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ग्लोबल चुनौतियों के बीच भारत की रफ्तार बरकरार, पहली तिमाही में 7.8 फीसदी ग्रोथ से दुनिया को दिया मजबूत संदेश: निर्मला सीतारमण

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एशविले। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा है कि भारत ने यह साबित कर दिया है कि वह वैश्विक अर्थव्यवस्था में तेजी से हो रहे बदलावों के अनुरूप खुद को ढालते हुए अपनी विकास दर को बरकरार रख सकता है। उन्होंने कहा कि वैश्विक स्तर पर कई चुनौतियां मौजूद हैं, लेकिन भारतीय अर्थव्यवस्था ने इन दबावों के बीच भी अपनी मजबूती दिखाई है।

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जी20 वित्त मंत्रियों की बैठक के दौरान एक विशेष साक्षात्कार में वित्त मंत्री ने भारत को चुनौतियों का सामना करने में सक्षम और गतिशील अर्थव्यवस्था बताया। उन्होंने माना कि भारत की अर्थव्यवस्था अभी भी कच्चे तेल, पेट्रोलियम उत्पादों और कई प्रकार के उर्वरकों के आयात पर निर्भर है, लेकिन इसके बावजूद देश की आर्थिक वृद्धि की गति बनी हुई है।

कच्चे तेल और उर्वरकों के आयात पर निर्भरता स्वीकार

निर्मला सीतारमण ने कहा कि भारत दुनिया के प्रमुख कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पाद आयातकों में शामिल है। इसके अलावा देश यूरिया, अमोनिया और डीएपी जैसे विभिन्न उर्वरकों तथा उनके कच्चे माल का भी बड़े स्तर पर आयात करता है।

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उन्होंने कहा कि भारत के पास इन क्षेत्रों में घरेलू उत्पादन क्षमता मौजूद है, लेकिन इसके बावजूद मांग को पूरा करने के लिए आयात पर निर्भरता बनी हुई है।

वित्त मंत्री ने कहा कि ऊर्जा और उर्वरक जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में वैश्विक घटनाक्रम का सीधा असर भारतीय अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। इसके बावजूद भारत ने अपनी आर्थिक गतिविधियों और विकास की गति को बनाए रखने की क्षमता दिखाई है।

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वैश्विक बदलावों के बीच विकास की रफ्तार बनाए रखना बड़ी उपलब्धि

वित्त मंत्री ने कहा कि भारत का मौजूदा आर्थिक प्रदर्शन यह दिखाता है कि देश विदेशों में होने वाले घटनाक्रमों के प्रति प्रतिक्रिया देने के साथ-साथ अपनी विकास दर को भी सुरक्षित रखने में सक्षम है।

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उन्होंने कहा कि यह एक जीवंत अर्थव्यवस्था के स्पष्ट संकेत हैं। ऐसी अर्थव्यवस्था वैश्विक स्तर पर होने वाले बदलावों को स्वीकार करती है और परिस्थितियों के अनुसार खुद को ढालती है, ताकि विकास की गति प्रभावित न हो।

उन्होंने यह भी कहा कि भारतीय रिजर्व बैंक समय-समय पर अर्थव्यवस्था का अपना आकलन जारी करता है और आर्थिक संकेतक सकारात्मक दिशा में बढ़ रहे हैं।

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पहली तिमाही में 7.8 फीसदी GDP ग्रोथ ने बढ़ाया भरोसा

भारत ने वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में 7.8 प्रतिशत की आर्थिक वृद्धि दर्ज की है। वित्त मंत्री ने इस आंकड़े को विशेष रूप से महत्वपूर्ण बताया।

उन्होंने कहा कि बाहरी दबावों और वैश्विक चुनौतियों के बीच भी भारतीय अर्थव्यवस्था का 7.8 प्रतिशत की दर से बढ़ना इस बात का संकेत है कि देश की आर्थिक बुनियाद मजबूत है।

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वित्त मंत्री ने कहा कि इस वृद्धि से यह भरोसा मिलता है कि देश के लोगों की मेहनत और सरकार की नीतियों का असर अर्थव्यवस्था पर दिखाई दे रहा है।

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मैन्युफैक्चरिंग 9.2 फीसदी, वित्तीय और पेशेवर सेवाओं में 12.1 फीसदी वृद्धि

निर्मला सीतारमण ने कहा कि भारत की आर्थिक वृद्धि किसी एक क्षेत्र तक सीमित नहीं है, बल्कि अर्थव्यवस्था के विभिन्न क्षेत्रों में विस्तार देखने को मिल रहा है।

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उन्होंने बताया कि मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र ने 9.2 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की है। वहीं वित्तीय क्षेत्र और पेशेवर सेवा क्षेत्र 12.1 प्रतिशत की दर से बढ़ रहे हैं।

वित्त मंत्री के मुताबिक विभिन्न क्षेत्रों में एक साथ हो रही वृद्धि भारतीय अर्थव्यवस्था के व्यापक आधार और उसकी मजबूती को दर्शाती है।

