नई दिल्ली। बारिश और त्योहारी मांग के बीच सब्जियों की बढ़ती कीमतों ने आम आदमी की रसोई का बजट बिगाड़ दिया है। रसोई की सबसे जरूरी सब्जियों में शामिल प्याज के दाम में अचानक तेजी देखने को मिल रही है। दिल्ली-एनसीआर के खुदरा बाजार में प्याज का भाव 65 से 70 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गया है। खास बात यह है कि प्याज अब चीनी के खुदरा भाव को भी टक्कर दे रहा है। बाजार में चीनी भी करीब 70 रुपये प्रति किलो बिक रही है।
हालांकि केंद्र सरकार का कहना है कि प्याज की कीमतों को नियंत्रित करने और बाजार में आपूर्ति बढ़ाने के लिए लगातार कदम उठाए जा रहे हैं। सरकार अपने बफर स्टॉक से चुनिंदा शहरों में 35 रुपये प्रति किलोग्राम की रियायती दर पर प्याज उपलब्ध कराने का दावा कर रही है। इसके बावजूद दिल्ली-एनसीआर के अधिकांश इलाकों में आम उपभोक्ताओं को सस्ता प्याज आसानी से उपलब्ध नहीं हो पा रहा है।
आजादपुर मंडी में 35 से 50 रुपये किलो तक भाव
एशिया की सबसे बड़ी थोक फल एवं सब्जी मंडियों में शामिल आजादपुर मंडी के प्याज एसोसिएशन के अध्यक्ष राजेंद्र शर्मा ने बताया कि मंडी में प्याज की थोक कीमत अलग-अलग गुणवत्ता के हिसाब से 35 से 50 रुपये प्रति किलोग्राम तक चल रही है।
उन्होंने कहा कि मंडी में प्याज की आवक को लेकर फिलहाल कोई बड़ी समस्या नहीं है। सामान्य तौर पर 35 से 40 रुपये किलो के आसपास बिकने वाला प्याज खुदरा बाजार में पहुंचने के बाद उपभोक्ताओं को 65 से 70 रुपये प्रति किलो तक पड़ रहा है।
राजेंद्र शर्मा के मुताबिक मंडी में करीब 50 रुपये प्रति किलो की दर वाला प्याज मुख्य रूप से होटल और संस्थागत खरीदारों को सप्लाई किया जाता है। ऐसे में अलग-अलग गुणवत्ता और मांग के आधार पर प्याज की कीमतों में अंतर देखने को मिल रहा है।
बारिश ने सब्जियों की सप्लाई पर डाला असर
देश के कई हिस्सों में सब्जियों की कीमतों में तेजी का असर अब साफ दिखाई देने लगा है। मानसून की शुरुआत में देरी और कमजोर बारिश के कारण कई क्षेत्रों में सब्जियों के उत्पादन पर असर पड़ा। इसके बाद मानसून के चौथे दौर में हुई भारी बारिश ने मंडियों तक सब्जियों की आवाजाही और आपूर्ति को प्रभावित किया।
मांग की तुलना में बाजार में आपूर्ति प्रभावित होने का सीधा असर कीमतों पर पड़ा है। प्याज समेत कई सब्जियों के बढ़ते दाम ने आम परिवारों के मासिक रसोई बजट पर अतिरिक्त बोझ डाल दिया है। त्योहारी सीजन में मांग बढ़ने से कीमतों पर दबाव और बढ़ने की आशंका भी बनी हुई है।
सरकार 35 रुपये किलो प्याज देने का कर रही दावा
बढ़ती कीमतों के बीच केंद्र सरकार अपने बफर स्टॉक से प्याज निकालकर चुनिंदा शहरों में रियायती दर पर बिक्री करने की बात कह रही है। सरकार के मुताबिक उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए प्याज 35 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से उपलब्ध कराया जा रहा है।
सरकार का दावा है कि शुरुआती दस दिनों में करीब 17 से 19 शहरों में लगभग चार हजार टन बफर स्टॉक के प्याज की बिक्री की गई है। इसका उद्देश्य खुले बाजार में बढ़ती कीमतों को नियंत्रित करना और उपभोक्ताओं को राहत देना है।
एनसीसीएफ, नैफेड और मदर डेयरी के जरिए बिक्री
सरकारी रियायती प्याज की बिक्री के लिए विभिन्न माध्यमों का इस्तेमाल किया जा रहा है। नेशनल कंज्यूमर कोऑपरेटिव फेडरेशन ऑफ इंडिया यानी एनसीसीएफ, मदर डेयरी के सफल स्टोर, नेशनल एग्रीकल्चरल कोऑपरेटिव मार्केटिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया यानी नैफेड तथा केंद्रीय भंडार के आउटलेट्स के माध्यम से प्याज उपलब्ध कराया जा रहा है।
इसके अलावा मोबाइल वैन के जरिए भी उपभोक्ताओं तक सस्ता प्याज पहुंचाने की व्यवस्था किए जाने की बात कही गई है। हालांकि दिल्ली-एनसीआर के ज्यादातर इलाकों में इसकी पर्याप्त उपलब्धता नजर नहीं आने से सरकारी दावे और जमीनी बाजार की स्थिति के बीच अंतर दिखाई दे रहा है।
आम आदमी की थाली पर बढ़ रहा महंगाई का बोझ
प्याज के दाम में तेजी का असर केवल सब्जी खरीदने तक सीमित नहीं है। भारतीय रसोई में लगभग हर रोज इस्तेमाल होने वाला प्याज दाल, सब्जी, चटनी और कई अन्य व्यंजनों का अहम हिस्सा है। ऐसे में इसकी कीमत बढ़ने से सीधे तौर पर घरेलू बजट प्रभावित होता है।
अब जबकि प्याज का खुदरा भाव 65 से 70 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गया है और चीनी भी करीब 70 रुपये किलो बिक रही है, आम उपभोक्ता के सामने रोजमर्रा की जरूरतों का खर्च संभालना चुनौती बनता जा रहा है। आने वाले दिनों में बारिश की स्थिति, मंडियों में आवक और त्योहारी मांग के बीच प्याज की कीमतों का रुख किस ओर जाता है, इस पर उपभोक्ताओं की नजर बनी हुई है।

