लखनऊ। उत्तर प्रदेश में राजस्व अदालतों में लंबित मामलों के निस्तारण को लेकर योगी सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। राजस्व मामलों में लापरवाही और उदासीनता बरतने वाले अधिकारियों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए राजस्व परिषद ने पांच तहसीलदारों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। इसके अलावा 13 तहसीलदारों और नायब तहसीलदारों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है।
यह कार्रवाई मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देशों के क्रम में की गई है। राजस्व अदालतों में लंबित वादों के समयबद्ध निस्तारण में अपेक्षित प्रगति नहीं मिलने के बाद अधिकारियों की कार्यप्रणाली की गहन समीक्षा की गई थी। सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि राजस्व वादों के निस्तारण में किसी भी स्तर पर लापरवाही और उदासीनता बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
सात सितंबर को हुई तहसीलवार और अधिकारीवार समीक्षा
जानकारी के मुताबिक सात सितंबर को प्रदेश के सभी राजस्व न्यायालयों में उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता 2006 की धारा 34 के तहत दाखिल वादों की तहसीलवार और अधिकारीवार गहन समीक्षा की गई। समीक्षा में लंबित मामलों के निस्तारण की स्थिति और अधिकारियों की प्रगति का आकलन किया गया।
समीक्षा के बाद ऐसे अधिकारियों पर कार्रवाई का निर्णय लिया गया, जिनके स्तर पर मामलों के निस्तारण में अपेक्षित प्रगति नहीं पाई गई। राजस्व परिषद की इस कार्रवाई से विभाग में हड़कंप की स्थिति है।
इन तहसीलदारों पर गिरी गाज
राजस्व परिषद ने अमित यादव, तहसीलदार संडीला, हरदोई; कृष्ण कुमार मिश्रा, तहसीलदार देवरिया; सौरभ कुमार, तहसीलदार जौनपुर; रंजन वर्मा, तत्कालीन नायब तहसीलदार अयोध्या और वर्तमान में तहसीलदार गाजीपुर तथा अलख शुक्ला, तहसीलदार प्रतापगढ़ को निलंबित किया है।
अधिकारियों के खिलाफ यह कार्रवाई लंबित राजस्व वादों के निस्तारण में अपेक्षित प्रगति नहीं होने और कार्य में लापरवाही के दृष्टिगत की गई है।
एक सितंबर को भी हुई थी कार्रवाई
राजस्व मामलों में लापरवाही को लेकर यह पहली कार्रवाई नहीं है। इससे पहले एक सितंबर 2026 को भी चार तहसीलदारों और एक नायब तहसीलदार को निलंबित किया गया था।
यह कार्रवाई 29 अगस्त 2026 को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की ओर से राजस्व अदालतों में लंबित वादों के समयबद्ध निस्तारण की उच्चस्तरीय समीक्षा के बाद दिए गए निर्देशों के क्रम में लगातार की जा रही है।
मुख्यमंत्री ने समीक्षा के दौरान निर्देश दिए थे कि राजस्व वादों का निर्धारित समय सीमा के भीतर हर स्थिति में निस्तारण सुनिश्चित किया जाए। साथ ही किसी भी स्तर पर लापरवाही या उदासीनता सामने आने पर संबंधित अधिकारी के खिलाफ नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जाए।
13 अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस
लंबित वादों के निस्तारण में लापरवाही के मामले में 13 तहसीलदारों और नायब तहसीलदारों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है।
इनमें चंद्रशेखर वर्मा, तत्कालीन तहसीलदार देवरिया और वर्तमान तहसीलदार गोरखपुर; गोपाल जी, तत्कालीन नायब तहसीलदार देवरिया और वर्तमान नायब तहसीलदार कुशीनगर; रविरंजन कश्यप, तहसीलदार जौनपुर; राकेश कुमार, तत्कालीन तहसीलदार जौनपुर और वर्तमान तहसीलदार बलरामपुर शामिल हैं।
इसके अलावा कविता ठाकुर, तत्कालीन तहसीलदार बाराबंकी और वर्तमान तहसीलदार गोंडा; देवानन्द तिवारी, तत्कालीन तहसीलदार सुल्तानपुर और वर्तमान तहसीलदार फिरोजाबाद; स्नेहल वर्मा, तत्कालीन नायब तहसीलदार अयोध्या और वर्तमान नायब तहसीलदार लखनऊ; राहुल सिंह, तहसीलदार अमेठी; अनिल कुमार, तहसीलदार प्रतापगढ़; यजुवेन्द्र सिंह, नायब तहसीलदार लखनऊ; सुखवीर सिंह, नायब तहसीलदार लखनऊ; रमाशंकर मिश्रा, नायब तहसीलदार रायबरेली और शार्द सिंह, तहसीलदार लखनऊ को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है।
अनुशासनात्मक कार्रवाई भी होगी
राजस्व परिषद की ओर से इन अधिकारियों के खिलाफ नियमानुसार अनुशासनात्मक कार्रवाई की प्रक्रिया भी शुरू की जा रही है। संबंधित अधिकारियों से स्पष्टीकरण मांगा गया है और जवाब के आधार पर उनकी जवाबदेही निर्धारित करते हुए आगे की कार्रवाई की जाएगी।
सरकार का स्पष्ट संदेश है कि केवल नोटिस जारी करने तक कार्रवाई सीमित नहीं रहेगी। जांच और स्पष्टीकरण की प्रक्रिया पूरी होने के बाद नियमों के तहत आगे की कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
किसानों और आम लोगों को त्वरित न्याय दिलाने पर जोर
राजस्व न्यायालयों में जमीन, दाखिल-खारिज और अन्य राजस्व मामलों से जुड़े विवाद बड़ी संख्या में लंबित रहते हैं। इन मामलों के समय पर निस्तारण में देरी का सीधा असर किसानों और आम नागरिकों पर पड़ता है।
सरकार ने राजस्व न्यायालयों में लंबित वादों का समयबद्ध और प्रभावी निस्तारण अपनी सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल किया है। इसी के तहत अधिकारियों के कामकाज की लगातार निगरानी की जा रही है और मामलों के निस्तारण की प्रगति पर विशेष नजर रखी जा रही है।
लापरवाही पर आगे भी होगी सख्त कार्रवाई
राजस्व परिषद ने स्पष्ट किया है कि अधिकारियों के खिलाफ की जा रही कार्रवाई कोई एक बार की प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यह सतत और निरंतर निगरानी का हिस्सा है। लंबित मामलों के निस्तारण में अपेक्षित प्रगति नहीं मिलने या कार्य में लापरवाही सामने आने पर संबंधित अधिकारियों के खिलाफ बिना किसी शिथिलता के नियमानुसार दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।
सरकार का उद्देश्य राजस्व अदालतों में लंबित मामलों का तेजी से निस्तारण कर किसानों और आम नागरिकों को त्वरित, पारदर्शी और सुलभ न्याय उपलब्ध कराना है। आने वाले दिनों में भी राजस्व अदालतों के कामकाज की समीक्षा जारी रहने और लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई का सिलसिला जारी रहने के संकेत हैं।

