अयोध्या। अयोध्या में श्री राम जन्मभूमि मंदिर के संचालन और प्रबंधन को नई संस्थागत दिशा देने की तैयारी तेज हो गई है। राम मंदिर के लिए पहले पूर्णकालिक मुख्य कार्यकारी अधिकारी यानी CEO की नियुक्ति का रास्ता लगभग साफ हो गया है। CEO के चयन के लिए गठित सर्च कमेटी ने 5,585 आवेदनों की लंबी प्रक्रिया के बाद तीन योग्य उम्मीदवारों का पैनल तैयार कर मंगलवार को श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र न्यास को सौंप दिया।
अब बुधवार, 2 सितंबर को होने वाली ट्रस्ट की महत्वपूर्ण बैठक में तीनों नामों पर विचार किया जाएगा। ट्रस्ट की स्वीकृति के बाद राम मंदिर के पहले पूर्णकालिक CEO के नाम की आधिकारिक घोषणा किए जाने की संभावना है।
ग्रीन हाउस में ट्रस्ट को सौंपी गई अंतिम रिपोर्ट
राम जन्मभूमि परिसर स्थित ग्रीन हाउस के मीटिंग हॉल में सर्च कमेटी के सदस्यों ने अपनी अंतिम रिपोर्ट ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष संत गोविंददेव गिरी और महासचिव कृष्ण मोहन को सौंपी।
रिपोर्ट सौंपे जाने के साथ ही करीब दो महीने से चल रही CEO चयन प्रक्रिया का अंतिम चरण भी पूरा हो गया। ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष संत गोविंददेव गिरी ने सर्च कमेटी के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि विश्व प्रसिद्ध राम मंदिर के बेहतर संचालन के लिए योग्य CEO की तलाश में समिति का मार्गदर्शन लिया गया था।
उन्होंने बताया कि समिति ने आवेदनों की कई स्तरों पर छंटाई करने के बाद 16 उम्मीदवारों का प्रत्यक्ष साक्षात्कार लिया और अब अपनी अंतिम रिपोर्ट न्यास को सौंप दी है।
5,585 आवेदनों से 16 उम्मीदवारों तक पहुंची प्रक्रिया
CEO के चयन के लिए बड़ी संख्या में आवेदन प्राप्त हुए थे। समिति ने तकनीकी और मैन्युअल स्क्रीनिंग के जरिए इन आवेदनों की कई स्तरों पर जांच की।
संत गोविंददेव गिरी के मुताबिक, शुरुआती स्तर पर करीब 5,500 आवेदनों में से लगभग 3,000 उम्मीदवारों को चुना गया। इसके बाद संख्या घटाकर करीब 1,500 और फिर 300 उम्मीदवारों तक लाई गई। अंतिम चरण में 16 उम्मीदवारों को प्रत्यक्ष साक्षात्कार के लिए अयोध्या बुलाया गया।
11 और 12 अगस्त को इन उम्मीदवारों के साथ आमने सामने विस्तृत संवाद और साक्षात्कार किया गया। योग्यता, अनुभव, नेतृत्व क्षमता, प्रबंधन कौशल और निर्धारित मानकों के आधार पर अंतिम मूल्यांकन के बाद तीन नामों का पैनल तैयार किया गया।
न्यायपालिका, रक्षा और विज्ञान क्षेत्र के विशेषज्ञों ने की स्क्रीनिंग
CEO चयन के लिए गठित सर्च कमेटी में सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति प्रमोद कोहली, सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट जनरल वीके चतुर्वेदी और पूर्व परमाणु वैज्ञानिक डॉ. सुरेश हावरे शामिल रहे।
तीनों सदस्यों के न्यायपालिका, रक्षा और वैज्ञानिक क्षेत्र के व्यापक अनुभव को देखते हुए चयन प्रक्रिया को बहुस्तरीय बनाया गया। समिति ने उम्मीदवारों की व्यक्तिगत क्षमता के साथ राम मंदिर और उससे जुड़े संस्थागत दायित्वों की जरूरतों को भी ध्यान में रखा।
चयन प्रक्रिया को तकनीकी रूप से सक्षम और पारदर्शी बनाए रखने के लिए दिल्ली एनसीआर, पुणे और संबलपुर में टीमों ने समानांतर रूप से स्क्रीनिंग और मूल्यांकन का काम किया। तकनीकी स्क्रीनिंग के साथ मैन्युअल मूल्यांकन को भी प्रक्रिया का हिस्सा बनाया गया।
छह जुलाई से शुरू हुई थी CEO की तलाश
राम मंदिर के पहले पूर्णकालिक CEO की नियुक्ति की प्रक्रिया 6 जुलाई 2026 को सर्च कमेटी के गठन के साथ शुरू हुई थी। 11 जुलाई को समिति की पहली बैठक में चयन प्रक्रिया और पात्रता मानदंड निर्धारित किए गए।
