पत्र जारी करने से पहले संबंधित व्यक्ति का नाम, जन्म और मृत्यु से जुड़ी जानकारी तथा आवेदन में दर्ज विवरण का सत्यापन किस स्तर पर किया गया, यह भी जांच का विषय है।

परिजनों का कहना है कि प्रमाण पत्र तैयार होने और जारी होने की प्रक्रिया के दौरान यदि दस्तावेजों की ठीक से जांच की जाती तो इतनी बड़ी गलती उसी समय पकड़ में आ सकती थी।

वर्षों तक गलत दस्तावेज परिवार के पास पड़ा रहा

मामले की गंभीरता इस बात से भी समझी जा सकती है कि गलत प्रमाण पत्र वर्ष 2021 में जारी हुआ और करीब पांच वर्ष तक परिवार को इसकी जानकारी नहीं हुई। दस्तावेज को परिवार मृत्यु प्रमाण पत्र मानकर सुरक्षित रखे रहा।

वर्ष 2026 में एक जरूरी काम के दौरान दस्तावेज की जांच हुई तो उसकी वास्तविक स्थिति सामने आई। इसके बाद परिवार को नगर पालिका जाकर दोबारा सही दस्तावेज बनवाने की प्रक्रिया पूरी करनी पड़ी।

परिजनों ने जांच और जिम्मेदारी तय करने की मांग की

परिवार ने नगर पालिका प्रशासन से पूरे मामले की जांच कराने की मांग की है। परिजनों का कहना है कि यह पता लगाया जाना चाहिए कि मृत्यु प्रमाण पत्र के आवेदन के बावजूद जन्म प्रमाण पत्र किस स्तर पर तैयार हुआ और उसे जारी करने से पहले किसी अधिकारी या कर्मचारी ने दस्तावेजों की जांच क्यों नहीं की।

परिजनों ने लापरवाही के लिए जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों की जवाबदेही तय करने तथा आवश्यक कार्रवाई की मांग की है।

नगर स्वास्थ्य अधिकारी बोलीं, जांच के बाद होगी कार्रवाई

मामले को लेकर नगर स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. अनु चौधरी ने बताया कि प्रकरण उनके संज्ञान में आया है। उन्होंने कहा कि मामले की जांच कराई जाएगी और जांच के आधार पर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।

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नगर स्वास्थ्य अधिकारी के इस बयान के बाद अब निगाहें जांच पर टिकी हैं। जांच में यह स्पष्ट होना बाकी है कि प्रमाण पत्र जारी करने में गलती किस स्तर पर हुई और इसके लिए कौन जिम्मेदार है।

नगर पालिका की प्रमाण पत्र व्यवस्था पर गंभीर सवाल

यह मामला सामने आने के बाद नगर पालिका की प्रमाण पत्र जारी करने की प्रक्रिया पर सवाल उठना स्वाभाविक है। जन्म और मृत्यु जैसे महत्वपूर्ण दस्तावेजों में मामूली गलती भी लोगों के लिए बड़ी परेशानी का कारण बन सकती है।

ऐसे में सवाल यह है कि आवेदन से लेकर प्रमाण पत्र जारी होने तक कितने स्तरों पर दस्तावेजों का सत्यापन किया जाता है। यदि सत्यापन की व्यवस्था है तो वर्ष 2021 में जारी दस्तावेज में इतनी बड़ी गलती कैसे रह गई।

मौत का प्रमाण पत्र मांगने पर मिला जन्म का दस्तावेज, पांच साल बाद खुला राज

मुजफ्फरनगर नगर पालिका का यह मामला व्यवस्था की उस चूक को सामने लाता है, जिसमें मृत्यु प्रमाण पत्र के लिए की गई प्रक्रिया के बावजूद परिवार को जन्म प्रमाण पत्र जारी कर दिया गया। करीब पांच वर्ष तक यह दस्तावेज परिवार के पास सुरक्षित रहा और गलती का पता तब चला जब उसे एक जरूरी काम के लिए इस्तेमाल किया गया। अब जांच से ही साफ होगा कि यह गलती कैसे हुई, सत्यापन में कौन सा स्तर चूक गया और इसके लिए जिम्मेदार लोगों पर क्या कार्रवाई होती है।

 


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