अयोध्या। राम नगरी अयोध्या में भव्य राम मंदिर के निर्माण और उसकी व्यवस्थाओं को लेकर एक बेहद महत्वपूर्ण बयान सामने आया है। राम मंदिर निर्माण समिति के चेयरमैन और वरिष्ठ पूर्व प्रशासनिक अधिकारी नृपेंद्र मिश्रा ने साफ कर दिया है कि मंदिर प्रबंधन और व्यवस्थाओं के संचालन में ‘श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट’ ही सबसे सर्वोच्च संस्था है और उसका फैसला ही अंतिम माना जाएगा। आईएएनएस से विशेष बातचीत के दौरान उन्होंने मंदिर की प्रशासनिक व्यवस्था में बदलाव, श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या, चढ़ावा विवाद और निर्माण कार्य की समयसीमा (डेडलाइन) को लेकर कई बड़े और महत्वपूर्ण खुलासे किए हैं।
श्रद्धालु ही हमारी व्यवस्थाओं का केंद्र बिंदु, व्यवस्था में जोड़ी जा रही है एक नई कड़ी
नृपेंद्र मिश्रा ने देश की उन्नति की कामना करते हुए कहा कि मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम से हमारी यही प्रार्थना है कि इस राष्ट्र और इसके प्रत्येक नागरिक का संपूर्ण विकास हो। हम सभी सनातनी भगवान राम के अनन्य भक्त हैं और उनकी पूरी श्रद्धा से पूजा करते हैं। मंदिर परिसर की वर्तमान व्यवस्थाओं पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि मेरा अनुमान है कि राम मंदिर में श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए सामान्य और सुचारू व्यवस्था की जा रही होगी। किसी भी धार्मिक स्थल पर आने वाला श्रद्धालु ही व्यवस्था का मुख्य केंद्र बिंदु होता है। ऐसे में हम जब भी कोई नया विचार या योजना बनाएं, तो उसका मुख्य फोकस श्रद्धालुओं की सुख-सुविधा और सुरक्षा को लेकर ही होना चाहिए।
मंदिर में मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीओ) की नियुक्ति और प्रशासनिक पदानुक्रम (हायराcontent) के नए बदलावों पर उठ रहे सवालों का जवाब देते हुए चेयरमैन ने स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि जब भी नया सीईओ कार्यभार संभालेगा, तो वह व्यवस्थाओं को सुचारू रूप से देखेगा। सीईओ को मुख्य रूप से ट्रस्ट के जनरल सेक्रेटरी (महासचिव) से मार्गदर्शन प्राप्त करना चाहिए। नृपेंद्र मिश्रा ने आश्वस्त करते हुए कहा कि इस नई नियुक्ति से मंदिर की व्यवस्था में सिर्फ एक और मजबूत कड़ी जोड़ी जा रही है, इससे वर्तमान प्रशासनिक ढांचे या पदानुक्रम को कोई नुकसान नहीं पहुंच रहा है। उन्होंने दोटूक शब्दों में कहा कि इस पूरी व्यवस्था में ट्रस्ट ही अंतिम है और ट्रस्ट द्वारा लिया गया निर्णय ही सर्वोपरि है।
चढ़ावा विवाद पर जताया दुख, 15 अगस्त तक निर्माण कार्य पूर्ण होने की उम्मीद
हाल ही में मंदिर के चढ़ावे और दान को लेकर सामने आए विवादों पर भी नृपेंद्र मिश्रा ने अपनी चुप्पी तोड़ी। उन्होंने अपनी गहरी संवेदनशीलता व्यक्त करते हुए कहा कि चढ़ावा विवाद के मामले पर जिस तरह से आम जनता और राम भक्तों के मन में पीड़ा और दुख था, ठीक वैसी ही गहरी पीड़ा हमें भी महसूस हुई थी। हालांकि, उन्होंने यह भी साफ किया कि दान की बारीकियों और उसकी वर्तमान स्थिति को लेकर उनके पास कोई व्यक्तिगत या आधिकारिक जानकारी नहीं है। उन्होंने सामान्य रूप से मंदिर परिसर का दौरा किया और वहां आने वाले श्रद्धालुओं से सीधी बातचीत की, जिससे यह साफ हुआ कि भक्तों के मन में मंदिर की व्यवस्था को लेकर कोई अविश्वास या संदेह नहीं है।
चेयरमैन ने बताया कि देश-दुनिया से आने वाले श्रद्धालुओं का एकमात्र लक्ष्य सिर्फ और सिर्फ अपने आराध्य भगवान राम के दर्शन करना है। तमाम चर्चाओं के बावजूद रामलला के दरबार में आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या में कोई कमी नहीं आई है। सामान्य दिनों की तुलना में शनिवार और रविवार को अयोध्या पहुंचने वाले भक्तों की तादाद काफी ज्यादा बढ़ जाती है क्योंकि राम मंदिर संपूर्ण सनातनी समाज के विश्वास और आस्था का सबसे बड़ा केंद्र बन चुका है। अंत में, राम भक्तों के लिए सबसे बड़ी खुशखबरी देते हुए निर्माण समिति के चेयरमैन ने अनुमान जताया कि मंदिर के शेष बचे सभी मुख्य निर्माण कार्य आगामी 15 अगस्त तक पूरी तरह से संपन्न कर लिए जाएंगे, जिसके बाद मंदिर अपने पूरे वैभव के साथ दुनिया के सामने होगा।



