Home » उत्तर प्रदेश » चढ़ावा चोरी के विवाद के बीच दिनेंद्र दास बोले- ‘न श्रद्धालुओं की संख्या घटी, न दान में आई कमी, रामलला पर अटूट है आस्था’

चढ़ावा चोरी के विवाद के बीच दिनेंद्र दास बोले- ‘न श्रद्धालुओं की संख्या घटी, न दान में आई कमी, रामलला पर अटूट है आस्था’

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अयोध्या। अयोध्या के भव्य और दिव्य श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में पिछले दिनों सामने आए चढ़ावा चोरी के विवाद और उसके बाद श्रद्धालुओं की संख्या व दान में कमी आने की खबरों को राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने पूरी तरह खारिज कर दिया है। ट्रस्ट के प्रमुख सदस्य और निर्मोही अखाड़े के महंत दिनेंद्र दास ने रविवार को इन दावों को निराधार बताते हुए स्पष्ट किया कि रामलला के दरबार में आस्था का सैलाब पहले की तरह ही उमड़ रहा है। उन्होंने कहा कि मंदिर में पूजा-अर्चना पूरी वैष्णव परंपरा और विधि-विधान के अनुसार नियमित रूप से हो रही है तथा श्रद्धालुओं की संख्या और चढ़ावे में किसी भी प्रकार की गिरावट नहीं आई है।

रामकोट परिक्रमा में उमड़ी भीड़ आस्था का सबसे बड़ा प्रमाण, आलोचनाओं का कोई असर नहीं

महंत दिनेंद्र दास ने मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि प्रभु श्री राम के प्रति देश और दुनिया के श्रद्धालुओं की श्रद्धा अडिग है। उन्होंने अपना हालिया अनुभव साझा करते हुए बताया कि वे स्वयं हाल ही में आयोजित ‘रामकोट परिक्रमा’ में शामिल हुए थे, जहां उनके साथ लगभग 250 से 300 श्रद्धालु पूरे उत्साह के साथ पैदल चल रहे थे। उन्होंने कहा कि यह जमीनी हकीकत इस बात का सबसे बड़ा प्रमाण है कि श्रद्धालुओं की आस्था में रत्ती भर भी कमी नहीं आई है।

मंदिर प्रबंधन और हालिया विवादों को लेकर कुछ सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स और राजनीतिक गलियारों में की जा रही आलोचनाओं पर उन्होंने बेबाकी से जवाब दिया। दिनेंद्र दास ने कहा कि कुछ लोगों द्वारा की जा रही नकारात्मक टिप्पणियों से करोड़ों भक्तों की अटूट आस्था को प्रभावित नहीं किया जा सकता। उन्होंने पूर्ण विश्वास जताते हुए कहा कि भगवान राम स्वयं अंतर्यामी हैं और वे सबको सही मार्ग दिखाएंगे; समय के साथ सभी भ्रामक स्थितियां अपने आप सामान्य हो जाएंगी।

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पूर्व व्यवस्थापक गोपाल राव के प्रवेश पर दी नसीहत, बोले— ‘परंपराओं का हो सम्मान’

मंदिर के पूर्व व्यवस्थापक रहे गोपाल राव के मंदिर परिसर में प्रवेश और उससे जुड़े विवादों को लेकर पूछे गए एक तीखे सवाल पर महंत दिनेंद्र दास ने उन्हें मर्यादा में रहने की नसीहत दी। उन्होंने दोटूक शब्दों में कहा कि जो भी व्यक्ति अयोध्या आता है या मंदिर से जुड़ता है, उसे अयोध्या की प्राचीन पावन परंपराओं और वैष्णव संप्रदाय की धार्मिक मर्यादाओं का दिल से सम्मान करना चाहिए। यदि कोई व्यक्ति इन परंपराओं की गहराई को नहीं जानता है या उनका पालन करने में असमर्थ है, तो उसे स्वयं ही इस बात का ध्यान रखना चाहिए और मर्यादा नहीं लांघनी चाहिए।

उन्होंने प्रशासनिक व्यवस्था का समर्थन करते हुए कहा कि यदि स्थानीय प्रशासन या ट्रस्ट की सुरक्षा विंग किसी के प्रवेश को लेकर कोई कड़ा निर्णय लेती है, तो ट्रस्ट पूरी तरह उसी का पालन करेगा। इस विषय पर व्यक्तिगत स्तर पर किसी प्रकार की खींचतान या टिप्पणी करना बिल्कुल भी उचित नहीं होगा।

“भगवान के दिव्य कार्यों में इंसानों का अनावश्यक हस्तक्षेप कभी सफल नहीं हो सकता। जो भी व्यक्ति गलत इरादे से काम करेगा, उसका न्याय और निर्णय स्वयं भगवान राम करेंगे। किसी भी व्यक्ति या बाहरी तत्व द्वारा आवश्यकता से अधिक हस्तक्षेप लंबे समय तक नहीं चल सकता और समय के चक्र के साथ सभी चीजें अपने आप ठीक हो जाती हैं। प्रभु राम सबको सद्बुद्धि देते हैं और जो भी अनजाने में गलतियां होती हैं, उनका समाधान भी समय के साथ स्वतः हो जाता है।”

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पास व्यवस्था पर बोले— ‘पहले हुई होंगी गलतियां, अब सब सुचारू’

मंदिर में प्रवेश के लिए लागू की गई नई वीआईपी पास व्यवस्था और दर्शन की कतारों को लेकर पूछे गए सवाल पर दिनेंद्र दास ने पूरी ईमानदारी से कहा कि उन्हें तकनीकी पास व्यवस्था की बारीकियों की पूरी जानकारी तो नहीं है, लेकिन वे इतना अवश्य जानते हैं कि दर्शन की मुख्य प्रक्रिया सामान्य रूप से सुचारू है। आम श्रद्धालु बिना किसी बड़ी बाधा के सुगमता से रामलला के मुख्य विग्रह तक पहुंच रहे हैं और दर्शन लाभ ले रहे हैं।

उन्होंने स्वीकार किया कि शुरुआत में नई व्यवस्थाएं लागू करते समय प्रबंधन के स्तर पर कुछ छोटी-मोटी गलतियां या कमियां जरूर हुई होंगी, लेकिन अब रामलला की अष्टयाम सेवा और मुख्य पूजा पूरी तरह शास्त्रीय विधि-विधान के अनुसार संचालित हो रही है। उनका अटूट विश्वास है कि जब पूजा-पाठ और आध्यात्मिक क्रियाएं सही ढंग से संपन्न होंगी, तो भविष्य में किसी भी प्रकार की मानवीय भूल की संभावना खत्म हो जाएगी और सभी विवाद स्वतः ही समाप्त हो जाएंगे।

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