अंबेडकर नगर। उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के प्रमुख ओम प्रकाश राजभर ने समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव पर विभिन्न मुद्दों को लेकर तीखा हमला बोला है। जेपीएनआईसी से लेकर कानून-व्यवस्था, सरकारी नौकरियों, रक्षाबंधन और ओबीसी आरक्षण के मुद्दे पर राजभर ने अखिलेश यादव के कार्यकाल पर सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि पिछली सरकार में जनता के टैक्स के पैसे का गलत इस्तेमाल हुआ, जबकि मौजूदा योगी सरकार में विकास और रोजगार के क्षेत्र में बड़े स्तर पर काम हुआ है।
राजभर ने सवाल उठाया कि यह इमारत जनता के लिए बनाई गई थी या सैफई के लिए किसी निजी बंगले की तरह थी। उन्होंने कहा कि परियोजना की शुरुआती लागत करीब 200 करोड़ रुपये बताई गई थी, लेकिन बाद में इस पर 865 करोड़ रुपये खर्च किए गए।
जेपीएनआईसी को लेकर अखिलेश पर निशाना
ओम प्रकाश राजभर ने कहा कि जेपीएनआईसी में जनता के टैक्स के पैसे का इस्तेमाल हुआ है और अब योगी सरकार ने इसे सार्वजनिक उपयोग के लिए दोबारा खोलने का फैसला किया है। उनके मुताबिक, सरकार इसे पीपीपी मॉडल के तहत जनता के लिए उपलब्ध कराने की दिशा में आगे बढ़ रही है।
राजभर ने आरोप लगाया कि इसी वजह से अखिलेश यादव को परेशानी हो रही है। उन्होंने कहा कि जनता के पैसे से बनी संपत्ति का इस्तेमाल जनता के हित में होना चाहिए।
कानून-व्यवस्था पर गिनाए आंकड़े
अखिलेश यादव के कार्यकाल को लेकर कानून-व्यवस्था पर भी राजभर ने हमला बोला। उन्होंने दावा किया कि योगी सरकार के कार्यकाल में अपराध की घटनाओं में बड़ी कमी आई है।
राजभर के मुताबिक, 2016 की तुलना में डकैती में 90 प्रतिशत, लूट में 85 प्रतिशत, हत्या में 47 प्रतिशत और दुष्कर्म की घटनाओं में 53 प्रतिशत की कमी आई है।
उन्होंने पूर्वांचल में इंसेफेलाइटिस से होने वाली मौतों का मुद्दा भी उठाया और दावा किया कि मौजूदा सरकार में 12 करोड़ से अधिक लोगों को मुफ्त इलाज की सुविधा दी जा रही है।
राजभर ने कहा कि अखिलेश यादव के शासन में हर जिले में एक माफिया का प्रभाव होने की बात कही जाती थी, जबकि वर्तमान सरकार में माफियाओं की संपत्तियों को जब्त किया जा रहा है।
‘लाल टोपी वाले थाने में कब्जा करते थे’
राजभर ने समाजवादी पार्टी पर पुलिस और प्रशासन में कथित राजनीतिक दबाव को लेकर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि अखिलेश यादव के शासनकाल में ‘लाल टोपी वाले’ थानों पर कब्जा करते थे।
हालांकि, ये सभी आरोप राजभर के राजनीतिक बयान का हिस्सा हैं और इन पर समाजवादी पार्टी या अखिलेश यादव की ओर से इस खबर के लिए कोई प्रतिक्रिया उपलब्ध नहीं है।
रक्षाबंधन पर भी अखिलेश को घेरा
रक्षाबंधन के मौके पर महिलाओं को दिए गए कथित इनाम का मुद्दा उठाते हुए राजभर ने अखिलेश यादव पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि पहले 11 हजार रुपये के इनाम की घोषणा की गई, लेकिन महिलाओं के पहुंचने पर उन्हें 1,100 रुपये के लिफाफे दिए गए।
राजभर ने इसे ‘राखी घोटाला’ बताते हुए कहा कि बहनों का त्योहार भी कथित तौर पर घोटाले में बदल दिया गया।
