Home » विविध इंडिया » बाबा रामदेव का बड़ा बयान- ‘मजहब जुदा हो सकते हैं, पर पूर्वज नहीं, हिंदू राष्ट्र से मुसलमानों को डरने की जरूरत नहीं’

बाबा रामदेव का बड़ा बयान- ‘मजहब जुदा हो सकते हैं, पर पूर्वज नहीं, हिंदू राष्ट्र से मुसलमानों को डरने की जरूरत नहीं’

Facebook
Twitter
WhatsApp

नई दिल्ली। दिल्ली विश्वविद्यालय (DU) के नॉर्थ कैंपस में रविवार को एक बेहद भव्य और आध्यात्मिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। अवसर था जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती जी महाराज के 84वें प्राकट्य महोत्सव का, जिसे पूरे देश में “राष्ट्रोत्कर्ष दिवस” के रूप में बेहद श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया गया। इस गरिमामयी समारोह में पहुंचे योग गुरु बाबा रामदेव ने देश के सामाजिक और धार्मिक ताने-बाने को लेकर एक बड़ा और महत्वपूर्ण बयान दिया है। बाबा रामदेव ने हिंदू राष्ट्र की अवधारणा को स्पष्ट करते हुए देश के मुस्लिम समाज को पूरी तरह आश्वस्त किया कि उन्हें भारत में किसी भी प्रकार से डरने या असुरक्षित महसूस करने की बिल्कुल भी आवश्यकता नहीं है।

हमारे खान-पान और पहनावे अलग हो सकते हैं, पर जड़े एक हैं: योग गुरु

समारोह में उपस्थित विशाल जनसमूह और प्रबुद्ध शिक्षाविदों को संबोधित करते हुए बाबा रामदेव ने वर्ष 2009 के अपने एक पुराने वक्तव्य का हवाला दिया। उन्होंने कहा, “मैं आज फिर पूरी जिम्मेदारी के साथ कहना चाहता हूं कि भारत में किसी भी मुसलमान भाई को डरने की जरूरत नहीं है। हमारे पूजा करने के तरीके या मजहब अलग हो सकते हैं, लेकिन ऐतिहासिक और सांस्कृतिक रूप से हमारे पूर्वज एक ही हैं।” उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय के मुख्य द्वार पर लिखे संदेश का उदाहरण देते हुए कहा कि हिंदू राष्ट्र की बात से किसी को आशंकित नहीं होना चाहिए, क्योंकि हम सभी के पूर्वज मूल रूप से सनातनी हिंदू और ऋषि-मुनि ही रहे हैं।

बाबा रामदेव ने राजनीतिक दलों द्वारा फैलाए जाने वाले डर के माहौल पर कटाक्ष करते हुए कहा, “अक्सर मुसलमानों को यह कहकर डराया जाता है कि यदि भारत एक वैधानिक हिंदू राष्ट्र बन गया तो वे कहां जाएंगे? मैं मुस्लिम समुदाय से अपील करना चाहता हूं कि वे अपने महान पूर्वजों की गौरवशाली परंपरा और चरित्र को अपनाएं। जो अपने पिता या पूर्वजों का सम्मान नहीं कर सकता, वह समाज में किसी का भला नहीं कर सकता। आप अपनी धार्मिक स्वतंत्रता के अनुसार दाढ़ी रखें, मूंछ कटाएं या जैसे भी वस्त्र पहनना चाहें पहनें, उसमें कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन अपना नैतिक चरित्र हमेशा अपने सनातनी पूर्वजों जैसा ऊंचा रखें।”

ALSO READ THIS :  दिल्ली-एनसीआर में कमजोर मानसून के बीच झमाझम का दौर: 6 जुलाई के लिए ऑरेंज अलर्ट, जानें पूरे हफ्ते का हाल

हर घर बने गुरुकुल, बड़े मंदिरों को आगे आकर चलानी होंगी गौशालाएं

हम सभी आज इस पावन मंच पर एकजुट हुए हैं, इसलिए गुरुदेव शंकराचार्य जी का जो भी आदेश होगा, उसका अक्षरशः पालन किया जाएगा। हम सभी को मिलकर भारत को एक भव्य और सांस्कृतिक रूप से समृद्ध हिंदू राष्ट्र बनाना है। इसके लिए देश की शिक्षा व्यवस्था में सुधार की जरूरत है। आज के समय में हर घर को एक ‘गुरुकुल’ की भूमिका निभानी होगी, जहां अभिभावक अपने बच्चों को बचपन से ही बेहतरीन संस्कार दें ताकि वे आधुनिकता की चकाचौंध में कभी भी अपने धर्म और संस्कृति के मार्ग से विमुख न हों।” 

उन्होंने देश की धार्मिक संपदा का सही उपयोग करने का एक खाका पेश करते हुए बताया कि वर्तमान में भारत में 5 लाख से अधिक सक्रिय मंदिर हैं। यदि इनमें से केवल 500 से 1,000 समृद्ध मंदिर भी आगे आएं, तो वे अपने स्तर पर बड़े गुरुकुल और विशाल गौशालाएं एक साथ संचालित कर सकते हैं। उन्होंने अयोध्या के भव्य राम मंदिर, काशी विश्वनाथ, माता वैष्णो देवी, बांके बिहारी और सिद्धिविनायक जैसे देश के शीर्ष और प्रतिष्ठित मंदिरों से इस दिशा में अग्रणी भूमिका निभाने का आवाहन किया। कार्यक्रम के अंत में वहां मौजूद सभी संतों, विद्वानों और हजारों श्रद्धालुओं ने एक स्वर में हिंदू राष्ट्र के निर्माण और सनातन संस्कृति के वैश्विक संरक्षण के संकल्प को दोहराया।

देश-विदेश के संतों और शिक्षाविदों का रहा जमावड़ा

इस ऐतिहासिक “राष्ट्रोत्कर्ष दिवस” समारोह के मंच पर बाबा रामदेव के साथ दिल्ली विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. योगेश सिंह, प्रख्यात विचारक आचार्य धर्मवीर और आदिशंकराचार्य सनातन सेवा संस्थानम् फाउंडेशन के संदीप गर्ग मुख्य रूप से विराजमान थे। इनके अलावा विभिन्न धर्मसंघों, अखिल भारतीय पीठ परिषदों, आदित्य वाहिनी और आनंद वाहिनी के शीर्ष पदाधिकारी, देश-विदेश से पधारे सैकड़ों संत-महात्मा, वेदपाठी विद्वान और भारी संख्या में छात्र-छात्राएं इस आध्यात्मिक उत्सव के साक्षी बने।

ALSO READ THIS :  सिनेमाघरों में 'मिराय' की धमक, 'लोका' की कमाई बरकरार, देखें कौन सी फिल्म रही अव्वल

टॉप स्टोरी

ज़रूर पढ़ें