नई दिल्ली। कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) ने प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज एफआईआर और सुप्रीम कोर्ट के अंतरिम आदेश को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। पार्टी के प्रवक्ता सौरव दास ने मंगलवार को जारी बयान में आरोप लगाया कि सरकार अपने राजनीतिक हितों के लिए सुप्रीम कोर्ट का इस्तेमाल नहीं कर सकती और अदालत के आदेशों को राजनीतिक लाभ के लिए हथियार की तरह नहीं अपनाया जाना चाहिए।
सौरव दास ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर पोस्ट करते हुए कहा कि प्रदर्शनकारियों के संबंध में सरकार की ओर से देश के सामने एक स्पष्ट सार्वजनिक वादा किया गया था, जिसका सम्मान किया जाना चाहिए। उन्होंने मांग की कि शांतिपूर्ण आंदोलन में शामिल लोगों के खिलाफ दर्ज सभी एफआईआर वापस ली जाएं और सरकार अपने आश्वासनों को लागू करे।
‘वास्तविक अपराधियों पर हो कानूनी कार्रवाई’
सीजेपी प्रवक्ता ने कहा कि यदि कोई वास्तविक अपराधी खुलेआम घूम रहा है तो पुलिस को उसके पुराने मामलों में कानूनी प्रक्रिया के तहत अदालत का रुख कर जमानत निरस्त कराने की कार्रवाई करनी चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि संबंधित व्यक्ति के खिलाफ गंभीर मामले लंबित थे तो वह अब तक बिना कार्रवाई के कैसे घूम रहा था।
उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों को आधार बनाकर सरकार सभी एफआईआर को आगे बढ़ाने का प्रयास नहीं कर सकती, क्योंकि इससे शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के खिलाफ भी कार्रवाई का रास्ता खुल सकता है।
‘सरकार को दुरुपयोग की छूट नहीं मिलनी चाहिए’
सौरव दास ने आरोप लगाया कि यदि सरकार को इस प्रकार की छूट दी जाती है तो उसके दुरुपयोग की आशंका बनी रहेगी। उनके अनुसार, कानून का इस्तेमाल केवल राजनीतिक विरोध को दबाने के लिए नहीं होना चाहिए।
उन्होंने कहा कि युवा इस तरह की स्थिति को स्वीकार नहीं करेंगे। उनका दावा है कि आंदोलन में शामिल छात्र और युवा लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रख रहे थे और उनके खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई उचित नहीं है।
‘लोकतांत्रिक अधिकारों का सम्मान करे सरकार’
सीजेपी प्रवक्ता ने कहा कि उनकी पार्टी उन सभी प्रदर्शनकारियों के साथ खड़ी रहेगी, जिन्होंने अपने और देश के भविष्य से जुड़े मुद्दों को लेकर शांतिपूर्ण आंदोलन में भाग लिया। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में शांतिपूर्ण विरोध-प्रदर्शन नागरिकों का संवैधानिक अधिकार है और सरकार को इसका सम्मान करना चाहिए।
उन्होंने केंद्र सरकार से अपील की कि प्रदर्शनकारियों से किए गए सार्वजनिक वादों को पूरा किया जाए और एफआईआर वापस लेने सहित सभी आश्वासनों को लागू किया जाए। उनका कहना है कि यदि ऐसा नहीं किया गया तो युवाओं में असंतोष और बढ़ सकता है।