इसके बाद 14 जुलाई को समीर पंडा को समिति का सचिव नियुक्त किया गया। आवेदन प्रक्रिया 18 जुलाई को बंद हुई। जुलाई के शेष दिनों में प्राप्त आवेदनों की समीक्षा और मूल्यांकन किया गया।
3 से 6 अगस्त तक ऑनलाइन संवाद प्रक्रिया चली। इसके बाद 11 और 12 अगस्त को अंतिम 16 उम्मीदवारों के साथ अयोध्या में प्रत्यक्ष संवाद किया गया। सभी स्तरों पर मूल्यांकन पूरा करने के बाद तीन उम्मीदवारों का पैनल तैयार किया गया।
बढ़ती जिम्मेदारियों के बीच CEO की भूमिका होगी अहम
राम जन्मभूमि मंदिर के निर्माण के बाद अब मंदिर परिसर के विस्तार, श्रद्धालुओं की लगातार बढ़ती संख्या, विभिन्न परियोजनाओं के संचालन और प्रबंधन तथा देश विदेश से जुड़े धार्मिक एवं संस्थागत समन्वय की जिम्मेदारियां भी बढ़ रही हैं।
ऐसे में पहले पूर्णकालिक CEO की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। CEO के सामने मंदिर से जुड़े विभिन्न प्रशासनिक और प्रबंधकीय दायित्वों को व्यवस्थित तरीके से संचालित करने की जिम्मेदारी होगी।
सर्च कमेटी के सचिव समीर पंडा ने कहा कि व्यापक मूल्यांकन के आधार पर तीन अत्यंत योग्य प्रत्याशियों का पैनल न्यास को सौंप दिया गया है। उन्होंने कहा कि चयन प्रक्रिया को योग्यता आधारित, पारदर्शी और संस्थागत उत्कृष्टता के उच्च मानकों के अनुरूप रखने का प्रयास किया गया।
2 सितंबर की ट्रस्ट बैठक पर टिकी निगाहें
अब सभी की निगाहें 2 सितंबर को होने वाली श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र न्यास की बैठक पर टिकी हैं। बैठक में सर्च कमेटी की अंतिम रिपोर्ट और तीन नामों वाले पैनल पर चर्चा की जाएगी।
ट्रस्ट के पदाधिकारी रिपोर्ट पर विचार करने के बाद अंतिम निर्णय लेंगे। संत गोविंददेव गिरी ने स्पष्ट किया कि रिपोर्ट की विस्तृत जानकारी पर ट्रस्ट के पदाधिकारी एकांत में विचार करेंगे और अंतिम निर्णय न्यास मंडल करेगा।
ट्रस्ट की स्वीकृति के बाद राम मंदिर के पहले पूर्णकालिक CEO के नाम की आधिकारिक घोषणा होने की संभावना है।
ट्रस्ट के कई पदाधिकारी रहे मौजूद
रिपोर्ट सौंपे जाने के दौरान ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष संत गोविंददेव गिरी, ट्रस्टी संत दिनेंद्र दास, महासचिव कृष्ण मोहन, अयोध्या के जिलाधिकारी शरद त्रिपाठी, विशेष आमंत्रित सदस्य दिनेश जी, सचिव जगदीश आफले, जगन्नाथ गुप्त और बजरंग बागड़ा सहित अन्य पदाधिकारी मौजूद रहे।
संत गोविंददेव गिरी ने चयन समिति के सदस्यों न्यायमूर्ति प्रमोद कोहली, लेफ्टिनेंट जनरल वीके चतुर्वेदी और डॉ. सुरेश हावरे के प्रति आभार जताया। उन्होंने कहा कि समिति के सदस्यों ने दिन रात मेहनत कर चयन प्रक्रिया को पूरा किया। साथ ही उन्होंने समिति के सचिव समीर पंडा के समन्वय के लिए भी धन्यवाद दिया।
5,585 चेहरों से तीन नाम तक पहुंची तलाश, अब तय होगा कौन संभालेगा राम मंदिर के बढ़ते साम्राज्य की कमान
राम मंदिर के पहले पूर्णकालिक CEO की तलाश अब अपने निर्णायक पड़ाव पर पहुंच गई है। हजारों आवेदनों की स्क्रीनिंग, ऑनलाइन संवाद और 16 उम्मीदवारों के आमने सामने साक्षात्कार के बाद सर्च कमेटी ने तीन नामों का पैनल ट्रस्ट को सौंप दिया है।
2 सितंबर की बैठक में इन नामों पर होने वाला फैसला राम मंदिर के भविष्य के संस्थागत संचालन की दिशा तय करने वाला महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। मंदिर के विस्तार और बढ़ती श्रद्धालु संख्या के बीच नए CEO के सामने धार्मिक आस्था के इस विशाल केंद्र को आधुनिक और प्रभावी प्रबंधन व्यवस्था देने की बड़ी जिम्मेदारी होगी।



