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बिजनौर में धार्मिक स्थलों पर पुलिस का बड़ा अभियान, बिना अनुमति लगे लाउडस्पीकर उतरवाए; 80 से ज्यादा जगहों पर कार्रवाई

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बिजनौर। धार्मिक स्थलों पर बिना अनुमति लगाए गए लाउडस्पीकर और निर्धारित मानक से अधिक आवाज में बजाए जा रहे ध्वनि उपकरणों के खिलाफ बिजनौर पुलिस ने तीन दिवसीय विशेष अभियान शुरू किया है। अभियान के पहले ही दिन पुलिस ने चांदपुर सर्किल क्षेत्र में करीब 80 धार्मिक स्थलों से लाउडस्पीकर उतरवाए। वहीं धामपुर क्षेत्र में भी एक दर्जन से अधिक धार्मिक स्थलों पर कार्रवाई की गई। पुलिस का यह विशेष अभियान अभी दो दिन और जारी रहेगा।

पुलिस की इस कार्रवाई के बाद धार्मिक स्थलों के जिम्मेदार लोगों में भी हलचल रही। पुलिस ने स्पष्ट किया कि अभियान किसी धर्म विशेष के खिलाफ नहीं है, बल्कि ध्वनि प्रदूषण से जुड़े निर्धारित नियमों और न्यायालय के निर्देशों का पालन कराने के उद्देश्य से चलाया जा रहा है।

चांदपुर सर्किल में 80 धार्मिक स्थलों पर कार्रवाई

चांदपुर पुलिस के मुताबिक, शासन के निर्देशों के अनुपालन में विशेष अभियान चलाया जा रहा है। इस दौरान ऐसे धार्मिक स्थलों को चिन्हित किया गया, जहां बिना अनुमति लाउडस्पीकर लगाए गए थे या ध्वनि मानकों के पालन को लेकर कार्रवाई आवश्यक थी।

पुलिस के अनुसार चांदपुर थाना क्षेत्र में 22 धार्मिक स्थलों, नूरपुर में 28, हीमपुर दीपा में 17 और शिवाला कला थाना क्षेत्र में 13 धार्मिक स्थलों से लाउडस्पीकर हटवाए गए। इस तरह चांदपुर सर्किल में कुल करीब 80 धार्मिक स्थलों पर कार्रवाई की गई।

वहीं धामपुर क्षेत्र में भी एक दर्जन से अधिक धार्मिक स्थलों से बिना अनुमति लगाए गए लाउडस्पीकर उतरवाए गए। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक अभियान के दौरान संबंधित लोगों को नियमों के बारे में जानकारी भी दी गई।

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सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के आदेशों का दिया हवाला

एसपी कृष्ण कुमार ने बताया कि शासन के निर्देशों के साथ सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के विभिन्न फैसलों तथा नॉइस पॉल्यूशन रूल्स के तहत ध्वनि की सीमा निर्धारित की गई है। धार्मिक स्थलों के जिम्मेदार लोगों से इन नियमों का पालन सुनिश्चित करने को कहा जा रहा है।

उन्होंने बताया कि प्रवचन, अजान और अन्य धार्मिक आयोजनों के दौरान लाउडस्पीकर की आवाज संबंधित परिसर तक ही सीमित रहनी चाहिए। निर्धारित मानकों से अधिक ध्वनि होने पर आसपास रहने वाले लोगों को परेशानी हो सकती है और यह ध्वनि प्रदूषण के नियमों के दायरे में आ सकता है।

मंदिर, मस्जिद और गुरुद्वारे के प्रबंधकों की जिम्मेदारी

एसपी ने कहा कि लाउडस्पीकर का वॉल्यूम निर्धारित मानकों के अनुसार रखना संबंधित धार्मिक स्थल के जिम्मेदार लोगों की जिम्मेदारी है। मंदिर के पुजारी, मस्जिद के मुतवल्ली और गुरुद्वारे के प्रबंधकों को ध्वनि की सीमा का विशेष ध्यान रखने के निर्देश दिए गए हैं।

पुलिस का कहना है कि धार्मिक आस्था और परंपराओं के साथ-साथ आसपास रहने वाले लोगों की सुविधा और शांतिपूर्ण वातावरण का ध्यान रखना भी जरूरी है। इसी उद्देश्य से अभियान के दौरान लोगों को नियमों की जानकारी देकर उनका पालन करने की अपील की जा रही है।

आवासीय क्षेत्र में 55 डेसिबल तक दिन में सीमा

पुलिस के मुताबिक, निर्धारित ध्वनि मानकों के अनुसार आवासीय क्षेत्रों में दिन के समय ध्वनि की सीमा 55 डेसिबल और रात के समय 45 डेसिबल तक निर्धारित है।

वहीं व्यावसायिक क्षेत्रों में दिन के समय 65 डेसिबल और रात में 55 डेसिबल तक की सीमा बताई गई है। पुलिस इन निर्धारित मानकों के आधार पर धार्मिक स्थलों पर लगे लाउडस्पीकरों और ध्वनि स्तर की जांच कर रही है।

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एसपी ने की नियमों का पालन करने की अपील

एसपी कृष्ण कुमार ने धार्मिक स्थलों के जिम्मेदार लोगों से अपील की है कि वे शासन और न्यायालय के निर्देशों का पालन करें। उन्होंने कहा कि लाउडस्पीकर का इस्तेमाल निर्धारित ध्वनि सीमा के भीतर ही किया जाए और बिना अनुमति ध्वनि विस्तारक यंत्र न लगाए जाएं।

एसपी ने कहा कि बेहतर और शांतिपूर्ण माहौल बनाने के लिए सभी वर्गों का सहयोग जरूरी है। धार्मिक कार्यक्रमों के दौरान भी ध्वनि प्रदूषण से जुड़े नियमों का पालन कर सामाजिक सौहार्द और आसपास के लोगों की सुविधा को बनाए रखा जा सकता है।

दो दिन और चलेगा पुलिस का विशेष अभियान

बिजनौर पुलिस का तीन दिवसीय विशेष अभियान अभी दो दिन और जारी रहेगा। इस दौरान जिले के अलग-अलग क्षेत्रों में धार्मिक स्थलों पर लगे लाउडस्पीकरों की जांच की जाएगी।

बिना अनुमति लगाए गए लाउडस्पीकर और निर्धारित ध्वनि मानकों के उल्लंघन के मामलों में पुलिस नियमानुसार कार्रवाई करेगी। पहले दिन चांदपुर और धामपुर क्षेत्र में हुई कार्रवाई के बाद माना जा रहा है कि अभियान के अगले दो दिनों में भी पुलिस कई अन्य स्थानों पर जांच और कार्रवाई कर सकती है।

पुलिस ने साफ किया है कि अभियान का उद्देश्य जिले में ध्वनि प्रदूषण को नियंत्रित करना और शासन तथा न्यायालय द्वारा निर्धारित नियमों का पालन सुनिश्चित कराना है।

 

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