सरकारी नौकरियों पर सरकार की उपलब्धियां गिनाईं
ओम प्रकाश राजभर ने योगी सरकार के कार्यकाल में सरकारी भर्तियों को लेकर भी दावा किया। उन्होंने कहा कि पिछले नौ वर्षों में पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया के जरिए 9.5 लाख सरकारी नौकरियां दी गई हैं।
उन्होंने दावा किया कि आने वाले छह महीनों में एक लाख और नियुक्ति पत्र दिए जाएंगे।
अखिलेश यादव के शासनकाल पर हमला करते हुए राजभर ने आरोप लगाया कि उस समय विज्ञापन निकलने के बाद ‘चाचा और भतीजा’ नौकरी की दुकान खोल देते थे और पैसे के आधार पर नौकरी दिए जाने की शिकायतें होती थीं।
‘चुनाव आता है तो अखिलेश को जाट याद आते हैं’
राजभर ने जातीय राजनीति को लेकर भी अखिलेश यादव पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि चुनाव आने पर ही अखिलेश यादव को जाट समाज की याद आती है।
राजभर ने दावा किया कि उनकी सरकार सामाजिक न्याय और वंचित वर्गों के हित में काम कर रही है।
ओबीसी आरक्षण के बंटवारे का मुद्दा उठाया
आरक्षण के मुद्दे पर ओम प्रकाश राजभर ने 27 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण के लाभ के वितरण को लेकर अपनी बात रखी। उन्होंने 3 सितंबर 2013 के हाई कोर्ट के कथित आदेश का उल्लेख करते हुए कहा कि 27 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण का लाभ केवल 12 जातियों तक सीमित होने की बात सामने आई थी और इसे अन्य जातियों के बीच भी बांटने की आवश्यकता बताई गई थी।
राजभर ने पूर्ववर्ती सरकार के समय गठित सामाजिक न्याय समिति का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि वर्ष 2001 में हुकुम सिंह की अध्यक्षता में सामाजिक न्याय समिति बनाई गई थी और 27 प्रतिशत आरक्षण को 7 प्रतिशत, 9 प्रतिशत और 11 प्रतिशत के हिस्सों में बांटने की बात सामने आई थी।
‘आरक्षण का लाभ जरूरतमंदों तक पहुंचे’
आरक्षण के मौजूदा स्वरूप पर सवाल उठाते हुए राजभर ने कहा कि आरक्षण का लाभ उन लोगों तक पहुंचना चाहिए जो आर्थिक और सामाजिक रूप से पिछड़े हैं और अभी तक विकास की मुख्यधारा से नहीं जुड़ सके हैं।
उन्होंने सवाल किया कि यदि कोई व्यक्ति डीएम, एसपी, डीआईजी, आईजी, मुख्यमंत्री, राष्ट्रपति या राज्यपाल जैसे उच्च पदों तक पहुंच चुका है तो उसके बच्चों को आरक्षण की जरूरत क्यों होनी चाहिए।
राजभर ने कहा कि उनका मानना है कि आरक्षण का लाभ गरीब और जरूरतमंद वर्गों तक सीमित होना चाहिए तथा संपन्न लोगों के लिए आरक्षण बंद किया जाना चाहिए।
राजनीतिक बयानबाजी के बीच बढ़ी सियासी हलचल
ओम प्रकाश राजभर के इन बयानों ने उत्तर प्रदेश की सियासत में एक बार फिर विपक्ष और सत्तापक्ष के बीच जुबानी जंग को तेज कर दिया है। जेपीएनआईसी, कानून-व्यवस्था, रोजगार, रक्षाबंधन और आरक्षण जैसे मुद्दों को लेकर राजभर ने अखिलेश यादव और उनकी पिछली सरकार को घेरने की कोशिश की है।
दूसरी ओर, इन मुद्दों पर समाजवादी पार्टी की ओर से प्रतिक्रिया सामने आने के बाद ही राजनीतिक तस्वीर और स्पष्ट होगी। फिलहाल राजभर के बयानों ने प्रदेश की राजनीति में कई पुराने और संवेदनशील मुद्दों को फिर से चर्चा के केंद्र में ला दिया है।



