मुज़फ़्फ़रनगर। भगवान विश्वकर्मा जयंती महोत्सव नजदीक आते ही शोभायात्रा के आयोजन और अनुमति को लेकर विश्वकर्मा समाज में एक बार फिर मतभेद सामने आने लगे हैं। 17 सितंबर को प्रस्तावित भगवान विश्वकर्मा शोभायात्रा की अनुमति को लेकर समाज के दो पक्ष आमने-सामने हैं। एक पक्ष जगदीश पांचाल के नाम से अनुमति दिए जाने की मांग कर रहा है, जबकि दूसरा पक्ष परंपरागत रूप से विश्वकर्मा चौक समिति के नाम से अनुमति जारी करने की मांग कर रहा है।

बताया जा रहा है कि पिछले साल भी शोभायात्रा को लेकर समाज के दोनों पक्षों के बीच विवाद हुआ था। उस समय आयोजन के दौरान स्थिति को लेकर प्रशासन और पुलिस अधिकारियों को कई दौर की बैठकें और वार्ताएं करनी पड़ी थीं। अब इस साल भी शोभायात्रा से पहले अनुमति को लेकर विवाद सामने आने से प्रशासन के सामने दोनों पक्षों के बीच संतुलन बनाने की चुनौती खड़ी हो गई है।
बुधवार को विश्वकर्मा समाज के प्रतिनिधियों ने प्रशासन को दिए प्रार्थना पत्र में कहा है कि पिछले 20-30 वर्षों से 17 सितंबर को विश्वकर्मा चौक पर भगवान विश्वकर्मा जयंती के अवसर पर शोभायात्रा, भंडारे और प्रातःकालीन यज्ञ का आयोजन होता चला आ रहा है। उनके अनुसार ये धार्मिक कार्यक्रम विश्वकर्मा चौक समिति की देखरेख में आयोजित होते रहे हैं और अब भी समाज के लोग इसी परंपरा को आगे बढ़ाना चाहते हैं।
दूसरी ओर, हाल के दिनों में आयोजन की अनुमति को लेकर जगदीश पांचाल पक्ष की ओर से DM को पत्र दिए जाने की बात सामने आई है। इस पक्ष की ओर से शोभायात्रा की अनुमति अपने नाम से दिए जाने की मांग किए जाने के साथ समिति से जुड़े लोगों पर शोभायात्रा के नाम पर अवैध वसूली के आरोप लगाए गए हैं।
इसके बाद मुकेश कुमार धीमान पक्ष से जुड़े लोग भी सक्रिय हुए और उन्होंने नगर मजिस्ट्रेट, DM तथा एसएसपी से मुलाकात कर अपनी बात रखी। इस पक्ष की मांग है कि पिछले वर्षों की तरह इस बार भी भगवान विश्वकर्मा की शोभायात्रा की अनुमति विश्वकर्मा चौक समिति के नाम से ही जारी की जाए।
मुकेश कुमार धीमान पक्ष का कहना है कि जगदीश पांचाल की ओर से समिति के पदाधिकारियों पर लगाए जा रहे आरोप निराधार हैं। समिति से जुड़े लोगों के अनुसार आयोजन को लेकर सभी पक्षों के बीच बातचीत से सहमति बनाने का प्रयास भी किया गया, लेकिन सहमति नहीं बन सकी। इसके बाद प्रशासन के समक्ष औपचारिक रूप से अनुमति की मांग रखी गई।
इसी विवाद के बीच विश्वकर्मा समाज से जुड़े अंशुल पांचाल ने भी कुछ लोगों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि जिन लोगों ने पहले उनका सम्मान किया, उन्हीं लोगों ने उनसे पैसे लिए। उन्होंने आरोप लगाया कि कार्यक्रम में उन्हें उचित महत्व नहीं दिया गया, न माइक दिया गया और न ही मंच से बोलने का अवसर मिला।
अंशुल पांचाल ने यह भी आरोप लगाया कि उनका नाम अंशुल पांचाल होने के बावजूद कार्यक्रम में उनके नाम के आगे ‘अंशुल धीमान’ लिख दिया गया। उनका दावा है कि ऐसा किए जाने से कार्यक्रम में धीमान समाज की भीड़ अधिक दिखाने का प्रयास किया गया। इस संबंध में उन्होंने देशराज पांचाल, मुकेश धीमान और जगदीश पांचाल पर आरोप लगाए हैं।