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करीब 700 अरब डॉलर का विदेशी मुद्रा भंडार

वित्त मंत्री ने भारत के विदेशी मुद्रा भंडार को भी अर्थव्यवस्था की मजबूती का महत्वपूर्ण संकेतक बताया। उनके अनुसार देश का विदेशी मुद्रा भंडार लगभग 700 अरब डॉलर के आसपास है।

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उन्होंने कहा कि यह कोई सामान्य आंकड़ा नहीं है और वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों के बीच इतना मजबूत विदेशी मुद्रा भंडार देश की वित्तीय क्षमता को दर्शाता है।

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डिजिटल इंडिया ने छोटे कारोबारों को पहुंचाया वैश्विक बाजार तक

वित्त मंत्री ने भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती के पीछे डिजिटल बुनियादी ढांचे को भी महत्वपूर्ण कारण बताया। उन्होंने कहा कि डिजिटल भुगतान प्रणाली ने छोटे, सूक्ष्म और मध्यम व्यवसायों के लिए कारोबार के नए अवसर खोले हैं।

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उन्होंने UPI, NPCI और QR कोड जैसी डिजिटल भुगतान व्यवस्थाओं की व्यापक पहुंच का उल्लेख करते हुए कहा कि डिजिटलीकरण ने छोटे और मध्यम व्यवसायों को वैश्विक बाजारों तक पहुंच बनाने में मदद की है।

उनके अनुसार डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर अब केवल भुगतान का माध्यम नहीं रहा, बल्कि यह आर्थिक गतिविधियों को व्यापक बनाने और कारोबारियों को नए बाजारों से जोड़ने का महत्वपूर्ण आधार बन गया है।

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कारोबार आसान बनाने के लिए हजारों नियम सरल किए गए

निर्मला सीतारमण ने कारोबारी माहौल को बेहतर बनाने में राज्य सरकारों की भूमिका की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि कारोबार करने में आने वाली अनावश्यक बाधाओं को कम करने के लिए सरकारों ने कई स्तरों पर सुधार किए हैं।

वित्त मंत्री के अनुसार 1,000 से अधिक कानूनों को हटाया गया है और लगभग 40,000 नियमों को सरल बनाया गया है। इन सुधारों का उद्देश्य कारोबारियों और उद्योगों के लिए अनुपालन का बोझ कम करना तथा निवेश के लिए बेहतर माहौल तैयार करना है।

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व्यापार समझौतों और निवेश संरक्षण पर जारी है काम

वित्त मंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार उद्योग, व्यवसाय और व्यापार जगत के साथ लगातार संपर्क में है। सरकार द्विपक्षीय व्यापार समझौतों के साथ-साथ निवेशक संरक्षण समझौतों पर भी काम कर रही है।

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उन्होंने कहा कि विदेशी जमा और विदेशों में भारतीयों द्वारा किए जा रहे निवेश को भी भारतीय बैंकिंग व्यवस्था और व्यापक आर्थिक संकेतकों में विश्वास के रूप में देखा जा सकता है।

जी20 में वैश्विक असंतुलन और वित्तीय साक्षरता पर भारत का जोर

निर्मला सीतारमण इस समय जी20 वित्त मंत्रियों की बैठक में हिस्सा लेने के लिए एशविले में हैं। उन्होंने बताया कि भारत अमेरिकी अध्यक्षता के तहत विकास, वैश्विक असंतुलन और वित्तीय साक्षरता पर दिए जा रहे फोकस का समर्थन करता है।

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उन्होंने इन मुद्दों पर निष्पक्ष और खुली चर्चा की जरूरत पर जोर दिया। वित्त मंत्री ने बैठक के दौरान अमेरिका, पोलैंड, कतर, दक्षिण कोरिया और रूस के साथ द्विपक्षीय बैठकें भी की हैं।

तेल से लेकर उर्वरक तक आयात की चुनौती, फिर भी विकास की रफ्तार कायम; दुनिया के बदलते आर्थिक समीकरणों के बीच भारत ने दिखाई अपनी ताकत

वैश्विक अर्थव्यवस्था में जारी अनिश्चितताओं और बाहरी दबावों के बावजूद भारत की 7.8 प्रतिशत की पहली तिमाही वृद्धि सरकार के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में सामने आई है। कच्चे तेल और उर्वरकों के आयात पर निर्भरता जैसी चुनौतियां कायम हैं, लेकिन मजबूत विदेशी मुद्रा भंडार, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर, विनिर्माण और सेवा क्षेत्रों की वृद्धि तथा कारोबारी सुधारों ने अर्थव्यवस्था को मजबूती दी है।

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जी20 बैठक के बाद वित्त मंत्री न्यूयॉर्क जाएंगी, जहां भारत में रुचि रखने वाले निवेशकों के साथ उनकी बैठकें प्रस्तावित हैं। सरकार की कोशिश आर्थिक सुधारों, व्यापार समझौतों और निवेश के जरिए भारत की विकास यात्रा को और गति देने की है।

 

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